भारतीय इतिहास के पांच बड़े गद्दार ! Five big traitors of Indian history

जयचंद
जैसे की हम सब जानते है की पृथ्वीराज चौहान देश के महान राजाओं में से एक थे, उनके शासनकाल में मोह्हमद गौरी ने देश पर कई बार आक्रमण किया पर उनको कोई बड़ी कमियाबी हासिल नहीं हुई. दूसरी तरफ कन्नौज के राका जयचंद पृथ्वीराज से अपनी बेइज्जती का बदला लेना चाहते थे, बाद में उसने मोह्हमद के साथ हाथ मिला लिया और बाद में लड़ाई में उनकी मदद भी की इसका परिणाम ये हुआ की 1192 के तराईन की लड़ाई ने मोहम्मद की जित हुई. मीर जाफर
क्या आप जानते है मीर जाफर ना होता तो हम कभी अंग्रेजो के गुलाम नहीं बन पाते. 1757 के युद्ध में सिराजुद्दौला को हराने के लिए जाफर ने अंग्रेजो की काफी मदद की थी. मीर कासिम
सिराजुद्दौला को हराने के लिए अंग्रेजो ने मीर जाफर का इस्तेमाल किया था बाद में अंग्रेजो ने मीर जाफर को हटाने के लिए मीर कासिम का इस्तेमाल किया, कासिम को राजगद्दी तो मिली पर उनको ये अहसास हो गया की उसने बहुत ही बड़ी गलती की है. मान सिंह
जैसे की हम सभी जानते है की महराणा प्रताप ने कभी भी मुगलों की गुलामी को स्वीकार नहीं किया था पर मान सिंह जैसे गद्दार ने पद के लिए खुद को मुगलों के हाथों बेच दिया. मीर सादि…

सबसे निराली और अजीब संस्कृति की देश ! The country of the most unique and strange culture



प्रिय आशीष जी इस प्रश्न का उत्तर आपने भी लिखा और आपके अतिरिक्त औरों ने भी लिखा है । और जवाब बहुत से लोगों को पसंद भी आये हैं । लेकिन मैं इन सबसे सहमत नहीं हूँ ।
ज़रा सोचिये आप ने जिन देशों की संस्कृति को निराली या अजीब बताया है क्या वे सभी देश अपनी संस्कृति को अजीब मानते हैं ये आपने नहीं सोचा है।
जो व्यक्ति जिस माहौल में रहता है वह उसे अजीब नहीं लगता दूसरों को लग सकता है ख़ासकर उसे जो छोटी बुद्धी से सोच रहा हो। अन्यथा बुद्धि का प्रयोग करने वाले को पता है हमारी संस्कृति अन्य किसी भी संस्कृति जिस से नही मिलती उसके लिये अजीब हो सकती है।
आपने जो क्रिया कलाप नहीं देखे हैं आप उन्हें अजीब समझने की भूल कर बैठते हैं । और हो सकता है आप उन्हें अभद्र या मूढ़ या मूर्ख समझने की भूल इस सोच की वजह से कर सकते हैं।
आप जानते नहीं या न जानने का नाटक कर रहे हैं कि वर्षों पुरानी भारतिय संस्कृति को जब अंग्रेज़ों ने देखा तो अजीब समझने की भूल कर बैठे। और बहुत सी आयुर्वेदिक किताबों का दहन कर बैठे। जिन में बहुत सी असाध्य बीमारियों का इलाज था।
अब जब विज्ञान ने पृथ्वी से बाहर क़दम रखा तो उसी मूर्खों वाली संस्कृत भाषा को वैज्ञानिक माना जिसका मज़ाक़ उड़ाते वे नही थकते थे। अब उसी को सीखने यहाँ चले आते हैं।
उसी योगा को विश्व ने अपनाया जिसे वे अजीब मान रहे थे या गँवार मान रहे थे।
अत: किसी भी देश की संस्कृति अजीब नही है उनका सम्मान करें । जिन प्राचीन लेखों को विश्व ने मज़ाक़ बताया अजीब बताया हम उन्हें सही साबित करने के लिये उन्हें विज्ञान से जोड़ कर बताते हैं।
हम संजय के दूर से महाभारत देखने को टेलीविजन का आविष्कार बताते नहीं थकते ताकि लोगो को वह अजीब या झूठा न लगे और महाभारत का मज़ाक़ न बने। उनके हथियारों को प्रमाणु मिसाइल से जुड़ा बताने लगे हैं जब से मिसाइल की खोज हुई है। रावण के पुष्पक विमान को विमान की खोज बताने लगे हैं जब से विमान की खोज हो गई है उससे पहले अंग्रेज़ ही नहीं वरन हम भी मज़ाक़ उड़ाने से पीछे नहीं हटते थे।
अब भारद्वाज ऋषि के बताए नीयमों को फिर से समझने के लिये संस्कृत सीखने लगे नहीं तो हमने संस्कृत को मार ही दिया था।
अजीब तो हम हैं उन लोगों के लिये जिन्हें हम समझने की भूल कर बैठते हैं।

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