भारत के अलावा पांच देश है जो 15 अगस्त को अपनी आजादी के रूप में मनाते हैं ! five countries which celebrate 15 August as their independence.

प्रेम सिंह (Prem Singh)
भारत के अलावा ये 5 देश भी 15 अगस्त को मनाते हैं आजाद का जश्न देशवासी इस साल अपनी आजादी की 73वीं सालगिरह मनाने जा रहे हैं। अंग्रेजों की करीब 200 की गुलामी से मुक्ति मिले 72 साल पूरे हो जाएंगे। लेकिन शायद यह कम लोगों को ही पता होगा कि दुनिया के पांच देश ऐसे हैं जो 15 अगस्त को ही भारत के साथ अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। तो आइए जानते हैं भारत के अलावा और कौन से हैं ये देश- 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले देशों के नाम हैं- नॉर्थ कोरिया, साउथ कोरिया, कांगो, बहरीन और लिकटेंस्टीन। दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया की आजादी दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया को आज से 74 साल पहले जापानी कॉलोनाइजेशन से 15 अगस्त 1945 में मुक्ति मिली थी। दक्षिण कोरिया और नॉर्थ कोरिया इस साल अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। रिपब्लिक ऑफ कांगो में स्वतंत्रता दिवस रिपब्लिक ऑफ कांगो मध्य अफ्रीकी देश है जिसे 15 अगस्त 1960 में आजादी मिली थी। इस प्रकार कांगो अपना 60 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। लिकटेंस्टीन की आजादी का दिन 15 अगस्त यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन को भी 15अगस्त के दिन आजादी …

अमेरिका के सुपरपावर बनने के क्या कारण थे ! What were the reasons for becoming America's superpower

हैरानी की बात है न, जो राष्ट्र कुछ 250 वर्ष पहले ही जन्मा, जिसका कोई सांस्कृतिक इतिहास नही था और न ही कोई खुदकी पहचान, वह आज विश्व की महा शक्ति है।
भले उत्तर अमेरिका के इतिहास मे वहा के मूल जनजातियों का बड़ा योगदान है, पर आज के अमेरिकियों का उससे कोई वास्ता नही।
अमेरिका के सुपरपावर या महाशक्ति बनने के कुछ प्रमुख कारण थे:
  • विश्व भर के प्रवासीयो का देश
अमेरिका मे यूरोप के कई देश और वर्ग के लोग आकार बसे, वही अफ्रीका और एशिया से भी लोग या तो लाए गए या आकार बसे। इन प्रवासियों मे कई होनहार और काबिल लोग थे, जिन्होंने अपनी मेहनत से अमेरिका को इस मुकाम पर पहुँचाया।
  • यूरोप से दूरी
यूरोप मे कई वर्षो से युद्ध चल रहे थे जिस कारण उनकी तिजोरियां खाली होती गई। वही अमेरिका की भौगोलिक स्थिति के कारण यूरोपीय देश उसे अपने झमेले नही घसीट पाए। और इसलिए अमेरिका अपने जरूरी संसाधन बर्बाद करने के बजाए खुदके विकास पर लगा पाया।
  • व्यापार पर जोर
अमेरिका ने युद्ध के बजाए अपने व्यापार को बढ़ाने पर ज़ोर दिया। व्यापारियों को व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित किया और अन्य देशो से व्यापारिक संबंध बनाए।
  • प्रथम विश्व युद्ध से दूरी
अमेरिका प्रथम विश्व युद्ध मे निष्पक्ष ही था, जबतक जर्मनी ने अमेरिकी जहाज को मार नही गिराया। कई चेतावनी के बाद भी जर्मनी अमेरिका के जहाजो को निशाना बनाता रहा और फिर 1917 मे अमेरिका युद्ध मे उतर आया। जहा ब्रिटेन आदि लड़ लड़ के थक चुके थे, वही अमेरिका ने फुर्ती दिखाई और विजेता बन कर उभरा।
  • शोद्ध और विज्ञान को बढ़ावा देना
अमेरिका मे शोद्ध और अनुसंधानों को बढ़ावा मिलता रहा। अमेरिका के कई अविष्कारों ने एक से एक अविष्कार किए। कई अविष्कारक प्रवासी थे, जैसे की आइंस्टाइन।
  • औद्योगीकरण
अमेरिका मे बड़े पैमाने मे औद्योगीकरण हुआ जिस कारण अमेरिका की औद्योगिक शक्ति और उत्पादक क्षमता आसमान छूने लग गई। द्वितीय विश्व युद्ध मे अकेले अमेरिका की औद्योगिक और उत्पादक क्षमता ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान को मिलाने से भी अधिक थी। इसी कारण अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध मे भी विजयी बना।
  • द्वितीय विश्व युद्ध
अमेरिका के द्वितीय विश्व युद्ध मे भाग लेने के कारण और विजय बनकर उभरने के कारण विश्व की नज़र मे वह विश्व शक्ति बना। अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध मे अपनी सैन्य और औद्योगिक शक्ति का बेहतरीन प्रदर्शन किया था।
  • रूस से दुश्मनी
रूस के साथ दुश्मनी के कारण अमेरिका मे अपनी सैन्य शक्ति, औद्योगिक शक्ति पर ध्यान दिया ही, वही शोद्ध अनुसंधान पर और खर्चा किया। इसी कारण अमेरिका चाँद पर पहुँचने वाला पहला राष्ट्र बना।
  • शातिर रणनीतिज्ञ
अमेरिका काफी शातिर है। विश्व राजनीति मे कहा कोनसा दाव खेलना है और कैसे फायदा हो, यह उसे पता है। मध्य पूर्व के तेल व्यापार पर नियंत्रण पाकर उसने यह सिद्ध किया।

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