कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

Why are mobile numbers only ten digits ! मोबाइल नंबर दस अंकों के ही क्यों होते हैं



कारण
तकनीकी और उपयोगक कारणों से दुनिया में वर्तमान में मोबाइल नंबर 10 से 11 अंकों से भिन्न होते हैं। तकनीकी कारणों से, ब्रिटेन और चीन में मोबाइल फोन नंबर अब 11 अंकों तक चले गए हैं।
भारत में सभी मोबाइल नंबरों में सरकार की राष्ट्रीय नंबरिंग योजना (एनएनपी) के तहत 10 अंक हैं। मोबाइल फोन नंबर में अंकों की संख्या देश के कोड को लगाए बिना अधिकतम मोबाइल फोन का वर्णन करती है। जो 91 (भारत के लिए) है।
आगे क्या होगा?
2003 तक हमारे पास 9 अंकों का सेल नंबर था, जिससे अधिकतम संख्या में सेल संख्या 109 थी, यानी अधिकतम 1000 मिलियन या 100 करोड़ ग्राहक। चूंकि हमारी आबादी 125 करोड़ के करीब है, जाहिर है कि हमारे पास 9 अंकों का सेल फोन नंबर नहीं हो सकता है।
जिसके बाद 10 अंको वही प्रणाली को लागू किया गया। 10 अंकों वाले सेल नंबर को अपनाने की क्षमता 10 अरब या 1000 करोड़ हैं यानी 10 अंक के नंबर 1000 करोड़ ग्राहकों की क्षमता प्रदान करती है जिससे हमारे कुल जनसंख्या को मोबाइल नंबर प्राप्त हो सके और और साथ कि इसकी कमी भी न हो।
कब हुआ लागू?
2003 में, दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने भारत में 10 अंकों के मोबाइल नंबर लागू किए थे जो 30 वर्षों तक की जरूरतों को पूरा करेंगे। फरवरी 2009 को, भारत ने 375.74 मिलियन वायरलेस ग्राहकों का उपयोगकर्ता आधार पंजीकृत किया।
मौजूदा 10 अंकों की संख्या योजना के तहत, भारत अधिकतम 1 अरब मोबाइल नंबर जारी कर सकता हैं और अगले कुछ वर्षों में भारत में मोबाइल फोन कनेक्शन इस आंकड़े को पार के लेंगे। डीओटी ने पहले जनवरी 2010 में 10-अंकों से 11 अंकों के हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया था।
हालांकि अभी 11 अंको के नंबर आने में समय हैं लेकिन यह काम बहुत जल्द होने वाला हैं और इसको लेकर सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। और आपको कुछ वर्षों के अंदर ही 11 अंको के फ़ोन नंबर देखने को मिल जाएंगे।

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