क्यों बनाई जाती हैं मां दुर्गा की मूर्ति वेश्‍यालय की मिट्टी से?

विनय गोस्वामी (Vinay Goswami),
जी हाँ, ये बात न केवल सत्य है बल्कि इसके पीछे बहुत ही गहराई पूर्ण उद्देश्य भी है। यों तो दुर्गा पूजा या दुर्गा उत्सव सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाने वाला त्योहार है लेकिन इसकी शुरआत पश्चिम बंगाल से हुई थी। यह त्योहार पश्चिम बंगाल का मुख्य त्योहार है जिसमे बड़े बड़े पंडाल सजाकर उनमे मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा की जाती है। कलकत्ता का एक खास इलाका पूजा की मूर्तियों के निर्माण और निर्माण करने वाले कारीगरों के लिये पूरे भारत मे प्रसिद्ध है। विधि विधान से मां दुर्गा की मूर्ति बनाने की जो परंपरा सदियों से चली आ रही है उसके अनुसार जिस मिट्टी से प्रतिमा तैयार की जाती है उस मिट्टी में थोड़ी मिट्टी पवित्र गंगा के किनारे से, थोड़ी सी मिट्टी वेश्याओं के आंगन से और कुछ गौमूत्र और गोबर, इन सब को मिलाया जाता है। इसमे जो बात अनजान लोगों को अचम्भित करती है वो ये हां की इतनी पवित्र मूर्तियों मे वेश्याओं के आंगन की मिट्टी भला क्यों मिलाई जाती है ? यों तो इसके पीछे कई किंवदंतिया मशहूर है जिनमे से एक यह भी है कि- एक दफा एक वेश्या ने मां दुर्गा की अनन्य भक्ति की …

প্রেমিকা হওয়া কী এতই সোজা? ! কলমে ~ মৌসুমী হাজরা ! Bangla Golpo



 https://scontent-maa2-2.xx.fbcdn.net/v/t1.0-9/68713349_957871911223111_9212236363477286912_n.jpg?_nc_cat=100&_nc_oc=AQndixj8UpF659J1LwDQmJULd321mkg5YpAekpzJdo1lQnOVVtuSuA5bLCHrYrOvkXg&_nc_ht=scontent-maa2-2.xx&oh=6f42592a303050b012507563ce12ea97&oe=5E1242B4
এই যে আমার শত শত চাপা অনুভূতি আছে তোমার জন্য, তুমি কি তা বুঝতে পারো?
এই যে তোমার এত বন্ধুদের ভিড়ে কেউ একজন শুধু তোমাকে ভীষণ ভাবে চায়, তোমার নামের পাশে সবুজ বাতিটা জ্বলতে দেখলেই তার মন খুশিতে ভরে যায়, তুমি তো এইসব জানতেও পারো না।
আচ্ছা, তোমার প্রেয়সী তোমায় ভীষণ ভালোবাসে বলো?
তাকে একবার জিজ্ঞাসা করে দেখবে তো, বৃষ্টিভেজা বিকেলে জানালার ধারে তোমাকে সে কল্পনা করে কিনা? বা হঠাৎ মাঝরাতে ঘুম ভেঙে গেলে তোমার কথা ভাবে কিনা? বা ভীষণ জ্বরে তোমার শরীরের উষ্ণতা খুঁজে কিনা?

প্রেমিকা হওয়া কী এতই সহজ বলো?
রোজ তোমাকে কল্পনা করে ডায়েরির পাতা ভর্তি করি, ঘুম ভাঙা সকালে তোমার প্রোফাইলে ঢুকে 'লাস্ট সিন' চেক করি, তুমি তা জানতেই পারো না, প্রেয়সীর সাথে সারারাত প্রেমালাপের পর তুমি তো তখন গভীর ভাবে ঘুমিয়ে থাকো।
তুমি হয়তো বলবে তাহলে এই অনুভূতি গুলো তোমাকে বলি না কেন!
বলে কি হবে বলো তো? দয়া করবে আমায়, ছিটেফোঁটা প্রেমের ভিক্ষে দেবে আমায়, কিন্তু আমার মনের বিশালতায় তো তুমি ডুবতে পারবে না, শুধু গভীরতা মাপার চেষ্টা করবে, কিন্তু ব্যর্থ হবে। তার থেকে আমার প্রেম আমারই থাক।
"তুমি বরং ভালো থেকে তার আঁচলে,
আমার প্রেমটা না হয় থাকুক একতরফায়;
রাধার প্রেমেই সবাই কৃষ্ণকে খোঁজে,
কেউ খোঁজে না মীরার চোখের তারায়"।
কলমে ~ মৌসুমী হাজরা

Comments