भारतीय महिलाओं के बारे में ऐसे क्या अजीब तथ्य ! What strange facts about Indian women

भारतीय महिलाओं के बारे में ऐसे क्या अजीब तथ्य मनोज लालवानी (Manoj Lalwani),   औरतें प्रेम करने के लिए बनी हैं, समझने के लिए नहीं। – ऑस्कर वाइल्ड - औरतों की रहस्यताओं पर विराम लगाता हुआ यह कथन काफ़ी हद तक सही प्रतीत होता है। औरत से प्रेम करो आपको उनको समझने की ज़रूरत ही ख़त्म हो जाएगी। समझ के करना क्या है? क्यूँ जटिलता बढ़ाएँ? प्रेम करो बदले में प्रेम पाओ। आदर दो, आदर पाओ। संक्षेप में दिल लगाओ, दिमाग़ मत लगाओ। जीवन को आसान बनाओ। पर चूँकि दुनिया है, लोग हैं, सोचें हैं, भिन्नता है तो जीवन इतना आसान भी नहीं जान पड़ता है। हर व्यक्ति की भिन्न भिन्न विचारधारा है। औरत के व्यक्तित्व की जटिलताओं के बारे में इतना ज़्यादा लिखा गया है कि वो ब्रह्माण्ड का सफ़र पूरा कर के आने जैसा है। औरत का व्यक्तिव वो जहाँ निवास करती हैं उस देश व काल के अनुसार परिभाषित होता है। भारतीय महिलाएँ भी भिन्न नहीं है उनकी भी कुछ व्यक्तिपरक विशेषताएँ हैं। आइए उनके व्यक्तित्व के पहलुओं पर तथ्यपरक नज़र डालते हैं। इनमें कुछ तथ्य देसी हैं तो कुछ तथ्य सार्वभौमिक। कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, सफ़र लम्बा व उतार चढ़ाव वाला है। दुनियादा…

जब वास्को डा गामा भारत पहुंचे, तो उन्होंने उस स्थान के भारतीयों से संवाद कैसे किया


 
 

वास्को दा गामा समुद्र मार्ग के माध्यम से भारत आने वाले पहले यूरोपीय मुसाफिर नहीं थे। वह १४९८ में कालीकट में उतरे। जैसा कि हमारे स्कूल के इतिहास की किताबें हमें सिखाती हैं कि 'वास्को दा गामा ने भारत की खोज की'। यह बिल्कुल गलत बयान है, 'खोज' यह शब्द का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। 'खोज' का शब्दकोश अर्थ है - पहली बार कुछ ढूंढना या सीखना।
तो इसका मतलब यह है कि भारत वास्को दा गामा से पहले यूरोपीय लोगों के लिए अनजान था? नहीं!

यूरोपियन लोगों को आम युग (ईसापूर्व) से पहले भी भारतीय उप-महाद्वीप के बारे में जानकारी थी। वे यह जानकारी उन्हें मध्य पूर्वी लोगों से प्राप्त हुई।
लेकिन ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, थॉमस द एपोस्टल और बार्थोलोम्यू द एपोस्टल यूरोप के समुद्र मार्ग के माध्यम से यात्रा करने वाले पहले यूरोपीय थे।
(प्रेषित थॉमस ५० ईसा पश्चात)
ये यूरोपीय लोग लाल सागर और अरब सागर से गुजरते हुए, जो केरल के तटों में ५० ईसा पश्चात में उतरे। यहां भी इन लोगों को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा।
क्योंकि, उन्होंने भारतीयों के साथ संवाद करने के लिए फारसी व्यापारियों को काम पर रखा।

जानना चाहते हैं क्यों?
भारत मध्य पूर्वी साम्राज्यों के साथ व्यापार संबंधों के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था, इसलिए फारसी और अरबी व्यापारियों ने भारतीय भाषाओं के साथ अच्छी तरह से परिचित थे। तो यूरोप भी मध्य पूर्वी साम्राज्यों से व्यापार संबंधों के माध्यम से जुड़ा हुआ था, इसलिए मध्य पूर्वी लोगों को भारतीय और यूरोपीय भाषाएं पता थी।
इसलिए, भारत आने वाले यूरोपीय यात्रियों को कभी भी संचार में किसी भी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। इसके अलावा, वास्को दा गामा को स्थानीय लोगों के साथ संवाद करने में किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। भारत जाने से पहले, उन्होंने पहले ही तटीय भारत के नक्शे और पहले यात्रियों की रिपोर्ट से भाषाओं के बारे में अध्ययन किया था। उनसे पहले कई ईसाई मिशनरी भारत गए और कई संस्थानों और चर्चों की स्थापना की। उन्होंने भारतीय भाषाओं को सीखा और ईसाई धर्म का प्रचार किया।
तो वास्को दा गामा या किसी अन्य यूरोपीय यात्री को कभी भी मूल भारतीय निवासी के साथ संवाद करने में कोई समस्या नहीं आई थी ।

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