भारतीय महिलाओं के बारे में ऐसे क्या अजीब तथ्य ! What strange facts about Indian women

भारतीय महिलाओं के बारे में ऐसे क्या अजीब तथ्य मनोज लालवानी (Manoj Lalwani),   औरतें प्रेम करने के लिए बनी हैं, समझने के लिए नहीं। – ऑस्कर वाइल्ड - औरतों की रहस्यताओं पर विराम लगाता हुआ यह कथन काफ़ी हद तक सही प्रतीत होता है। औरत से प्रेम करो आपको उनको समझने की ज़रूरत ही ख़त्म हो जाएगी। समझ के करना क्या है? क्यूँ जटिलता बढ़ाएँ? प्रेम करो बदले में प्रेम पाओ। आदर दो, आदर पाओ। संक्षेप में दिल लगाओ, दिमाग़ मत लगाओ। जीवन को आसान बनाओ। पर चूँकि दुनिया है, लोग हैं, सोचें हैं, भिन्नता है तो जीवन इतना आसान भी नहीं जान पड़ता है। हर व्यक्ति की भिन्न भिन्न विचारधारा है। औरत के व्यक्तित्व की जटिलताओं के बारे में इतना ज़्यादा लिखा गया है कि वो ब्रह्माण्ड का सफ़र पूरा कर के आने जैसा है। औरत का व्यक्तिव वो जहाँ निवास करती हैं उस देश व काल के अनुसार परिभाषित होता है। भारतीय महिलाएँ भी भिन्न नहीं है उनकी भी कुछ व्यक्तिपरक विशेषताएँ हैं। आइए उनके व्यक्तित्व के पहलुओं पर तथ्यपरक नज़र डालते हैं। इनमें कुछ तथ्य देसी हैं तो कुछ तथ्य सार्वभौमिक। कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, सफ़र लम्बा व उतार चढ़ाव वाला है। दुनियादा…

सभी कंपनियों के ब्लेड के बिच क्यों होती है एक ही तरह की खास डिजाईन


इन के पीछे एक सबसे बड़ी वजह है जिलेट कंपनी, क्यूंकि इसी कंपनी ने ही ब्लेड बनाने की शुरुआत की थी. इनको बनाने वाले किंग कैंप जिलेट है और इसकी शुरुआत 1901 में हुई थी, आपको बतादें की किंग कैंप जिलेट ने अपने सहयोगी विलियम निकर्सन के साथ मिलकर ब्लेड का डिजाइन तैयार किया था.
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आज हम जैसा डिजाईन देखते है ठीक वैसा ही डिजाईन उन्होंने तैयार किया था, बाद में उन्होंने उसे पेटेंट करा लिया और साल 1904 में उसका उत्पादन शुरू कर दिया. वैसे आपको बतादें की साल 1901 से ही जिलेट ही एक ऐसी इकलौती कंपनी थी जिसने रेजर और ब्लेड बनाने की शुरुआत की.
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उस वक्त के समय में रेजर में ब्लेड बोल्ट के जरिए फिट करना पड़ता था इसी वजह से उन्होंने ब्लेड के बीच में खास तरह की डिजाइन बनाई गई, सबसे पहले जिलेट ने ब्लू जिलेट नाम से ब्लेड का उत्पादन किया बाद में 1904 में पहली बार 165 ब्लेड बनाए गए थे.
इसके बाद दूसरी कंपनियां भी मार्किट में आ गयी जिन्होंने ब्लेड की पुरानी डिजाइन को ही कॉपी कर लिया क्यूंकि उस वक्त रेजर जिलेट कंपनी के ही आते थे इसलिए रेजर में ब्लेड फिट करने के लिए शेव उसी डिजाइन में रखना पडता था.

एक अनसुनी बात आपको बतादें की जब किंग कैंप जिलेट साल 1890 में एक बोतल का ढक्कर बनाने वाली कंपनी में सेल्समैन का काम करते थे तब उन्होंने देखा की लोग इस्तेमाल के बाद बोतलों के ढक्कन फेंक देते है फिर भी ऐसी छोटी सी चीज से इतनी बड़ी कंपनी चल रही है, इसीलिए उन्होंने भी कुछ ऐसी ही चीज बनाने के बारे में सोचा जो लोगों के लिए सस्ता हो और यूज के बाद फेंक दें.
उस वक्त लोग उस्तरे से शेविंग करते थे पर उस्तरे से शेविंग करना उनके लिए काफी ज्यादा ख़तरनाक साबित होता था इसीलिए लोग शेविंग करने में काफी ज्यादा समय लगाते थे. बाद में किंग कैंप ने उस्तरे का एक विकल्प तलाशने की कोशिश की और दो धार वाली सेफ्टी रेजर बनाली और साल 1901 के दिसंबर महीने में उन्होंने इसकी डिजाइन को पेटेंट करा लिया.

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