पहली बार जब घड़ी का आविष्कार हुआ , दुनिया की पहली घड़ी में समय कैसे मिलाया गया

कहते हैं की हाथ में पहनी हुई घड़ी न सिर्फ इन्सान को समय बताती है बल्कि इन्सान का समय भी बताती है। कंफ्यूज हो गये क्या? कभी आपने सोचा है कि घड़ी जो बिना रुके हर वक़्त चलती रहती है ; कहाँ बनी होगी? सबसे पहले घड़ी में टाइम कैसे सेट किया गया होगा? कहीं वो टाइम गलत तो नहीं ; वरना आज तक हम सब गलत समय जीते आ रहे हैं। इन्ही सब सवालों के साथ आज कुछ घड़ी अपनी घड़ी की बात करते हैं। कई सिद्धांतों पर बनती हैं घड़ियां जैसा की हम सब जानते हैं की घड़ी एक सिम्पल मशीन है जो पूरी तरह स्वचालित है और किसी न किसी तरह से वो हमे दिन का प्रहर बताती है। ये घड़ियाँ अलग अलग सिद्धांतों पर बनती हैं जैसे धूप घड़ी; यांत्रिक घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक घड़ी। मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ा करते थे तो आपको याद होगा की इंग्लैंड के ऐल्फ्रेड महान ने मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि आविष्कृत की। उसने एक मोमबत्ती पर, लंबाई की ओर समान दूरियों पर चिह्र अंकित कर दिए थे। प्रत्येक चिह्र तक मोमबत्ती के जलने पर निश्चित समय व्यतीत होने का ज्ञान होता था। कैसे देखते थे समय बीते समय में प्राचीन …


राकेश घनशाला (Rakesh Ghanshala)
राकेश घनशाला (Rakesh Ghanshala), प्रशिक्षक और सलाहकार (2005 से - अभी तक)

बकरियों की आंखों के बारे में जो बात अनोखी है, वह यह है कि इनकी पुतलियां आयताकार होती हैं।
ठीक इस तरह,
और ऐसे..
उनकी पुतलियों के क्षैतिज (होरिजेंटल) होने का कारण यह है कि क्योंकि वे शाकाहारी हैं, और शाकाहारी जानवरों को संभावित शिकारियों को फ़ौरन पहचानने की जरूरत होती है। ऐसे में उनकी होरिजेंटल पुतलियां और फैली हुई नजर यक़ीनन तौर पर इस काम में मददगार साबित होती हैं।
इस बात को एक साधारण लेंस वाले कैमरे और एक वाइड एंगल लेंस वाले कैमरे के उदाहरण से समझा जा सकता है।
आपको क्या लगता है, झाड़ियों दुबके हुए किसी बाघ को किस कैमरे से देख पाना ज्यादा आसान होगा?
बकरियां अपनी परिधीय दृष्टि पर काफी निर्भर रहती हैं। पुतलियों की आयताकार बनावट के कारण उनकी आँखों को अनोखी कहा जा सकता है।

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