भारत के कुछ अजीबोगरीब कानून ! Some Unknown Laws of India

अंग्रेजों ने अपने शासन काल के दौरान बहुत से सख्त कानून बनाये थे ताकि इन कानूनों का सहारा लेकर भारतीयों को मानशिक रूप से गुलाम बनाया जा सके | इस लेख में हमने ऐसे ही कुछ कानूनों के बारे में बताया है जो कि या तो वर्तमान में प्रासंगिक नही हैं या फिर भारत सरकार ने उन्हें बदल दिया है परन्तु कुछ कानून तो आज भी अपने पुराने रूप में मौजूद हैं| 1. भारतीय दण्ड संहिता की धारा, 309: इस कानून के अनुसार यदि आप आत्महत्या करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित कर लें कि आप अपने प्रयास में सफल हो जायें, नहीं तो जिन्दा बचने पर आपको परेशानी झेलनी पड़ सकती है क्योंकि भारत में आत्महत्या का प्रयास क़ानूनी रूप से अवैध है और यदि आप ऐसा करने में विफल हो जाते हैं तो आपको जेल भी जाना पड़ सकता है। भारतीय कानून यह मानता है कि आपके शरीर पर सिर्फ आपका ही हक़ नही है बल्कि आपकी माँ, पिता, बहिन और भाई इत्यादि का भी उतना ही हक़ है जितना कि आपका | 2. भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898: इस अधिनियम का कहना है कि केवल भारत सरकार ही पत्र वितरित कर सकती थी इस प्रकार भारत में सभी प्रकार की कूरियर कंपनियों का बिज़नेस गैर कान…

सबसे निराली और अजीब संस्कृति की देश ! The country of the most unique and strange culture



प्रिय आशीष जी इस प्रश्न का उत्तर आपने भी लिखा और आपके अतिरिक्त औरों ने भी लिखा है । और जवाब बहुत से लोगों को पसंद भी आये हैं । लेकिन मैं इन सबसे सहमत नहीं हूँ ।
ज़रा सोचिये आप ने जिन देशों की संस्कृति को निराली या अजीब बताया है क्या वे सभी देश अपनी संस्कृति को अजीब मानते हैं ये आपने नहीं सोचा है।
जो व्यक्ति जिस माहौल में रहता है वह उसे अजीब नहीं लगता दूसरों को लग सकता है ख़ासकर उसे जो छोटी बुद्धी से सोच रहा हो। अन्यथा बुद्धि का प्रयोग करने वाले को पता है हमारी संस्कृति अन्य किसी भी संस्कृति जिस से नही मिलती उसके लिये अजीब हो सकती है।
आपने जो क्रिया कलाप नहीं देखे हैं आप उन्हें अजीब समझने की भूल कर बैठते हैं । और हो सकता है आप उन्हें अभद्र या मूढ़ या मूर्ख समझने की भूल इस सोच की वजह से कर सकते हैं।
आप जानते नहीं या न जानने का नाटक कर रहे हैं कि वर्षों पुरानी भारतिय संस्कृति को जब अंग्रेज़ों ने देखा तो अजीब समझने की भूल कर बैठे। और बहुत सी आयुर्वेदिक किताबों का दहन कर बैठे। जिन में बहुत सी असाध्य बीमारियों का इलाज था।
अब जब विज्ञान ने पृथ्वी से बाहर क़दम रखा तो उसी मूर्खों वाली संस्कृत भाषा को वैज्ञानिक माना जिसका मज़ाक़ उड़ाते वे नही थकते थे। अब उसी को सीखने यहाँ चले आते हैं।
उसी योगा को विश्व ने अपनाया जिसे वे अजीब मान रहे थे या गँवार मान रहे थे।
अत: किसी भी देश की संस्कृति अजीब नही है उनका सम्मान करें । जिन प्राचीन लेखों को विश्व ने मज़ाक़ बताया अजीब बताया हम उन्हें सही साबित करने के लिये उन्हें विज्ञान से जोड़ कर बताते हैं।
हम संजय के दूर से महाभारत देखने को टेलीविजन का आविष्कार बताते नहीं थकते ताकि लोगो को वह अजीब या झूठा न लगे और महाभारत का मज़ाक़ न बने। उनके हथियारों को प्रमाणु मिसाइल से जुड़ा बताने लगे हैं जब से मिसाइल की खोज हुई है। रावण के पुष्पक विमान को विमान की खोज बताने लगे हैं जब से विमान की खोज हो गई है उससे पहले अंग्रेज़ ही नहीं वरन हम भी मज़ाक़ उड़ाने से पीछे नहीं हटते थे।
अब भारद्वाज ऋषि के बताए नीयमों को फिर से समझने के लिये संस्कृत सीखने लगे नहीं तो हमने संस्कृत को मार ही दिया था।
अजीब तो हम हैं उन लोगों के लिये जिन्हें हम समझने की भूल कर बैठते हैं।

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