पहली बार जब घड़ी का आविष्कार हुआ , दुनिया की पहली घड़ी में समय कैसे मिलाया गया

कहते हैं की हाथ में पहनी हुई घड़ी न सिर्फ इन्सान को समय बताती है बल्कि इन्सान का समय भी बताती है। कंफ्यूज हो गये क्या? कभी आपने सोचा है कि घड़ी जो बिना रुके हर वक़्त चलती रहती है ; कहाँ बनी होगी? सबसे पहले घड़ी में टाइम कैसे सेट किया गया होगा? कहीं वो टाइम गलत तो नहीं ; वरना आज तक हम सब गलत समय जीते आ रहे हैं। इन्ही सब सवालों के साथ आज कुछ घड़ी अपनी घड़ी की बात करते हैं। कई सिद्धांतों पर बनती हैं घड़ियां जैसा की हम सब जानते हैं की घड़ी एक सिम्पल मशीन है जो पूरी तरह स्वचालित है और किसी न किसी तरह से वो हमे दिन का प्रहर बताती है। ये घड़ियाँ अलग अलग सिद्धांतों पर बनती हैं जैसे धूप घड़ी; यांत्रिक घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक घड़ी। मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ा करते थे तो आपको याद होगा की इंग्लैंड के ऐल्फ्रेड महान ने मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि आविष्कृत की। उसने एक मोमबत्ती पर, लंबाई की ओर समान दूरियों पर चिह्र अंकित कर दिए थे। प्रत्येक चिह्र तक मोमबत्ती के जलने पर निश्चित समय व्यतीत होने का ज्ञान होता था। कैसे देखते थे समय बीते समय में प्राचीन …

क्या दवाइयाँ सच में एक्सपायर होती हैं ! Do medicines really expire

Note: जिन दवाओं की समाप्ति तिथि (Expiry date) गुज़र गई हों वो दवाइयां ना लें। यह उत्तर केवल आपकी जानकारी के लिए है।


जी दवाइयां एक्सपायर होती है . पर वैसे नही जैसा हम उन्हें समझते है। 1979 में USFDA ने ऐसा क़ानून बनाया कि ड्रग निर्माताओं को समाप्ति तिथि लिखना अनिवार्य हो गया।
समाप्ति तिथि का अर्थ है कि . कोई भी ड्रग निर्माता उसकी समाप्ति तिथि तक . उन दवाओं का पूरी तरह से असरदार होने की गारंटी लेता है। पर ज्यादातर दवाइयां समाप्ति तिथि के बाद भी ठीक रहती है . और उन्हें लिया जा सकता है।
इंडस्ट्री प्रैक्टिस की बात करें तो . भारत मे ज्यादातर टैबलेट (solid dose) की समाप्ति तिथि 3 सालों तक दी जाती है। जब इनकी stability testing की जाती है . तो इन्हें अलग अलग रख रखाव के तापमान और आद्रता के पैमानों पर टेस्ट किया जाता है . जिससे इनकी समाप्ति तिथि का अनुमान लगाया जा सके।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ . कई दवाइयां अपने समाप्ति तिथि के 15 वर्षो बाद तक भी ठीक रहती है।   
इन्होंने सेना को दी जाने वाली महँगी दवाओं पर . एक रिसर्च किया जिसमें ये पाया गया कि सेना को . इतनी जल्दी दवाएं बदलने की ज़रूरत नही है।
आपको यह भी बता दूं कि . कई दवाओं में overages भी मिलाई जाती है। कुछ दवाओं  खाद्य पदार्थ समय के साथ बिगड़ते है और उनमें API (active pharmaceutical ingredients)  की मात्रा कम होती जाती है। इससे निपटने के लिए कुछ अतिरिक्त मात्रा मिलाई जाती है जिससे वो अपनी समाप्ति तिथि तक असरदार रहे।
अगर 15 सालों की बात न भी माने तो कम से कम समाप्ति के 1 साल बाद तक ड्रग्स ख़राब नही होते। जब इनकी stability testing की जाती है तब इन्हें एक साल के extended period तक रखा जाता है। इसमें ज्यादातर ड्रग्स 1 साल के बाद भी बिलकुल पहले की तरह असरदार होती है।
कुछ बातें ध्यान रखने योग्य :
  • जब आप कोई दवा ले तो उसे उसमे दिए गए निर्देशो के अनुसार ही स्टोर करें। इससे उनकी shelf life बनी रहती है। अत्यधिक गर्मी या ठंड में दवाओं की stability पर असर पड़ता है।
  • अगर कोई विशेष निर्देश न हो तो सूखी, ठंडी जगह पर रखे, प्रकाश से दूर।
  • केवल कुछ दवाओं को ही रेफ्रीजिरेटर में रखने की ज़रूरत होती है। ये ज्यादातर बायोलॉजिकल ड्रग्स होती है।

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