सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

अमेरिका के राष्ट्रपति भवन को व्हाइट हाउस क्यों कहा जाता है ! Why is the President of America called the White House?



अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने 1901 इस इमारत को व्हाइट हाउस का नाम दिया. और भी कई उपनाम है प्रेसिडेंट पैलेस, राष्ट्रपति भवन और कार्यकारी हवेली है.
व्हाइट हाउस के बाहरी दीवारों को पेंट करने के लिए 570 गैलन रंग की जरूरत पड़ती है।सन् 1994 में पेंट का खर्च 2,83,000 डॉलर यानी एक करोड़ 72 लाख रुपए से ज्यादा था। व्हाइट हाउस में आज भी वही पत्थर की दीवारें हैं, जो राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन के तहत बनवाई गई थीं।
व्हाइट हाउस की नींव अक्टूबर 1792 में रखी गयी थी. और इसका डिज़ाइन अमेरिकी आर्किटेक्ट जेम्स होबन ने किया था. और इसको बनाने में 8 साल का समय लगा।
वाइट हाउस को 18 एकड़ जमीन में बनाया गया है एंव कुल 55000 वर्ग फीट के एरिया में बनाया गया है और धरती से इसकी ऊंचाई 70 फीट है जबकि गहराई 85 फिट है और 170 फुट चौड़ाई है
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति और प्रथम महिला को उनके भोजन, प्रसाधन, ड्राई क्लीनिंग सहित अन्य सभी चीजों के लिए भुगतान करना पड़ता है।

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