क्यों बनाई जाती हैं मां दुर्गा की मूर्ति वेश्‍यालय की मिट्टी से?

विनय गोस्वामी (Vinay Goswami),
जी हाँ, ये बात न केवल सत्य है बल्कि इसके पीछे बहुत ही गहराई पूर्ण उद्देश्य भी है। यों तो दुर्गा पूजा या दुर्गा उत्सव सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाने वाला त्योहार है लेकिन इसकी शुरआत पश्चिम बंगाल से हुई थी। यह त्योहार पश्चिम बंगाल का मुख्य त्योहार है जिसमे बड़े बड़े पंडाल सजाकर उनमे मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा की जाती है। कलकत्ता का एक खास इलाका पूजा की मूर्तियों के निर्माण और निर्माण करने वाले कारीगरों के लिये पूरे भारत मे प्रसिद्ध है। विधि विधान से मां दुर्गा की मूर्ति बनाने की जो परंपरा सदियों से चली आ रही है उसके अनुसार जिस मिट्टी से प्रतिमा तैयार की जाती है उस मिट्टी में थोड़ी मिट्टी पवित्र गंगा के किनारे से, थोड़ी सी मिट्टी वेश्याओं के आंगन से और कुछ गौमूत्र और गोबर, इन सब को मिलाया जाता है। इसमे जो बात अनजान लोगों को अचम्भित करती है वो ये हां की इतनी पवित्र मूर्तियों मे वेश्याओं के आंगन की मिट्टी भला क्यों मिलाई जाती है ? यों तो इसके पीछे कई किंवदंतिया मशहूर है जिनमे से एक यह भी है कि- एक दफा एक वेश्या ने मां दुर्गा की अनन्य भक्ति की …


राकेश घनशाला (Rakesh Ghanshala)
राकेश घनशाला (Rakesh Ghanshala), प्रशिक्षक और सलाहकार (2005 से - अभी तक)

बकरियों की आंखों के बारे में जो बात अनोखी है, वह यह है कि इनकी पुतलियां आयताकार होती हैं।
ठीक इस तरह,
और ऐसे..
उनकी पुतलियों के क्षैतिज (होरिजेंटल) होने का कारण यह है कि क्योंकि वे शाकाहारी हैं, और शाकाहारी जानवरों को संभावित शिकारियों को फ़ौरन पहचानने की जरूरत होती है। ऐसे में उनकी होरिजेंटल पुतलियां और फैली हुई नजर यक़ीनन तौर पर इस काम में मददगार साबित होती हैं।
इस बात को एक साधारण लेंस वाले कैमरे और एक वाइड एंगल लेंस वाले कैमरे के उदाहरण से समझा जा सकता है।
आपको क्या लगता है, झाड़ियों दुबके हुए किसी बाघ को किस कैमरे से देख पाना ज्यादा आसान होगा?
बकरियां अपनी परिधीय दृष्टि पर काफी निर्भर रहती हैं। पुतलियों की आयताकार बनावट के कारण उनकी आँखों को अनोखी कहा जा सकता है।

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