कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

Mysterious Stone Eggs Mountain !! चट्टान देती है हर 30 साल में अंडे, वैज...

एक ऐसा चट्टान जो देती है अंडे, वैज्ञानिक भी हैं परेशान



ये तो सबको पता है कि मुर्गी, कबूतर, चिड़िया, साँप, छिपकली जैसे जीव अंडे देते हैं लेकिन अगर हम आपसे कहें कि चीन में एक ऐसी चट्टान है जो अंडे देती है तो क्या आप विश्वास करेंगे शायद नहीं लेकिन ये बात सच है कि चीन में एक ऐसी चट्टान है जो हर 30 साल में अंडा रूपी पत्थर देती है. जिसको लेकर कई साइंटिस्ट भी परेशान हैं.


वहां के रहने वाले लोग बताते हैं कि वो भी इसे देखकर आश्चर्यचकित हैं. कुछ लोगों ने देखा है कि ये चिकने अंडे पहले तो एक कवच में होते हैं और चट्टान इनको सेती है और कुछ दिन बाद ये अंडे अपने आप ज़मीन पर गिर जाते हैं.


ये चट्टान चीन के दक्षिण-पश्चिमी में प्रांत Qiannan Buyei और Miao Autonomou क्षेत्रों में स्थित है. ये चट्टान 20 मीटर (लगभग 65 फ़ीट) लम्बी और 6 मीटर (लगभग 19 फ़ीट) ऊंची है. “चन दान या” नाम की ये चट्टान चीन में स्थित है और ये पत्थर रुपी अंडे देती है इसलिए इसे ‘Egg-producing Cliff’ भी कहा जाता है. इसने वैज्ञानिकों को परेशान कर रखा है.
ये चट्टान हर 30 साल में पत्थर देती है. ये पत्थर बहुत ही चिकने होते है. जब ये पत्थर जमीं पर गिरते हैं तब गांववाले इन पत्थरों को घर ले जाते हैं उनका मानना है कि ये पत्थर उनके जीवन में खुशहाली ले कर आएगें.


ये चट्टान 500 मिलियन साल पहले बनी थी. ये एक काली और ठंडी चट्टान है. जो कई क्षेत्रों में आमतौर पर मिल जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार जैसे-जैसे मौसम और पर्यावरण में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं, इन चट्टानों को भी कभी उच्च तापमान तो कभी बेहद ठंडा मौसम झेलना पड़ता है जिस कारण इनकी संरचना और तत्वों में भी बदलाव होता है. यही वजह है कि इनमें कई तरह की आकृति उभर आती हैं. अभी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि इस चट्टान पर ये एकदम अंडाकार और चिकनी आकृतियां कैसे बनती हैं.


वैज्ञानिकों का मानना है कि गांववाले इस पत्थर को अपना गुड लक मान कर घर ले जाते है फिलहाल 70 पत्थरों को बचाया जा सका है.











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