पहली बार जब घड़ी का आविष्कार हुआ , दुनिया की पहली घड़ी में समय कैसे मिलाया गया

कहते हैं की हाथ में पहनी हुई घड़ी न सिर्फ इन्सान को समय बताती है बल्कि इन्सान का समय भी बताती है। कंफ्यूज हो गये क्या? कभी आपने सोचा है कि घड़ी जो बिना रुके हर वक़्त चलती रहती है ; कहाँ बनी होगी? सबसे पहले घड़ी में टाइम कैसे सेट किया गया होगा? कहीं वो टाइम गलत तो नहीं ; वरना आज तक हम सब गलत समय जीते आ रहे हैं। इन्ही सब सवालों के साथ आज कुछ घड़ी अपनी घड़ी की बात करते हैं। कई सिद्धांतों पर बनती हैं घड़ियां जैसा की हम सब जानते हैं की घड़ी एक सिम्पल मशीन है जो पूरी तरह स्वचालित है और किसी न किसी तरह से वो हमे दिन का प्रहर बताती है। ये घड़ियाँ अलग अलग सिद्धांतों पर बनती हैं जैसे धूप घड़ी; यांत्रिक घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक घड़ी। मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ा करते थे तो आपको याद होगा की इंग्लैंड के ऐल्फ्रेड महान ने मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि आविष्कृत की। उसने एक मोमबत्ती पर, लंबाई की ओर समान दूरियों पर चिह्र अंकित कर दिए थे। प्रत्येक चिह्र तक मोमबत्ती के जलने पर निश्चित समय व्यतीत होने का ज्ञान होता था। कैसे देखते थे समय बीते समय में प्राचीन …

हवाई जहाज के बारे में कुछ रोचक तथ्य ! Some interesting facts about airplanes



1. हवाई जहाजों (Aeroplane) को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इनपर आसमानी बिजली गिरने का भी असर नहीं होता।
2. साल में एक बार हर हवाई जहाज पर आसमानी बिजली जरूर गिरती है लेकिन 1963 के बाद से जहाजों पर बिजली गिरने से एक भी हादसा नहीं हुआ है।
3. हवाई जहाज में पीछे की बीचों बीच वाली सीट सबसे ज्यादा सुरक्षित होती है यानि प्लेन हादसे के दौरान केवल यही सीट सबसे ज्यादा सेफ होती है।
4. कुछ हवाई जहाजों में सीक्रेट बेडरूम भी होते हैं जहाँ प्लेन के कर्मचारी आराम कर सकते हैं।
5. कुछ लोग मानते हैं कि हर हवाई उड़ान के बाद हवाई जहाज (Air Plane) के टायर बदले जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है| हवाई जहाज के टायर 38 टन वजन तक सह सकते हैं और 170 मील प्रति घंटा की रफ़्तार से जमीन पर भी उतर सकते हैं| सैकड़ों उड़ान भरने के बाद अगर टायर खराब होते हैं तभी बदले जाते हैं।
6. हवाई जहाज के टायर बदलने के लिए भी जैक का ही इस्तेमाल किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे कार का टायर बदला जाता है।
7. रात में प्लेन लैंडिंग के दौरान प्लेन के अंदर की लाइट डिम कर दी जाती है ताकि प्लेन से उतरने के बाद यात्रियों की आखों पर जोर ना पड़े।
8. प्लेन में दो इंजन होते हैं लेकिन प्लेन एक इंजन पर भी आराम से चल सकता है।
9. प्लेन के बाथरूम में ashtrays यानि राख भी रखी होती है ताकि अगर कोई सिगरेट जलाता है तो उसे बुझाई जा सके| प्लेन में स्मोकिंग allow नहीं है।
10. प्लेन की खिड़की के शीशों में एक बहुत छोटा छेद होता है, दरअसल ये छेद प्लेन में प्रेशर को maintain करता है।
11. ज्यादातर लोगों को शिकायत होती है कि प्लेन में खाना बहुत गन्दा होता है लेकिन इसमें प्लेन फ़ूड की कोई गलती नहीं है| दरअसल ऊँचाई पर जाकर वातावरण बदल जाता है| वहाँ मीठी चीज़ें भी कम मीठी लगती है और नमकीन चीज़ें कड़वी जैसे लगने लगती हैं।
12. हर प्लेन में यात्रियों के लिए ऑक्सीजन मास्क होते हैं लेकिन कोई ये नहीं जानता कि ऑक्सीजन मास्क में केवल 15 मिनट लायक ही ऑक्सीजन होती है।
13. आसमान में प्लेन के पीछे सफ़ेद धुआँ सा दिखाई देता है वो दरअसल प्लेन के इंजन द्वारा छोड़ी गयी जलवाष्प (भाप) होती है।
14. प्लेन का सबसे खतरनाक एक्सीडेंट 1977 में हुआ था| जब दो फुल भरे प्लेन जिनमें 600 यात्री सवार थे, जो आमने सामने रनवे पर एक दूसरे से टकरा गये थे और 500 लोगों की मौत हो गयी।

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