दुनिया की सबसे महंगी सब्जी | World Most Expensive Vegetable

दुनिया में कई तरह की सब्जियां हैं कुछ सब्जियां जो हम नॉर्मल लाइफ में रोजाना खाते हैं। लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी हैं। जिसके दाम के बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे दुनिया की सबसे महंगी सब्जी के बारे में। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
हॉप शूट्स।आपको बता दें की ये सब्जी दुनिया की सबसे महंगी सब्जी हैं। आमतौर पर यह सब्जी 1000 यूरो प्रति किलो बिकती है यानी भारतीय रुपये में कहें तो इसकी कीमत 80 हजार रुपये किलो के आसपास है। इसे खरीद पाना नॉर्मल इंसान के बस में नहीं हैं।आपको बता दें की इस हॉप का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर भी किया जाता है। सदियों से इसका इस्तेमाल दांत के दर्द को दूर करने से लेकर टीबी के इलाज तक में होता रहा है। हॉप में ऐंटीबायॉटिक की प्रॉपर्टी पाई जाती है जो इंसान के हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इससे शरीर की कई बीमारियां दूर हो जाती हैं और इंसान खुद को सेहतमंद महसूस करता हैं।यह सदाबहार सब्जी है जो साल भर उगाई जा सकती है। लेकिन ठंडी के मौसम को इसके लिए ठीक नहीं माना जाता है। मार्च से लेकर जून तक इसकी खेती के लिए आदर्श समय मान…

अगर चंद्रमा पर परमाणु विस्फोट किया जाए तो क्या होगा ! What Happens If a Nuclear Explosion On The Moon




वास्तव में 1950 के दशक में यू. एस. एयरफोर्स ने चांँद पे एक परमाणु परीक्षण करने के बारे में विचार किया था। हालाँकि ,प्रोजेक्ट ए119 के नाम से जाने वाले इस एकमात्र परीक्षण से चंद्रमा पे थोड़ा ही असर पड़ता।

सी.एन.एन. के एक इंटरव्यु में जब लियोनार्ड रिफेल जो कि ,इस प्रोजेक्ट में एक वैग्यानिक थे, से पूछा गया कि क्या हम चंद्रमा को कोई नुकसान पहुँचाने में अथवा, उसकी कक्षा से बाहर ढ़केलने में सक्षम हैं तो उनका जवाब था कि ,दरअसल हमारे पास, इतने परमाणु हथियार हैं ही नहीं। चाँद को उसकी कक्षा से ढकेलने के लिये ,लगभग 100 खरब मेगाटन अौर, कुछ गंभीर नुकसान पहुँचाने के लिये लगभग 10 अरब टी.एन.टी. की जरूरत पड़ेगी।
सत्तर के दशक में एक टेलीविजन शो स्पेस: 1999 (Space: 1999) इसी तरह की कहानी पे बना था जिसमें एक परमाणु दुर्घटना की वजह से चाँद अपनी कक्षा से निकल के अंतरिक्ष में चला जाता है। बेशक यह बस एक शो में ही हो सकता है , वास्तविकता में नहीं।
हमें चाँद की रेडियो-सक्रियता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। यह कॉस्मिक किरणों और सूर्य की विकिरणों के लिये खुला हुआ है और पृथ्वी के वायुमंडल की तरह इसके पास कोई सुरक्षा कवच भी नहीं है। नासा ने 2009 में ल्यूनर रिकॉनसेंस अॉर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) भेजा था और इसका एक काम चाँद के वातावरण में विकिरण के बारे में तथ्य जुटाना था। इसकी कम ही संभावना है कि परमाणु विस्फोट करने से विकिरण स्तर पे कुछ ज्यादा असर पड़ेगा।
इमानदारी से कहूँ तो यह ऊँट के मुँह में जीरा समान होगा।

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