हवाई जहाज के बारे में कुछ रोचक तथ्य ! Some interesting facts about airplanes

Abhijit Nimse


1. हवाई जहाजों (Aeroplane) को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इनपर आसमानी बिजली गिरने का भी असर नहीं होता। 2. साल में एक बार हर हवाई जहाज पर आसमानी बिजली जरूर गिरती है लेकिन 1963 के बाद से जहाजों पर बिजली गिरने से एक भी हादसा नहीं हुआ है। 3. हवाई जहाज में पीछे की बीचों बीच वाली सीट सबसे ज्यादा सुरक्षित होती है यानि प्लेन हादसे के दौरान केवल यही सीट सबसे ज्यादा सेफ होती है। 4. कुछ हवाई जहाजों में सीक्रेट बेडरूम भी होते हैं जहाँ प्लेन के कर्मचारी आराम कर सकते हैं। 5. कुछ लोग मानते हैं कि हर हवाई उड़ान के बाद हवाई जहाज (Air Plane) के टायर बदले जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है| हवाई जहाज के टायर 38 टन वजन तक सह सकते हैं और 170 मील प्रति घंटा की रफ़्तार से जमीन पर भी उतर सकते हैं| सैकड़ों उड़ान भरने के बाद अगर टायर खराब होते हैं तभी बदले जाते हैं। 6. हवाई जहाज के टायर बदलने के लिए भी जैक का ही इस्तेमाल किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे कार का टायर बदला जाता है। 7. रात में प्लेन लैंडिंग के दौरान प्लेन के अंदर की लाइट डिम कर दी जाती है ताकि प्लेन से उतरने के बाद यात्रियों की आखों प…

सबसे निराली और अजीब संस्कृति की देश ! The country of the most unique and strange culture



प्रिय आशीष जी इस प्रश्न का उत्तर आपने भी लिखा और आपके अतिरिक्त औरों ने भी लिखा है । और जवाब बहुत से लोगों को पसंद भी आये हैं । लेकिन मैं इन सबसे सहमत नहीं हूँ ।
ज़रा सोचिये आप ने जिन देशों की संस्कृति को निराली या अजीब बताया है क्या वे सभी देश अपनी संस्कृति को अजीब मानते हैं ये आपने नहीं सोचा है।
जो व्यक्ति जिस माहौल में रहता है वह उसे अजीब नहीं लगता दूसरों को लग सकता है ख़ासकर उसे जो छोटी बुद्धी से सोच रहा हो। अन्यथा बुद्धि का प्रयोग करने वाले को पता है हमारी संस्कृति अन्य किसी भी संस्कृति जिस से नही मिलती उसके लिये अजीब हो सकती है।
आपने जो क्रिया कलाप नहीं देखे हैं आप उन्हें अजीब समझने की भूल कर बैठते हैं । और हो सकता है आप उन्हें अभद्र या मूढ़ या मूर्ख समझने की भूल इस सोच की वजह से कर सकते हैं।
आप जानते नहीं या न जानने का नाटक कर रहे हैं कि वर्षों पुरानी भारतिय संस्कृति को जब अंग्रेज़ों ने देखा तो अजीब समझने की भूल कर बैठे। और बहुत सी आयुर्वेदिक किताबों का दहन कर बैठे। जिन में बहुत सी असाध्य बीमारियों का इलाज था।
अब जब विज्ञान ने पृथ्वी से बाहर क़दम रखा तो उसी मूर्खों वाली संस्कृत भाषा को वैज्ञानिक माना जिसका मज़ाक़ उड़ाते वे नही थकते थे। अब उसी को सीखने यहाँ चले आते हैं।
उसी योगा को विश्व ने अपनाया जिसे वे अजीब मान रहे थे या गँवार मान रहे थे।
अत: किसी भी देश की संस्कृति अजीब नही है उनका सम्मान करें । जिन प्राचीन लेखों को विश्व ने मज़ाक़ बताया अजीब बताया हम उन्हें सही साबित करने के लिये उन्हें विज्ञान से जोड़ कर बताते हैं।
हम संजय के दूर से महाभारत देखने को टेलीविजन का आविष्कार बताते नहीं थकते ताकि लोगो को वह अजीब या झूठा न लगे और महाभारत का मज़ाक़ न बने। उनके हथियारों को प्रमाणु मिसाइल से जुड़ा बताने लगे हैं जब से मिसाइल की खोज हुई है। रावण के पुष्पक विमान को विमान की खोज बताने लगे हैं जब से विमान की खोज हो गई है उससे पहले अंग्रेज़ ही नहीं वरन हम भी मज़ाक़ उड़ाने से पीछे नहीं हटते थे।
अब भारद्वाज ऋषि के बताए नीयमों को फिर से समझने के लिये संस्कृत सीखने लगे नहीं तो हमने संस्कृत को मार ही दिया था।
अजीब तो हम हैं उन लोगों के लिये जिन्हें हम समझने की भूल कर बैठते हैं।

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