दुनिया में कुछ अजीब पेशे/रोजगार ! Some strange profession / jobs in this world

इस दुनिया में कुछ अजीब पेशे/रोजगार क्या हैं? नग्न मॉडल- इनका काम होता है की वे अपने वस्त्र उतारकर नग्न अवस्था में कला के छात्रो के सामने बैठ जाए। मराठी फिल्म "न्यूड" एकभारतीय नग्न मॉडल के सामने आने वाली समस्याओं पर आधारित है। पेशेवर पुशर (Professional Pusher)- इनका काम सभी लोगों को ट्रेन में धकेलना होता है, ताकि किसी की भी ट्रैन न छूटे। इस तरह की नौकरी टोक्यो, जापान में बहुत आम है। किराये का बॉयफ्रेंड- टोक्यो में किराये के बॉयफ्रेंड भी मिलते है। उलटी क्लीनर (Vomit cleaner)- रोलर कोस्टर राइड में कई लोगो को उल्टी आ जाती है इसलिए मनोरंजनकारी उद्यान (Amusement parks) के मालिक उल्टी साफ़ करने के लिए कुछ लोगो को रखते है। डिओडोरेंट टेस्टर (Deodorant tester)- डिओडरंट कंपनिया ऐसे लोगो को नौकरी पर रखती है जिनका काम यह चेक करना होता है की डिओडरंट कितना असरदार है, डिओडरंट लगाने से शरीर की गंध जाती है या नहीं। वाटर स्लाइड परीक्षक- इनका काम होता है की वह चेक करकर ये बताये की वाटर स्लाइड सुरक्षित है या या नहीं। <

टेलीविज़न के बारे में रोचक बातें ! Interesting Facts about televisions

दुनिया में ऐसे बहुत कम घर होंगे जहां टेलीविजन नहीं हो। कुछ घरों में तो दो या उससे भी ज्यादा टीवी होते हैं। मल्टीफीचर्स और हाई रेजोल्यूशन वाले टीवी आपके दुनियाभर का हाल बता देते हैं।

 टीवी का विकास 1830 से तब शुरू हो गया था, जब ग्राहम बेल और थॉमस एडिसन ने आवाज और फोटो को ट्रांसफर करके दिखाया था। 1830 में थाम्स एडिसन और ग्राहम बेल ने आवाज और फोटो ट्रांसफर करके दिखाया। 1907 में पहली बार “Television” शब्द आस्तित्व में आया। और डिक्शनरी में जोड़ा गया। 1924 में जाॅन ब्रेड ने पहली बार छायाचित्रो को मूव किया। 1933 में हफ्ते में 2 बार प्रोग्राम टीवी पर आना शुरू हुआ। 1936 तक दुनिया में लगभग 200 टेलिविजन सेट इस्तेमाल होने लगे। तब 12 इंच की टीवी स्क्रीन के साथ बड़े-बड़े उपकरण आते थे। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान टेलिविजन का इस्तेमाल बढ़ गया। इस समय टीवी प्रचार करने वाली मशीन की तरह इस्तेमाल होने लगी। टेबलटाॅप और कंसोल दो तरह के माॅडल प्रचलन में आए। पूरी तरह से कलर टीवी प्रसारण 1953 में अमेरिका में ही शुरू हुआ। 1956 में राबर्ट एडलर ने पहला रिमोट कंट्रोल बनाया। 1962 में “AT&T” कंपनी ने टेलीस्टार launch किया। 1967 के आसपास अधिकतर प्रोग्राम कलरफुल आने लगे। 1969 में “Apollo 11” पहला प्रोग्राम ब्राॅडकास्ट हुआ। जिसे 600 मिलियन लोगो ने देखा। 1973 में टीवी की स्क्रीन को और बड़ा कर दिया गया। इस समय टीवी का वजन काफी ज्यादा हुआ करता था। वर्ष 1976 में भारत में टीवी प्रसारण को ऑल इंडिया रेडियो से अलग किया गया। 1980 में टीवी के साथ VCR, Games आदि आने लगे। इसे टीवी की पॉपुलैरिटी और बढ़ती गई। रिमोट वाले टीवी ने दस्तक दी और लोकप्रिय हुए। 1990 के बाद टेलिविजन में कई बदलाव आए। टीवी का साइज और क्वालिटी बेहतर हुई। इसी समय LCD और प्लाज्मा जैसी टेक्नोलाॅजी के साथ भी एक्सपेरिमेंट चल रहा था। 2000 के बाद VCR की जगह DVD प्लेयर इस्तेमाल होने लगा। कई कमर्शियल चैनल आए और टीवी का स्वरुप बदल गया। अब इडियट बॉक्स से टीवी स्मार्ट बन गया। 2000 के बाद अब जमाना स्मार्ट टीवी का है। अल्ट्रा UHD, बेन्डेवल, 4K, 3D, LCD/LED टीवी अब ना सिर्फ मनोरंजन का काम कर रहे है, बल्कि कम्पयूटिंग और कनेक्टिविटी के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे है। भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत दिल्ली से 15 सितंबर, 1959 को हुई थी। 1972 तक टेलीविजन की सेवाएं अमृतसर और मुंबई के लिए बढ़ाई गईं। 1975 तक भारत के केवल सात शहरों में ही टेलीविजन की सेवा शुरू हो पाई थी। भारत में कलर टीवी और राष्ट्रीय प्रसारण की शुरुआत 1982 में हुई।

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