सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

पटियाला पैग का अर्थ क्या है और यह इतना प्रसिद्ध क्यों है?

 
पटियाला पैग पूरी दुनिया में इतना प्रसिद्ध किस लिए है? यहां पढ़ कर जानिए।
पटियाला रियासत के महाराजा भूपेन्द्र सिंह अपने शौंक और विलास भरे जीवन के लिए देश विदेश में बेहद मशहूर थे। उनके द्वारा दी जाने वाली पार्टियों की महिमा इतनी होती थी कि दुसरी रियासतों के राजा महाराजा भी दावत खाने और ऐश करने आया करते थे।
एक बार महाराज भूपेंद्र सिंह ने party में यह कहा कि अब से सभी को 2 पेग मिलेंगे और वो पेग 2 उंगली से ज़्यादा नही होंगे।ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि party में बहुत से लोग लालच में ज़रूरत से ज़्यादा शराब पी जाते थे। और महाराज की party में दुनियाभर की बेहतरीन महँगी और कीमती शराब व खान पान के व्यंजनो की भरमार होती थी।लोग अधिक शराब पीने के बाद पार्टी का माहौल खराब किया करते थे, इसलिए यह फैसला लिया गया। लेकिन जो लोग रोज़ इतनी महंगी और इतनी ज्यादा शराब पीते हों (वो भी मुफ़्त में) उनका 2 छोटे पेग से क्या बनता। इस समस्या का एक समाधान निकाला गया, कि महाराज ने यह कहा है कि 2 उँगली जितना पेग मिलेगा लेकिन यह तो नही कहा कि कौन सी 2 उंगली के बराबर का पेग मिलेगा। नीचे वाली 2 pics में आप यह अंतर समझ जाएंगे। सभी अपने हाथों की इन दो उंगलियों के बराबर पेग बनवा कर पीने लगे।इस तरह जिसका हाथ जितना बड़ा उसका पेग भी उतना बड़ा।
कहा जाता है कि जब महाराज को यह बात पता चली तो नाराज़ नहीं हुए और उन्होंने खुद भी ऐसा ही पेग पीया, क्योंकि उनकी party में दूर दूर से और बहुत VIP मेहमान आते थे, तोह यह पटियाला पेग भी दूर दूर तक प्रसिद्ध हो गया
इस तरह पटियाला पेग का जनम हुआ।

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