सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

पाकिस्तान और चीन के बाद कौन सा देश भारत का सबसे बड़ा शत्रु है?Which country is the biggest enemy of India after Pakistan and China?


 
  • तुर्की ने कई बार कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए सहायता की पेशकश की है और इसने हमेशा कश्मीर को ओआईसी(इस्लामिक सहयोग संगठन) के शिखर सम्मेलन में उठाया है। और ओआईसी में तुर्की ने भारत के खिलाफ बहुत सरे प्रस्ताव पास करवाने में अहम भूमिका निभाई हैं।
  • तुर्की सरकार जम्मू और कश्मीर पर पाकिस्तान की स्थिति का पूरी तरह से समर्थन करती है।
  • तुर्की ने हमेशा इस तथ्य के बावजूद ओआईसी में भारतीय प्रवेश का विरोध किया है जबकि भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी की मेजबानी करता है। वैसे इस बार भारत को ओआईसी शिखर सम्मेलन में अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
  • एनएसजी में तुर्की ने पाकिस्तान को सदस्य बनवाने के लिए चीन के साथ भारत का विरोध किया हैं।
  • तुर्की और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने के विचार का विरोध करने वाले समूह का हिस्सा हैं। यह समूह नहीं चाहता हैं की भारत संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य बने।
  • तुर्की के साथ समस्या यह है कि वह भारत के साथ पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को अलग करने में विफल रहा है। सऊदी अरब और यूएई परंपरागत रूप से पाक समर्थक देश हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखा है। भारत और तुर्की दुश्मन नहीं हैं, लेकिन वे अच्छे दोस्त भी नहीं हैं।
  • असंख्य तुर्की आक्रमणकारियों (ग़ज़नी के महमूद से शुरू, घोर के मुहम्मद और अलाउद्दीन खिलजी से लेकर नादिर शाह तक ने आक्रमण किया था, लूट लिया था, सैकड़ों हजारों मूल भारतीयों की हत्या कर दी थी और भारत पर शासन किया था।
  • पुलवामा टेरर अटैक पर तुर्की ने पाकिस्तान के संस्करण का समर्थन किया और पाक स्थित आतंकी शिविरों पर भारतीय हवाई हमलों का विरोध किया।
अचल गौतम (Achal Gautam),

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