कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

इतिहास में सबसे रोचक युद्ध कौन सा रहा है और क्यों













इतिहास का वो सबसे छोटा और रोचक युद्ध, जो महज 38 मिनट में ही समाप्त हो गया था।

युद्ध:- ये शब्द सुनते ही आंखों के सामने भयानक मंजर छा जाता है,हमारे इतिहास में कई युद्ध हुए है जिनकी आज भी चर्चा होती है। इन्हीं में एक इंग्लैंड और जांजीबर के बीच लड़ा गया युद्ध भी है जिसे इतिहास का सबसे छोटा और रोचक युद्ध भी कहा जाता है।

क्यों और कैसे हुई युद्ध की शुरुआत ?

कहा जाता है कि 1890 में जांजीबार को लेकर ब्रिटेन और जर्मनी के बीच संधि पर हस्ताक्षर किए गए जिसके अनुसार ब्रिटेन पूर्वी अफ्रीका में अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था और यही वजह थी जिसके कारण उसे जांजीबर की सत्ता सौंप दी गई तथा तंजानिया का भूभाग जर्मनी के पास चला गया।

1893 में जांजीबर की देखभाल का जिम्मा हमद बिन तुवानी को सौंपा गया और करीब तीन साल उन्होंने काफी शांतिपूर्ण तरीके से वहां शासन किया। 25 अगस्त 1896 को तुवानी की मौत हो गई और इसके कुछ ही समय बाद तुवानी के भतीजे खालिद बिन बर्गश ने खुद को जांजीबार का सुल्तान घोषित कर दिया। ऐसा माना जाता है कि सत्ता के लोभ में आ कर खालिद ने तुवानी को जहर दे दिया था।

खालिद के सुल्तान बनने से ब्रिटिश अधिकारी बिल्कुल भी खुश नहीं थे, जिस वजह से चीफ डिप्लोमेट बेसिल केव ने खालिद को पद से हटने को कहा पर खालिद ने चीफ का आदेश मानने की बजाय करीब 3000 सैनिकों को हथियार के साथ महल की सुरक्षा में खड़ा कर दिया । केव ने शांतिपूर्वक तरीके से मसले को सुलझाने की बहुत कोशिश की लेकिन खालिद किसी भी कीमत पर सुल्तान की गद्दी छोड़ने को तैयार न था। दूसरी ओर केव को ब्रिटिश सरकार की ओर से साम, दाम,दंड,भेद से जंग जीतने का आदेश मिल चुका था।

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