कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

ঢেউ By-পলি ঘোষ ! Bangla Kobita

ঢেউ 

পলি ঘোষ 



চলতি পথের অচেনা ভীড়ে ।
দেখিনি যাদের আগে ,
তাদের মাঝে ও দেখি আমি 
কিছু চেনা মানুষ। 
আমার প্রিয় কাব্যখানি জুড়ে, 
লিখছি পাতায় যাকে খুঁজছি অহর্নিশ, 
আমার প্রেমের স্মৃতিরা আজ ভস্ম, 
বৃথাই খুঁড়ি স্মৃতির কবর, 
শূন্য বুকের পাঁজর 
কলম শুধুই গুমরে মরে 
করুন হাসি মুখে, 
ক্ষয়ে যায় অন্তরের শিলালিপি 
স্মৃতির ভারেই নুয়ে পরে জল  ।
চেনা অচেনার ভুল অঙ্কে 
একটু আধটু হলেও ঠিক 
মুচকে হাসি আমার ভাগ্য দেখে, 
ভীড়ে যাওয়া স্বপ্নগুলো, 
পর্ন মোচীর দলে, 
ঝরিয়ে দিল অকাল শ্রাবন, 
বাঁচার গল্প বলে। 
খুঁজতে গিয়ে নতুন ভোরে, 
ভুলতে চায় মন যাকে, 
অন্ধকারে হাতড়ে জীবন, 
ফিরে পেলনা সেই রাথটাকেই। 
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