Kobita - শৈশবের হাসি-খেলা ! শিরিন সুলতানা

শৈশবের হাসি-খেলা   শিরিন সুলতানা

নেবে কি আমায় তোমাদের সাথে?
দিগন্ত ছুঁয়ে দিবো হাত রেখে হাতে।

 সাঝ-সকালে সবাই মিলে
বকুলতলায়
ফুল কুড়িয়ে ভরবো ঝুড়ি,
অলস দুপুর কাটিয়ে দিবো
খেলবো মোরা লুকোচুরি।

টুনটুনির ঐ বাসার খুঁজে ভাঙবো মোরা ডুমুর ডাল,
মার্বেল তুমি বেশ তো খেলো
আমায়ও শিখিয়ে দিও খেলার চাল।

বৈশাখের দমকা হাওয়ায়
আম কুঁড়াবো
মাথায় দিয়ে কচুপাতার ছাতি
নুন,তেল,আর দুমুঠো চাল
কুড়িয়ে এনে শুকনো ডাল
খেলবো সবে চড়ুইভাতি।

নেবে কি আমায় তোমাদের সাথে
দিবে কি খানিক হাসির ভাগ?
তোমার আইসক্রীমের আধেক দিও
গাল ফুলিয়ে করলে রাগ।

নেবে কি আমায়, তোমাদের এই হাসি হাসি খেলায়?
আমার শৈশব যে হারায়েছি আমি, হাসি হারায়েছি অবহেলায়।

আজ নাহয় দুধভাত করেই নিও আমায় তোমাদের সাথে,
অনেক মজা করবো সবাই খেলবো সবাই হাত রেখে হাতে।

শৈশবের হাসি-খেলা
~শিরিন সুলতানা


राकेश घनशाला (Rakesh Ghanshala)
राकेश घनशाला (Rakesh Ghanshala), प्रशिक्षक और सलाहकार (2005 से - अभी तक)

बकरियों की आंखों के बारे में जो बात अनोखी है, वह यह है कि इनकी पुतलियां आयताकार होती हैं।
ठीक इस तरह,
और ऐसे..
उनकी पुतलियों के क्षैतिज (होरिजेंटल) होने का कारण यह है कि क्योंकि वे शाकाहारी हैं, और शाकाहारी जानवरों को संभावित शिकारियों को फ़ौरन पहचानने की जरूरत होती है। ऐसे में उनकी होरिजेंटल पुतलियां और फैली हुई नजर यक़ीनन तौर पर इस काम में मददगार साबित होती हैं।
इस बात को एक साधारण लेंस वाले कैमरे और एक वाइड एंगल लेंस वाले कैमरे के उदाहरण से समझा जा सकता है।
आपको क्या लगता है, झाड़ियों दुबके हुए किसी बाघ को किस कैमरे से देख पाना ज्यादा आसान होगा?
बकरियां अपनी परिधीय दृष्टि पर काफी निर्भर रहती हैं। पुतलियों की आयताकार बनावट के कारण उनकी आँखों को अनोखी कहा जा सकता है।

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