कुछ बातें जो सबको पता होना चाइये भारत मे

औरते पीरियड्स के दौरान मंदिर मे पैर नहीं रख सकती।

लड़का अपने से कम कमाने वाली लड़की से ही शादी करता है।

घर के दो बच्चो मे से एक इंजीनियर या डॉक्टर तो बनेगा ही बनेगा।

कितनी भी अच्छी नौकरी क़र लो या खुश रह लो पर लोग तुम्हे सेटल शादी करने के बाद ही मानेंगे।

एक तरफ़ा रोड को भी दोनों तरफ देख क़र पार करना पड़ता है।

रोड पर आप किस नहीं क़र सकते पर सरे आम मूत जरूर सकते हो।

रिश्तेदार बस नाक मे दम करने के लिए ही होते है।

साल भर पोल्लुशण को ले क़र रो सकते है पर दिवाली पर सब जायज है।

मंगलवार और गुरुवार को नॉन वेज नहीं खाना है।

आई फोन वाले लोग अमीर ही होते है।

कुत्ते कारों का पीछा क्यों करते हैं ! Why do dogs pursue cars

1) कुत्तों का ज्वलनशील स्वभाव:
आपने बहुत सी फिल्मों में ये डायलॉग सुना होंगा, इलाका कुत्तों का होता हैं शेरों का नहीं!!
पहला कारण यहीं हैं कुत्तों का चलती गाड़ी के पीछे-पीछे भागने का।
दरअसल कुत्ते अपने एरिया को लेकर काफी पोसेसिव होतें हैं।वो पेड़ों, गाड़ियों के टायरों इत्यादि में यूरीन सीक्रिट कर के ये सुनिश्चित करतें हैं कि ये उन्हीं का एरिया हैं, चूंकि नाक के तेज़ होते हैं इसलिए कोई शक नहीं की वो अपने एरिया को पहचानते भी हैं और अगर कोई आएं तो उसे बाहर का रास्ता भी दिखाते हैं। और आपकी यहाँ आने की मनाही हैं, तो शायद गलत नहीं होगा!!!
पर जब किसी कुत्ते को किसी गाड़ी के टायर पर किसी दूसरें कुत्ते की यूरीन समझ़ आती हैं, जो तेज़ नाक के धनी कुत्ते के लिए काफ़ी आसान होता हैं पहचाना, और खास़कर तब जब गाड़ी तेज़ी से जा रही हों, तब एक एरिया के प्रति लगाव समझते हुए वो उस गाड़ी के पीछे दौड़ लगाता हैं, वर्चस्व और एरिया पर कंट्रोल शायद इसे ही कहते हैं और इससे अच्छा उदाहरण भी नहीं कोई।
2) भूखा होना:
माना जाता हैं जब एक कुत्ता काफ़ी भूखा हो तो तब भी वो चलती गाड़ी का पीछा करता हैं।
3) जब किसी कुत्ते की मौत गाड़ी के नीचें आने से होती हैं:
कुत्ता एक बेहद ही संवेदनशील जानवर होता हैं और दोस्ती निभाना जानता हैं, इस कारण जब भी कोई ऐसी गाड़ी जिस पर किसी कुत्ते को वो मह़क समझ़ आती हैं, वो तुरंत उस गाड़ी के पीछे हो लेता हैं और दूर तक दौड़कर अपने अंजान साथी के प्रति अपनी वफ़ादारी निभाता हैं।
4) अकेलापन:
थोड़ी हैरानी वाला बात हैं पर जी हां कुत्तों को भी अकेलापन महसूस होता हैं।और जब ये अकेलापन ज्यादा गंभीर रूप से बाहर समझ़ आता हैं तब वो चलतीं गाड़ी का पीछा करते हैं।

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