आप ऐसा क्या जानते हैं जो किसी को नहीं पता ! What do you know that nobody knows?

Abhijit Nimse,
1. चीनी को जब चोट पर लगाया जाता है, दर्द तुरंत कम हो जाता है। 2. जरूरत से ज्यादा टेंशन आपके दिमाग को कुछ समय के लिए बंद कर सकती हैं। 3. 92% लोग सिर्फ हस देते हैं जब उन्हे सामने वाले की बात समझ नही आती। 4. बतक अपने आधे दिमाग को सुला सकती हैंजबकि उनका आधा दिमाग जगा रहता। 5. कोई भी अपने आप को सांस रोककर नही मार सकता। 6. स्टडी के अनुसार : होशियार लोग ज्यादा तर अपने आप से बातें करते हैं। 7. सुबह एक कप चाय की बजाए एक गिलास ठंडा पानी आपकी नींद जल्दी खोल देता है। 8. जुराब पहन कर सोने वाले लोग रात को बहुत कम बार जागते हैं या बिल्कुल नही जागते। 9. फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग के पास कोई कालेज डिगरी नही है। 10. आपका दिमाग एक भी चेहरा अपने आप नही बना सकता आप जो भी चेहरे सपनों में देखते हैं वो जिदंगी में कभी ना कभी आपके द्वारा देखे जा चुके होते हैं। 11. अगर कोई आप की तरफ घूर रहा हो तो आप को खुद एहसास हो जाता है चाहे आप नींद में ही क्यों ना हो। 12. दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला पासवर्ड 123456 है। 13. 85% लोग सोने से पहले वो सब सोचते हैं जो वो अपनी जिंदगी में करन…

संसार के अनसुलझे रोचक रहस्य ! Unseen Interesting Secret Of The World



कहते हैं मानव सभ्यता ने बहुत तरक्की कर ली है और इसके प्रमाण भी हमें अपने चारों ओर दिखाई देते हैं। जब से मानव का आविर्भाव पृथ्वी पर हुआ है तब से ही अपने जिज्ञासु स्वभाव के कारण मानव निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर होता चला गया है। कभी कभी तो ऐसा प्रतीत होता है कि यही अति जिज्ञासा कहीं एक दिन मानव सभ्यता के पतन का कारण भी न बन जाये। खैर आपने पूछा,"संसार के अनसुलझे रोचक रहस्य क्या हैं?" तो आइये शुरू करते हैं विश्लेषण -
वाओ सिग्नल - वालंटियर जेरी अहमान को सबसे पहले 1977 की गर्मियों में ये सन्देश लगातार ७२ सेकण्ड्स तक मिले। प्रथमदृष्ट्या ये सन्देश किसी दूसरी दुनिया से आता प्रतीत हुआ जिसके बाद जेरी ने और जानकारी इकट्ठी करनी शुरू की तो पता लगा कि सिग्नल ताओ सैगिटेरी तारे के पास से आये थे जो की गहन अंतरिक्ष में 120 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है। जेरी अहमान ने उस सिग्नल का प्रिंटआउट निकाल लिया और उस पर उत्तेजनावश वाओ लिख दिया। तबसे ही ये वाओ सिग्नल के नाम से जाना जाता है और आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है।
लालडॉफ प्लेट - यह लगभग १२००० साल पुरानी पत्थर से बनी तश्तरी है। ये सबसे पहले नेपाल में मिली थी। इसे देखकर पुरातात्विक अनुमान लगाते हैं कि मिस्र इकलौती सभ्यता नहीं है जहां परग्रहियों से तत्कालीन सभ्यता ने संपर्क किया था। इसमें उकेरी गई ड्राइंग बिलकुल परग्रही लोगों के यू एफ ओ जैसी है। तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर उकेरे गए चिन्हों को अभी तक समझा नहीं जा सका है।
१४ करोड़ वर्ष पुराना लोहे का हथौड़ा - पुरातात्विक खोजों में सन 1934 में एक लोहे का हथौड़ा अमेरिका से प्राप्त हुआ। नियमित जांच में पता चला कि लोहे से बने इस हथौड़े का हैंडल लकड़ी का था जो कि समय के साथ कार्बन में बदल गया था। जब शोधकर्ताओं ने कार्बन डेटिंग की सहायता से इसकी वास्तविक उम्र पता की तो ये लगभग १४ करोड़ वर्ष पुराना पाया गया। इतना पुराना होने पर भी इसमें जंग नहीं लगी थी और लोहे का स्वरुप इतना शुद्ध था कि अभी भी इसे बनाना संभव नहीं है। यह आज भी आश्चर्य का विषय है की १४ करोड़ वर्ष पहले इतने परिष्कृत लोहे का निर्माण किसने किया।
क्रॉप सर्किल - इंग्लैण्ड और उसके आस पास के क्षेत्रों में सन १९७० की एक सुबह जब लोग उठे तो पाया की उनके खेतों में अजीब ज्यामितीय संरचनाएं बनीं हैं। अचानक ऐसी संरचनाएं देखकर लोगों में विस्मय भर गया। और हैरानी की बात यह थी की ये वाले ज्यामितीय दृष्टि से इतने सटीक थे की किसी इंसान के द्वारा बनाया जाना कल्पना के बाहर था। ऐसे में एक ही तथ्य था जो उभरकर सामने आया कि इसे परग्रहियों ने बनाया। इसके बारे में आज भी स्पष्ट वैज्ञानिक विश्लेषण उपलब्ध नहीं है।
बरमूडा त्रिकोण - जिसे शैतानी त्रिकोण के नाम से भी जाना जाता है और जिसने अपने सीने में तमाम राज़ दफ़्न कर रक्खे हैं। सबसे पहले सन १४९२ में यह क्षेत्र सुर्ख़ियों में आया और तब से लगातार कई खौफनाक हादसे हो चुके हैं। आइये देखते हैं सिलसिलेवार इस त्रिकोण से गायब हुए जहाजों के बारे में जिनके अवशेष भी आज तक खोजे नहीं जा सके।
फ्लाइट १९ दस्ता जो की अमेरिकी नेवी की रूटीन फ्लाइट पर ५ दिसंबर१९४५ को था। उससे अचानक बदहवास पायलट का सन्देश प्राप्त होता है उनके पास उपलब्ध तीनों कम्पास सही से काम नहीं कर रहे और दिशा का भान नहीं हो रहा। आसमान में अजीब से चमक दिखाई दे रही है। फिर सिग्नल टूट गया और प्लेन गायब हो गए। बहुत सर्च ऑपरेशन्स के बाद भी आज तक प्लेन्स का पता नहीं चल सका है।
यू एस एस साइक्लोपेस समुद्री जहाज के साथ भी कुछ ऐसी ही घटना सन १९१८ में घाटी जब वह ३०९ यात्रियों के साथ बाल्टिमोर की ओर बढ़ रहा था। आज तक उस जहाज या उसके 309 यात्रियों का कोई सुराग नहीं लग सका है।
यह रहस्यमय इलाका ५ लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है और आज तक हजारों जिंदिगियों को निगल चुका है जिनका कोई सुराग आज तक नहीं मिल सका है।

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