What should every Indian know about China?

China is thrice the size of India at about 9.6 million sq. km vs. 3.2 million sq. km with only a little more population than ours.Historically, the Chinese name for India was Tianzhu - meaning heaven. In return, Indians called them by chin (after their most glorious empire - Qin) that eventually got caught by rest of the world now.Although Indians incessantly talk & compare with China, the Chinese understandably don't compare themselves with India. It is because they want to emulate/compare themselves with Europe/US than a poorer country they have beaten in race since 1978. http://www.nytimes.com/2011/09/0... (everyone wants to be compared with someone better than them).Just like how we say Namaste (with folded hands), Chinese traditional greeting comprises of bowed head and folded palms.
Whether it be gold buying, sending students abroad, scouting for resources in Africa/Latin America or wooing foreign investors both India and China compete vigorously to rank in 1 or…

अलीबाग का भुत बंगलो !! Alibag Haunted House Story

अलीबाग का भुत बंगलो !! Alibag Haunted House Story

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मेरा नाम कौशिक बारिया है। और में अलीबाग का रहने वाला हूँ। कुछ समय पहले हमारे पास घर का मकान नहीं था और हम किराए के मकान में दर-बदर भटकते रहते थे। हर ग्यारह महीने के बाद मकान मालिक मकान बदलने के लिए मझबूर किया करते थे, ताकि पुराने किरायेदार के हक़ हमें ना मिल जाए। आज भगवान की दया से हमारा खुद का छोटासा घर है जहां में, मेरी माँ, मेरे पापा, और मेरी छोटी बहन हम सब शांति से रह रहे हैं।



मै आज उस किस्से के बारे में बताने जा रहा हूँ जब पिछले दिनों हम दरबारगढ़ इलाके में किराए पर रहने गए थे। भगवान जनता है की उस किराए के मकान में हम नें क्या आतंक भोगा था। मेरा परिवार उस जान लेवा माहौल से ज़िंदा वापिस आ पाया यह भी कुदरत का एक करिश्मा ही है, वरना मुझे तो उन दिनो येही लगता था की मेरा परिवार उस कौफनाक प्रेतों की बली चड़ जाएगा।



मुझे याद है उस दिन हम ट्रक में सामान भर कर दरबारगढ़ पहुंचे थे। और हम सब रिक्षा में गए थे। जैसे ही हम घर के आँगन में पहुंचे तो मुझे अजीब सी बैचेनी होने लगी। कुछ ही देर में मजदूरों में पूरा सामान घर में लगा दिया। और माँ और दीदी घर सजाने में लग गए। मेरी नज़र घर के दरवाज़े पर टिकी थी। वहाँ मुझे कुछ अजीब सा धागा नज़र आया। मैंने फौरन वहाँ जा कर देखा तो वह धागा एक सफ़ेद धागा था जो पूरी तरह से ताजे खून से सना हुआ था।



यह सब देख कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए। मैंने फौरन पापा को बताया। हम सब नें पूरे घर की तलाशी ली तो, पूरे घर में ऐसे खून सने धागे मिलने लगे। कील के हॉल में से भी ऐसे धागे और सड़े मांस के छोटे टुकड़े मिलने लगे।



मकान मालिक के मुताबिक वह घर, पिछले तीन महीनो से बंद पड़ा था फिर ऐसी चिज़े घर के अंदर कैसे पहुंची होंगी यह एक बड़ा सवाल था। पापा नें फौरन मकान-मालिक को यह किस्सा बताया पर उन्होने यह बोल कर बात टाल दी की,,, यह सब किसी कीड़ों का काम होगा।



मेरा पूरा परिवार जानता था की ऐसा काम कीड़ों का नहीं हो सकता, और सामान्य इन्सान भी ऐसी हरकत नहीं करते हैं। पर फिर भी हम लोग वहाँ रहने के लिए मझबूर थे। चूँकि पापा तीन महीने का किराया एडवांस दे चुके थे, और वह मकान भी बड़ी मुश्किल से किराए पर मिला था।



पहली ही रात में उन भयानक शक्तियों नें अपना कहर बरपना शुरू कर दिया। मेरी बहन बाथरूम में थी तब अचानक बाथरूम के अंदर से धड़ाम से किसी के गिरने की आवाज़ आई। पापा और माँ नें दरवाजा तौड़ कर देखा तो मेरी बहन अंदर बेसुध (Unconscious) पड़ी थी।



उसे करीब पंद्रह मिनट बाद हौश आया। तब उसने कहा की बाथरूम में कोई डरावनी आकृति है जिसने मुझ को दीवार पर धक्का दे दिया और में गिर पड़ी। यह बात सुन कर मेरे तो पसीने छूट गए। मेरे पापा और माँ भी सदमें मे आ गए। हमे समज नहीं आ रहा था की क्या करें।



मेरे पूरे परिवार नें वह पूरी रात जागते हुए बिताई। सुबह पापा थके हारे ही काम पर चले गए। माँ रसोई में खाना पकाने लगी और में ब्रश कर रहा था। तभी मेरी नज़र घर की दीवारों पर पड़ी। मैंने देखा की सभी दीवारों से खून की धारायेँ रिस रही थी। मेरी तो चीख निकल गयी।



मैने माँ को रसोई में जा कर बताने का फैसला किया। जैसे ही में कीचेन में दौड़ कर गया तो मेरे,,, हौश उड़ गए। गैस की नल्ली निकली हुई थी LPG की बाटली में आग लगी हुई थी और मेरी माँ रसोई में फ्लोर पर ठीक वैसे ही बैसुध पड़ी थी जैसे मेरी बहन बाथरूम में बैसुध पड़ी थी।



मैने तुरंत सिलिन्डर की सप्लाई बंद की, आग बुझाई, और माँ को पानी छाँट कर जगाया। माँ नें कहा की इस घर में कोई भयानक बूढ़ा प्रेत घूम रहा है और उसी नें किचन में आ कर चिल्लाते हुए मेरे सिर पर किसी बोथड़ लकड़े से वार किया था।



मेरी बहन, मेरी माँ दोनों उस प्रेत के वार का शिकार हो चुकी थीं। और मुझे अब यह डर साता रहा था की कहीं वह प्रेत मेरे परिवार से किसी की जान ना लेले। मैने फौरन पापा को घर लौटने को कहा। पापा के आते ही मैंने ज़िद्द पकड़ ली की हम आज ही इस घर को छोड़ कर जाएंगे। चाहे क्यूँ ना फुटपाथ पर रहना और सोना पड़े। रात तक पापा से बात-चित करने के बाद हमने फैसला लिया की दूसरे दिन सुबह में हम तीन महीने का किराया छोड़ कर वहाँ से चले जाएंगे।



शायद वही हमारी सब से बड़ी गलती थी। हमे उसी रात वहाँ से निकाल जाना चाहिए था। उस रात करीब तीन बझे मुझे किसी के कराहने और रोने की आवाज़ आने लगी। मै चौक गया। उठ कर देखा तो मेरे पापा रो रहे थे। और उसकी साँसे फूल चुकी थी। मैंने माँ को और दीदी को तुरंत उठाया। पापा कुछ बोल नहीं पा रहे थे। बस दीवार की और देख कर फटी आँखों से इशारे किए जा रहे थे।







मैंने फौरन परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए फैसला ले लिया। की हम अब एक पल भी वहाँ नहीं रुकेंगे। माँ को बोला की अलमारी से गहने और पैसे ले कर दीदी को साथ ले कर, अभी घर के बाहर निकाल जाओ। माँ नें ठीक वैसा किया जैसा मैंने कहा। फिर मैंने रात को अपने कुछ दोस्तों को घर बुलाया और पापा को अस्पताल पहुंचाया।



पापा जब ठीक हुए तब उन्होने कहा की रात में एक भयानक परछाई दीवार से बाहर आई थी और उसने किसी वज़नी हथियार से मेरे दिल पर वार करना शुरू कर दिया था और फिर वह परछाई दीवार में चली गयी थी। उसके बाद मेरे दिल में तेज़ दर्द शुरू हो गया था, उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं।







डॉक्टर नें कहा की मेरे पापा को माइनर हार्ट-अटैक हुआ था। भगवान का शुक्र है की मेरे पापा की जान बच गयी। वरना उस घर के प्रेत नें तो मेरे परिवार को मारने की ही ठान ली थी। उस रात के बाद कभी हम उस घर में नहीं गए। समान भी मजदूरों नें ही पैक कर के वहाँ से बाहर निकाला। और मेरे दोस्तों की मदद से आज हमारा खुद का मकान भी है। उस रात भी मेरे परिवार को रहने की जगह मेरे दोस्तों नें ही दी थी।

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