कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

अमेरिका के राष्ट्रपति भवन को व्हाइट हाउस क्यों कहा जाता है ! Why is the President of America called the White House?



अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने 1901 इस इमारत को व्हाइट हाउस का नाम दिया. और भी कई उपनाम है प्रेसिडेंट पैलेस, राष्ट्रपति भवन और कार्यकारी हवेली है.
व्हाइट हाउस के बाहरी दीवारों को पेंट करने के लिए 570 गैलन रंग की जरूरत पड़ती है।सन् 1994 में पेंट का खर्च 2,83,000 डॉलर यानी एक करोड़ 72 लाख रुपए से ज्यादा था। व्हाइट हाउस में आज भी वही पत्थर की दीवारें हैं, जो राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन के तहत बनवाई गई थीं।
व्हाइट हाउस की नींव अक्टूबर 1792 में रखी गयी थी. और इसका डिज़ाइन अमेरिकी आर्किटेक्ट जेम्स होबन ने किया था. और इसको बनाने में 8 साल का समय लगा।
वाइट हाउस को 18 एकड़ जमीन में बनाया गया है एंव कुल 55000 वर्ग फीट के एरिया में बनाया गया है और धरती से इसकी ऊंचाई 70 फीट है जबकि गहराई 85 फिट है और 170 फुट चौड़ाई है
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति और प्रथम महिला को उनके भोजन, प्रसाधन, ड्राई क्लीनिंग सहित अन्य सभी चीजों के लिए भुगतान करना पड़ता है।

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