पहली बार जब घड़ी का आविष्कार हुआ , दुनिया की पहली घड़ी में समय कैसे मिलाया गया

कहते हैं की हाथ में पहनी हुई घड़ी न सिर्फ इन्सान को समय बताती है बल्कि इन्सान का समय भी बताती है। कंफ्यूज हो गये क्या? कभी आपने सोचा है कि घड़ी जो बिना रुके हर वक़्त चलती रहती है ; कहाँ बनी होगी? सबसे पहले घड़ी में टाइम कैसे सेट किया गया होगा? कहीं वो टाइम गलत तो नहीं ; वरना आज तक हम सब गलत समय जीते आ रहे हैं। इन्ही सब सवालों के साथ आज कुछ घड़ी अपनी घड़ी की बात करते हैं। कई सिद्धांतों पर बनती हैं घड़ियां जैसा की हम सब जानते हैं की घड़ी एक सिम्पल मशीन है जो पूरी तरह स्वचालित है और किसी न किसी तरह से वो हमे दिन का प्रहर बताती है। ये घड़ियाँ अलग अलग सिद्धांतों पर बनती हैं जैसे धूप घड़ी; यांत्रिक घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक घड़ी। मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ा करते थे तो आपको याद होगा की इंग्लैंड के ऐल्फ्रेड महान ने मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि आविष्कृत की। उसने एक मोमबत्ती पर, लंबाई की ओर समान दूरियों पर चिह्र अंकित कर दिए थे। प्रत्येक चिह्र तक मोमबत्ती के जलने पर निश्चित समय व्यतीत होने का ज्ञान होता था। कैसे देखते थे समय बीते समय में प्राचीन …

दुनिया का सबसे अनोखा पेड़ ! World's most unique tree



मंचीनील,जिसका मतलब होता है -'मौत का सेब'
मंचीनील दुनिया का सबसे जहरीला पौधा है। इसकी पत्तियां इतनी जहरीली होती हैं कि अगर आप बारिश के दौरान इसके नीचे खड़े होते हैं, तो आपकी त्वचा पर छाले पड़ जाएंगे, क्योंकि बारिश की बूंदें पत्तियों के संपर्क से विषाक्त हो जाती हैं।
स्पेनिश खोजकर्ता और उपनिवेशवादी जुआन पोंस डी लियोन की मौत मंचीनील के जहरीले रस लगे तीर से ही हुई थी। यह रस इतना असरदार है कि यह कार के पेंट को आसानी से गला सकता है। इस पौधे में कई असाधारण विष होते हैं, जिनमें से कुछ की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।
मंचीनील के पेड़ को छूने, और यहां तक कि इसके आसपास सांस लेने तक की इजाजत नहीं दी जाती है।
फ्लोरिडा में ये पेड़ जहां उगते हैं, इस बारे में पेड़ो पर स्पष्ट चेतावनी लिखी होती है।
प्रायः जहरीले फल कड़वे होते हैं, जो कि कुतरने वाले प्राणियों के लिए एक तरह का चेतावनी होती है, जबकि मंचीनील के मामले में ऐसा नहीं है। इसका स्वाद शुरू में मीठा और स्वादिष्ट होता है। उसके बाद यह तीखी मिर्च जैसा स्वाद देने लगता है। तब शरीर मे जलन शुरू हो जाती है और सांस नली बंद होने लगती है। फल खाने से जठरांत्र शोथ हो जाता है और साथ ही आंतों में रक्तस्राव होने लगता है। इसके अलावा नसों की झनझनाहट, बैक्टीरियल सुपरिनफेक्शन, एडिमा आदि हो जाता है, जो श्वसन प्रणाली को पूर्णतः बंद कर देता है।
यह अचरज वाली बात नहीं है कि मंचीनील एक संकटग्रस्त वनस्पति प्रजाति है। आखिर कौन ऐसे पौधे को अपने आसपास उगता देखना चाहेगा?! मंचीनील के पौधे को नष्ट करते समय बस एक बात का ध्यान रखना जरूरी है - इसे जलाने की कोशिश कभी भूल से भी न करें। आपने समझ गए होंगे, इसका धुआं भी जहरीला होता है।

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