What is the current conflict between China and India?

Why is there tension on the borders?


It is a common misconception that the tensions ferment at the border and then it reaches the capitals. That never is the case.

The primary duty of a government is to give a decent life to its citizens. And that requires money. Money, which is raised through industries and services. India and China are two of the biggest economies in the world today, and by 2050, China would become the biggest economy with India coming at the second number.

I have lived in Europe and North America and the Made in China has completely overwhelmed me. There are hardly anything that you buy, that is not Made in China. In contrast to that, this laptop that I bought from India, my mobile which I bought from India, my cloths and other accessories are still Made In India. China sees India as a huge untapped market and wants to flood its good with it, however the Indian government has not budged till now and there are still a lot of trade restriction, despite the trade bal…

अगर मच्छर हमेशा के लिए ख़त्म हो जाये तो क्या होगा? What Will Happen If The Mosquito Ends Forever


अगर मच्छर हमेशा के लिए ख़त्म हो जाये तो क्या होगा

पूरी दुनिया मे मच्छरों की करीब 3500 प्रजातिया पाई जाती है। हालांकि इनमें से ज्यादतर नस्लें इसानों को बिल्कुल भी तंग नही करती। ये मच्छर पौधो और फलो के रस पर जिंदा रहते है।
मच्छरों की केवल छह फीसद प्रजातियो की मादाए अपने अंडो के विकास के लिए इंसानो का खून पीती है। इसानों का खून पीने वाले इन मादा मच्छरों में से भी आधी ही अपने अदर बीमारियो के वायरस लिए फिरती हैं यानी कुल मिलाकर मच्छरों की केवल 100 नस्लें ही ऐसी है, जो इंसानों के लिए नुक़सानदेह है। लेकिन इनका इंसानियत पर बहुत ही भयानक असर पडता है।
ब्रिटेन की ग्रीनिच यूनिवर्सिटी के नेचुरल रिसोर्स इंस्टीट्यूट के फ्रासिस हॉक्स कहते हैं कि दुनिया की आधी आबादी पर मच्छरो से होने वाली बीमारियो का खतरा मंडराता रहता है। इंसान के तमाम मुश्किलात मे से कइयो के लिए मच्छर जिम्मेदार है।
मच्छरों से होने वाली बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू और यलो फीवर की वजह से दुनिय भर में क़रीब दस लाख लोग मारे जाते है। मच्छरों के शिकार इन लोगों में से ज़्यादातर गरीब देशों के होते है।
लेकिन, अब जबकि विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, तो क्या बीमारी फैलाने वाले मच्छरों का पूरी तरह से खात्मा करके इस चुनौती से निजात पाई जा सकती है?
ब्रिटिश जीव वैज्ञानिक ओलिविया जडसन इस बात की समर्थक है। वो कहती है कि तीस तरह के मच्छरों का सर्वनाश करके हम दस लाख इंसानों की जान बचा सकते है। इससे मच्छरों की केवल एक फीसद नस्ल खत्म होगी। लेकिन, इंसानों का बहुत भला होगा।
क्या होगा अगर सारे मच्छर खत्म हो जाये-
फ्लोरिडा के कीट वैज्ञानिक फिल लोनीबस कहते है कि मच्छरो का इस तरीके से खत्मा करने के ऐसे कई साइड इफेक्ट हैं, जो हम नही चाहेंगे।
लोनीबस कहते है कि मच्छर पौधो का रस पीकर रहते है। इनके जरिए पौधो के पराग फैलते हैं। जिनकी वजह से फूलों का फल के तौर पर विकास होता है। मच्छरों को कई परिंदे और चमगादड खाते हैं। वहीं इनके लार्वा से मछलियों और मेंढकों को खाना मिलता है। ऐसे में मच्छरों के खात्मे से फूड चेन पर भी असर पड सकता है।
वही ओलिविया जडसन इस आशंका को खारिज करती है। उनके मुताबिक, मच्छरों के खात्मे पर दूसरे जीव इस फूड चेन की कडी बन जाएंगे। जडसन कहती है कि धरती के विकास के दौरान बहुत-सी नस्लें खत्म हो गईं। इन प्रजातियो के खात्मे से ऐसा थोडे ही हुआ कि तबाही आ गई। उनकी जगह नई प्रजातियों ने ले ली।
फिल लोनीबस इसके जवाब में कहते है कि अगर मच्छरों की जगह नए जीवों ने ले ली, तो भी तो दिक्कत ही है। वो चेतावनी देते है कि मच्छरो की जगह लेने वाला नया जीव वैसा ही या उससे भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इसका इंसान की सेहत पर और भी बुरा असर हो सकता है। हो सकता है कि इस नए जीव से बीमारिया और तेजी से, और दूर तक फैलें।
विज्ञान लेखक डेविड क्वामेन कहते है कि मच्छरो का इंसानियत पर बहुत सीमित तौर पर ही घातक असर होता है। वो गर्म इलाको वाले जंगलों में इंसानों के बसने से रोक रहे है।
 ऐसे बारिश वाले जंगलों में दुनिया भर के कुल पेड-पौधों और दूसरे जीवों की बडी तादाद रहती है। मच्छरों की वजह से इंसान इन जंगलों में बहुत  जायदा दखल नहीं डाल पा रहा। मच्छर खत्म हुए तो इन जंगलों पर बहुत बडा इंसानी तबाही का खतरा मंडराने लगेगा। क्वामेन कहते हैं कि मच्छरों ने ऐसी तबाही को पिछले दस हजार सालों से रोका हुआ है।
अमरीका में वैज्ञानिकों ने मच्छरों की ऐसी नस्ल तैयार की है, जो मलेरिया के वायरस को पनपने नहीं देता।
फ्रांसिस हॉक्स कहते हैं कि इंसानो और मच्छरो के बीच आगे निकलने की होड लगी है। उम्मीद है कि अगले 10 से 15 सालों में इंसान, मच्छर पर भारी पड़ने लगेगा।

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