गेहूं और चावल दोनों में कौन अधिक पौष्टिक है ! Which is more nutritious in both wheat and rice

कुछ लोग रोटी खाने के तो कुछ लोग चावल के शौकीन होते है। क्योंकि ये ऐसे खाद्य पदार्थ है। जिसे साल के बारह महीने लोग खाना पसंद करते है, पर आज तक लोगों को सही से यह नहीं पता है कि रोटी और चावल इन दोनों अनाजों में से कौन ज्यादा बेहतर है। क्योंकि ये दोनों अनाज अपने आप में एक बेहतरीन भोजन का काम करते है। तो ऐसे में आइये जानते है इन दोनों में से कौन से हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद है:- इन दोनों अनाजों को आप अपने नाश्ते के साथ -साथ लंच में और डिनर में भी खा सकते हैं। इसके साथ ही गेहूं से बनी रोटी का सेवन आप सब्जी के साथ भी कर सकते है। इसी तरह चावल भी आप दाल, सब्जी के साथ खा सकते है। इन दोनों अनाजों में भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व होते है जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते है। अगर हम बात करें, इन दोनों अनाज के नुकसान के बारे में तो वैसे तो इसके सेवन से कोई भी हमारे शरीर को नुकसान नहीं पहुँचता। मगर आज के समय में शुद्ध चावल और गेहूं का आटा मिलना भी अपने आप में बहुत बड़ी बात है। ज्यादातर लोगों का सवाल अभी भी यही होता है कि कौन-सा अनाज ज्यादा बेहतर होता है। अगर हम ज्याद…

প্রত্যাখ্যান ! Kolome - মৌসুমী হাজরা ! Bangla Kobita & Golpo

প্রত্যাখ্যান"
 মৌসুমী হাজরা



অবশেষে, আমি প্রত্যাখ্যান করলাম তোমায়,
শুনেছো তুমি?
আমি পেরেছি তোমায় ফিরিয়ে দিতে,
এখন আমি আর মোমবাতি নয়;
যে সামান্য তাপে গলে যাবো।
আমি এখন জ্বলন্ত লাভা,
যা তরল হলেও সব কিছু ছারখার করতে পারি।
সেইদিন যখন তুমি আমায় জানিয়ে দিলে,
আমাদের সম্পর্কটা মিথ্যে,
আবেগ মিথ্যে,
একে অপরকে দেওয়া প্রতিশ্রুতি মিথ্যে,
একসাথে থাকা ভালোবাসার দিনগুলো মিথ্যে,
সেদিনই আমি জেনে গিয়েছিলাম,
আসলে যতটুকু তোমায় চিনে ছিলাম,
তা সব মিথ্যে।
তবুও আমি জানতাম -
তুমি আরও একবার আসবে,
দাঁড় করাবে নিজেকে আমার কাছে,
ভেবেছিলে আরও একবার আমি উজাড় করবো,
আরও একবার আমি ভুল করবো,
না,
আর নয়, আমার শিরদাঁড়া এখন সোজা;
প্রত্যাখ্যান করলাম তোমায়,
একা চলতে শিখে গিয়েছি, তোমায় ছাড়া।
হঠাৎ যদি আমাদের আবার দেখা হয়?
হয়তো বৃষ্টি ভেজা কোনো এক জনবহুল রাস্তায়।
আচমকা, সামনাসামনি, বহুদিন পর...
শরীরে এক আলাদা শিহরণ, সেই আগের মতো।

ঠোঁটের কোণে আলতো একটু হাসি,
মাথার চুল থেকে পায়ের নখ অব্দি একবার দেখে নেওয়া,
চোখে চোখ রেখে একদৃষ্টে তাকিয়ে থাকা।
কি ভাববো তখন আমরা?
পুরনো স্মৃতি গুলো আবার জেগে উঠবে?
আবার মস্তিষ্কে কড়া আঘাত করবে?
হয়তো মন বলে উঠবে যদি একটু মানিয়ে নেওয়া যেত........

আবার হয়তো এমন হবে না,
তখন হয়তো এড়িয়ে যাওয়াটায় উচিত হবে,
বাড়ি ফেরার তাড়া থাকবে,
তারপর, রাতে প্রিয় মানুষটাকে জড়িয়ে ধরে মনে হবে,
সুখেই তো আছি...
সব গল্পের হয়তো মিলন হয় না,
আবার কিছু গল্প অপ্রকাশিত রয়ে যায়।
দিনের শেষে রক্তিম আলোয় নীড়ে ফেরা পাখিদের মতোই-
আমাদের অনেক আগেই অতীত হয়েছে,
জীবনের সব লেনদেন।
  Kolome মৌসুমী হাজরা

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