सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

हवाई जहाज के बारे में कुछ रोचक तथ्य ! Some interesting facts about airplanes



1. हवाई जहाजों (Aeroplane) को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इनपर आसमानी बिजली गिरने का भी असर नहीं होता।
2. साल में एक बार हर हवाई जहाज पर आसमानी बिजली जरूर गिरती है लेकिन 1963 के बाद से जहाजों पर बिजली गिरने से एक भी हादसा नहीं हुआ है।
3. हवाई जहाज में पीछे की बीचों बीच वाली सीट सबसे ज्यादा सुरक्षित होती है यानि प्लेन हादसे के दौरान केवल यही सीट सबसे ज्यादा सेफ होती है।
4. कुछ हवाई जहाजों में सीक्रेट बेडरूम भी होते हैं जहाँ प्लेन के कर्मचारी आराम कर सकते हैं।
5. कुछ लोग मानते हैं कि हर हवाई उड़ान के बाद हवाई जहाज (Air Plane) के टायर बदले जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है| हवाई जहाज के टायर 38 टन वजन तक सह सकते हैं और 170 मील प्रति घंटा की रफ़्तार से जमीन पर भी उतर सकते हैं| सैकड़ों उड़ान भरने के बाद अगर टायर खराब होते हैं तभी बदले जाते हैं।
6. हवाई जहाज के टायर बदलने के लिए भी जैक का ही इस्तेमाल किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे कार का टायर बदला जाता है।
7. रात में प्लेन लैंडिंग के दौरान प्लेन के अंदर की लाइट डिम कर दी जाती है ताकि प्लेन से उतरने के बाद यात्रियों की आखों पर जोर ना पड़े।
8. प्लेन में दो इंजन होते हैं लेकिन प्लेन एक इंजन पर भी आराम से चल सकता है।
9. प्लेन के बाथरूम में ashtrays यानि राख भी रखी होती है ताकि अगर कोई सिगरेट जलाता है तो उसे बुझाई जा सके| प्लेन में स्मोकिंग allow नहीं है।
10. प्लेन की खिड़की के शीशों में एक बहुत छोटा छेद होता है, दरअसल ये छेद प्लेन में प्रेशर को maintain करता है।
11. ज्यादातर लोगों को शिकायत होती है कि प्लेन में खाना बहुत गन्दा होता है लेकिन इसमें प्लेन फ़ूड की कोई गलती नहीं है| दरअसल ऊँचाई पर जाकर वातावरण बदल जाता है| वहाँ मीठी चीज़ें भी कम मीठी लगती है और नमकीन चीज़ें कड़वी जैसे लगने लगती हैं।
12. हर प्लेन में यात्रियों के लिए ऑक्सीजन मास्क होते हैं लेकिन कोई ये नहीं जानता कि ऑक्सीजन मास्क में केवल 15 मिनट लायक ही ऑक्सीजन होती है।
13. आसमान में प्लेन के पीछे सफ़ेद धुआँ सा दिखाई देता है वो दरअसल प्लेन के इंजन द्वारा छोड़ी गयी जलवाष्प (भाप) होती है।
14. प्लेन का सबसे खतरनाक एक्सीडेंट 1977 में हुआ था| जब दो फुल भरे प्लेन जिनमें 600 यात्री सवार थे, जो आमने सामने रनवे पर एक दूसरे से टकरा गये थे और 500 लोगों की मौत हो गयी।

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