सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

कुछ ऐसे दिलचस्प तथ्य ! Some interesting facts


आप जर्मनी और डेनमार्क के बीच का समुद्र, एक ट्रेन में बैठ कर पार कर सकते हैं। समुद्र पार करने के लिए यह ट्रेन एक जहाज पे चढ़ जाती है और गंतव्य पे उतर जाती है।
Vogelfluglinie हैम्बर्ग और कोपेनहेगन के बीच एक ट्रेन लाइन है जो जर्मन तटीय स्टेशन, पुटगार्डन और डेनिश स्टेशन, Rødby को जोड़ती है।
पुट्टगार्डन में ट्रेन धीरे-धीरे एक फेरी के निचले डेक पर चढ़ती है और आपको ट्रेन से उतरने के लिए कहा जाता है।
पुटगार्डन में फेरी पर चढ़ती हुई ट्रेनें:
आप डेक पर खड़े होकर समुद्र के लुभावने दृश्य का आनंद ले सकते हैं या ड्यूटी-फ्री स्टोर में खरीददारी कर सकते हैं।
पीछे आप जर्मनी देख सकते हैं:
Rødby पहुंचने पर, आपको अपनी ट्रेन पर वापस चढ़ने के लिए कहा जाता है, जो फिर जहाज से नीचे उतरती है और कोपेनहेगन के रास्ते पर चल पड़ती है!
फेरी से उतरती हुई ट्रेन:
इसी प्रकार की एक और सेवा, बर्लिन नाइट एक्सप्रेस / स्कैंडिनेविया नाइट एक्सप्रेस मार्ग (माल्मो और बर्लिन के बीच) पर ट्रेलबॉर्ग, स्वीडन और सस्निट्ज़, जर्मनी के बीच भी चलती है। इस सेवा के बारे में मजेदार बात यह है कि इंजन हर तरफ से अलग हो जाता है, और केवल डिब्बे ही जहाज पर चढ़ाये जाते हैं। यकीनन इसमें काफी समय लगता है, लेकिन यह एक रात की ट्रेन है, इसलिए ज्यादातर यात्री सो रहे होते हैं।
इंजीनियरिंग का कितना अद्भुत नमूना है यह !

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