भारतीय इतिहास के पांच बड़े गद्दार ! Five big traitors of Indian history

जयचंद
जैसे की हम सब जानते है की पृथ्वीराज चौहान देश के महान राजाओं में से एक थे, उनके शासनकाल में मोह्हमद गौरी ने देश पर कई बार आक्रमण किया पर उनको कोई बड़ी कमियाबी हासिल नहीं हुई. दूसरी तरफ कन्नौज के राका जयचंद पृथ्वीराज से अपनी बेइज्जती का बदला लेना चाहते थे, बाद में उसने मोह्हमद के साथ हाथ मिला लिया और बाद में लड़ाई में उनकी मदद भी की इसका परिणाम ये हुआ की 1192 के तराईन की लड़ाई ने मोहम्मद की जित हुई. मीर जाफर
क्या आप जानते है मीर जाफर ना होता तो हम कभी अंग्रेजो के गुलाम नहीं बन पाते. 1757 के युद्ध में सिराजुद्दौला को हराने के लिए जाफर ने अंग्रेजो की काफी मदद की थी. मीर कासिम
सिराजुद्दौला को हराने के लिए अंग्रेजो ने मीर जाफर का इस्तेमाल किया था बाद में अंग्रेजो ने मीर जाफर को हटाने के लिए मीर कासिम का इस्तेमाल किया, कासिम को राजगद्दी तो मिली पर उनको ये अहसास हो गया की उसने बहुत ही बड़ी गलती की है. मान सिंह
जैसे की हम सभी जानते है की महराणा प्रताप ने कभी भी मुगलों की गुलामी को स्वीकार नहीं किया था पर मान सिंह जैसे गद्दार ने पद के लिए खुद को मुगलों के हाथों बेच दिया. मीर सादि…

पाकिस्तान और चीन के बाद कौन सा देश भारत का सबसे बड़ा शत्रु है?Which country is the biggest enemy of India after Pakistan and China?


 
  • तुर्की ने कई बार कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए सहायता की पेशकश की है और इसने हमेशा कश्मीर को ओआईसी(इस्लामिक सहयोग संगठन) के शिखर सम्मेलन में उठाया है। और ओआईसी में तुर्की ने भारत के खिलाफ बहुत सरे प्रस्ताव पास करवाने में अहम भूमिका निभाई हैं।
  • तुर्की सरकार जम्मू और कश्मीर पर पाकिस्तान की स्थिति का पूरी तरह से समर्थन करती है।
  • तुर्की ने हमेशा इस तथ्य के बावजूद ओआईसी में भारतीय प्रवेश का विरोध किया है जबकि भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी की मेजबानी करता है। वैसे इस बार भारत को ओआईसी शिखर सम्मेलन में अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
  • एनएसजी में तुर्की ने पाकिस्तान को सदस्य बनवाने के लिए चीन के साथ भारत का विरोध किया हैं।
  • तुर्की और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने के विचार का विरोध करने वाले समूह का हिस्सा हैं। यह समूह नहीं चाहता हैं की भारत संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य बने।
  • तुर्की के साथ समस्या यह है कि वह भारत के साथ पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को अलग करने में विफल रहा है। सऊदी अरब और यूएई परंपरागत रूप से पाक समर्थक देश हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखा है। भारत और तुर्की दुश्मन नहीं हैं, लेकिन वे अच्छे दोस्त भी नहीं हैं।
  • असंख्य तुर्की आक्रमणकारियों (ग़ज़नी के महमूद से शुरू, घोर के मुहम्मद और अलाउद्दीन खिलजी से लेकर नादिर शाह तक ने आक्रमण किया था, लूट लिया था, सैकड़ों हजारों मूल भारतीयों की हत्या कर दी थी और भारत पर शासन किया था।
  • पुलवामा टेरर अटैक पर तुर्की ने पाकिस्तान के संस्करण का समर्थन किया और पाक स्थित आतंकी शिविरों पर भारतीय हवाई हमलों का विरोध किया।
अचल गौतम (Achal Gautam),

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