महिलाएं पुरुषों के किन अंगों को देखकर आकर्षित होती हैं ! Which parts of men are attracted by women?

मनोज लालवानी (Manoj Lalwani),


बात महिलाओं की पसन्द की है तो बहुत सारे विकल्प होने ज़रूरी हो जाते हैं। क्योंकि चुनने के लिए कम विकल्प होने से अधिकांश महिलाएँ तनाव में आ जाती हैं। यह विकल्प, सौभाग्यवश, बहुतेरे और सशरीर मौजूद हैं। अगर पुरुष के अंगों का ज़िक्र होगा तो उनका शरीर अपने आप आएगा। सबसे पहले बात करते हैं पुरुष शरीर की। मगर उस से पहले बात करनी पड़ेगी महिला की चाह की। क्योंकि महिला की चाह पुरुष का विशेष अंग नहीं होता, बल्कि उनका अंग प्रत्यंग होता है। और सिर्फ़ अंग प्रत्यंग ही नहीं, उसके साथ ना जाने कितने और रंग ज़रूरी हैं। तो बात करते हैं पुरुषों के इन्हीं अंग-प्रत्यंग, रंग-ढंग की महिलायें, पुरुष की उस चीज़ की तरफ़ सबसे ज़्यादा खिंचाव महसूस करती हैं, जिस चीज़ की वो ख़ुद में कमी पाती हैं। वैसे यह सिद्धान्त हम सभी पर लागू होता है “हम उसी और खिंचे चले जाते हैं, जिस की हम ख़ुद के जीवन में कमी पाते हैं।” चूँकि बात यहाँ महिलाओं की है तो हम उन्ही की बात करते हैं। सबसे पहली कमी जो लगभग हर महिला को पुरुष की तुलना में खलती है। वो है “क़द” महिलाएँ ख़ुद से लम्बे पुरुषों की तरफ़ आकर्षित होती ह…

महिलाओं के जीवन में सेक्स सम्बन्ध कितना मायने रखता है ! How Much Importent Sex In Women's life



महिलाओं मैं सेक्स सम्बंध उतना ही मायने रखता है जितना पुरुषों मैं अंतर होता है अभिव्यक्ति मैं , पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं मैं आत्म नियंत्रण ज़्यादा होता है शर्म होती है हया होती है संकोच होता है दरसल महिलाओं के मस्तिष्क की बनावट अलग होती है शारीरिक सम्बंध उनकी भावनाओं से जुड़े होते है।नारी मन बहुत ही सुलभ होता है , हम जीवन की आपा धापि मैं ज़िम्मेदारियों मैं कुछ कठोर और काफ़ी प्रायोगिक हो जाते है छोटी छोटी ख़ुशियाँ छोड़ देते है इमोशन को मन के किसी कोने मैं बंद कर देते है नारी मन काफ़ी सरल होता है बिलकुल एक छोटे बच्चे की तरह जो ढेर सारा प्यार चाहता है बहुत ध्यान चाहता है छोटी छोटी ख़ुशियाँ चाहता है वे कभी संवेगो को छिपाती नहीं बल्कि खुलकर बताती है की मैं नाराज़ हुँ मुझे मनाओ, मैं ख़ुश हूँ मुझ मैं शामिल हो जाओ, मुझे समझो , मुझे समय दो नारी का मन बहुत बारीक होता है वे छोटी छोटी बातों को , छोटी छोटी यादों को काफ़ी सम्हाल कर रखती है उन्हें आप मैं ऐसे बदलाव जो उनसे आपको दूर करते है काफ़ी जल्दी महसूस हो जाते है उनका अचेतननुमान जिसे इंग्लिश मैं unconscious inference कहते है और साधारण भाषा मैं छटी इंद्री पुरुषों की अपेक्षा काफ़ी अच्छी होती है, वे अपनी पीठ की तरफ़ से भी महसूस कर लेती है की उन्हें कोई ताड़ रहा है और इसका कारण यह है की उनका अचेतन नियंत्रण काफ़ी अच्छा होता है क्योंकि वे अपनी बहुत सारी इकछाओ को दबा कर रखती है ये नारी मन की प्रकृति है उनकी मजबूरी नहीं । आज कितना भी आधुनिकीकरण क्यों ना हो जाए भारतीय महिला जिनके अचेतन मैं भारतीय आधरूप है उनके लिए शारीरिक सम्बंध ज़रूरी हो सकते है पर प्राथमिक नहीं , आज भी उनके लिये ममता , त्याग , समर्पण , पति की सेवा , अपने बच्चों के लिए अथाह प्रेम अपनी गृहस्थी की चिंता , अपनी इज़्ज़त अपना सुआभिमान ही सर्वोपरि है।

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