कबीरदास जी ने ऐसा क्या किया कि उनके गुरू भी उनके सामने नतमस्तक हो गए

Neeta Kohli (नीता कोहली),
एक बार गुरु रामानंद ने कबीर से कहा, "कबीर,आज श्राद्ध का दिन है और पितरों के लिये खीर बनानी हैआप जाइये,पितरों की खीर के लिये दूध ले आइये।" कबीर उस समय छोटी आयु के ही थे.. कबीर दूध का बरतन लेकर चल पडे।चलते चलते आगे एक गाय मरी हुई पड़ी मिली।कबीर ने आस पास से घास को उखाड कर,गाय के पास डाल दिया और वही पर बैठ गये। दूध का बरतन भी पास ही रख लिया। काफी देर हो गयी,कबीर लौटे नहीं, तो गुरु रामानंद ने सोचा,पितरों को छिकाने का समय हो गया है,कबीर अभी तक नही आया,तो रामानंद जी खुद दूध लेने चल पड़े। चले जा रहे थे तो आगे देखा कि कबीर एक मरी हुई गाय के पास बरतन रखे बैठे है। गुरु रामानंद बोले,"अरे कबीर,तू दूध लेने नही गया?" कबीर बोले: स्वामीजी,यह गाय पहले घास खायेगी तभी तो दूध देगी...!!! रामानंद बोले:अरे,यह गाय तो मरी हुई है,यह घास कैसे खायेगी? कबीर बोले: स्वामी जी,यह गाय तो आज मरी है....जब आज मरी गाय घास नही खा सकती,तो आपके 100 साल पहले मरे हुए पितर खीर कैसे खायेंगे? यह सुनते ही रामानन्दजी मौन हो गये।उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। माटी का एक नाग बना के पुजे …

पटियाला पैग का अर्थ क्या है और यह इतना प्रसिद्ध क्यों है?

 
पटियाला पैग पूरी दुनिया में इतना प्रसिद्ध किस लिए है? यहां पढ़ कर जानिए।
पटियाला रियासत के महाराजा भूपेन्द्र सिंह अपने शौंक और विलास भरे जीवन के लिए देश विदेश में बेहद मशहूर थे। उनके द्वारा दी जाने वाली पार्टियों की महिमा इतनी होती थी कि दुसरी रियासतों के राजा महाराजा भी दावत खाने और ऐश करने आया करते थे।
एक बार महाराज भूपेंद्र सिंह ने party में यह कहा कि अब से सभी को 2 पेग मिलेंगे और वो पेग 2 उंगली से ज़्यादा नही होंगे।ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि party में बहुत से लोग लालच में ज़रूरत से ज़्यादा शराब पी जाते थे। और महाराज की party में दुनियाभर की बेहतरीन महँगी और कीमती शराब व खान पान के व्यंजनो की भरमार होती थी।लोग अधिक शराब पीने के बाद पार्टी का माहौल खराब किया करते थे, इसलिए यह फैसला लिया गया। लेकिन जो लोग रोज़ इतनी महंगी और इतनी ज्यादा शराब पीते हों (वो भी मुफ़्त में) उनका 2 छोटे पेग से क्या बनता। इस समस्या का एक समाधान निकाला गया, कि महाराज ने यह कहा है कि 2 उँगली जितना पेग मिलेगा लेकिन यह तो नही कहा कि कौन सी 2 उंगली के बराबर का पेग मिलेगा। नीचे वाली 2 pics में आप यह अंतर समझ जाएंगे। सभी अपने हाथों की इन दो उंगलियों के बराबर पेग बनवा कर पीने लगे।इस तरह जिसका हाथ जितना बड़ा उसका पेग भी उतना बड़ा।
कहा जाता है कि जब महाराज को यह बात पता चली तो नाराज़ नहीं हुए और उन्होंने खुद भी ऐसा ही पेग पीया, क्योंकि उनकी party में दूर दूर से और बहुत VIP मेहमान आते थे, तोह यह पटियाला पेग भी दूर दूर तक प्रसिद्ध हो गया
इस तरह पटियाला पेग का जनम हुआ।

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