गेहूं और चावल दोनों में कौन अधिक पौष्टिक है ! Which is more nutritious in both wheat and rice

कुछ लोग रोटी खाने के तो कुछ लोग चावल के शौकीन होते है। क्योंकि ये ऐसे खाद्य पदार्थ है। जिसे साल के बारह महीने लोग खाना पसंद करते है, पर आज तक लोगों को सही से यह नहीं पता है कि रोटी और चावल इन दोनों अनाजों में से कौन ज्यादा बेहतर है। क्योंकि ये दोनों अनाज अपने आप में एक बेहतरीन भोजन का काम करते है। तो ऐसे में आइये जानते है इन दोनों में से कौन से हमारे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद है:- इन दोनों अनाजों को आप अपने नाश्ते के साथ -साथ लंच में और डिनर में भी खा सकते हैं। इसके साथ ही गेहूं से बनी रोटी का सेवन आप सब्जी के साथ भी कर सकते है। इसी तरह चावल भी आप दाल, सब्जी के साथ खा सकते है। इन दोनों अनाजों में भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व होते है जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते है। अगर हम बात करें, इन दोनों अनाज के नुकसान के बारे में तो वैसे तो इसके सेवन से कोई भी हमारे शरीर को नुकसान नहीं पहुँचता। मगर आज के समय में शुद्ध चावल और गेहूं का आटा मिलना भी अपने आप में बहुत बड़ी बात है। ज्यादातर लोगों का सवाल अभी भी यही होता है कि कौन-सा अनाज ज्यादा बेहतर होता है। अगर हम ज्याद…

Why are mobile numbers only ten digits ! मोबाइल नंबर दस अंकों के ही क्यों होते हैं



कारण
तकनीकी और उपयोगक कारणों से दुनिया में वर्तमान में मोबाइल नंबर 10 से 11 अंकों से भिन्न होते हैं। तकनीकी कारणों से, ब्रिटेन और चीन में मोबाइल फोन नंबर अब 11 अंकों तक चले गए हैं।
भारत में सभी मोबाइल नंबरों में सरकार की राष्ट्रीय नंबरिंग योजना (एनएनपी) के तहत 10 अंक हैं। मोबाइल फोन नंबर में अंकों की संख्या देश के कोड को लगाए बिना अधिकतम मोबाइल फोन का वर्णन करती है। जो 91 (भारत के लिए) है।
आगे क्या होगा?
2003 तक हमारे पास 9 अंकों का सेल नंबर था, जिससे अधिकतम संख्या में सेल संख्या 109 थी, यानी अधिकतम 1000 मिलियन या 100 करोड़ ग्राहक। चूंकि हमारी आबादी 125 करोड़ के करीब है, जाहिर है कि हमारे पास 9 अंकों का सेल फोन नंबर नहीं हो सकता है।
जिसके बाद 10 अंको वही प्रणाली को लागू किया गया। 10 अंकों वाले सेल नंबर को अपनाने की क्षमता 10 अरब या 1000 करोड़ हैं यानी 10 अंक के नंबर 1000 करोड़ ग्राहकों की क्षमता प्रदान करती है जिससे हमारे कुल जनसंख्या को मोबाइल नंबर प्राप्त हो सके और और साथ कि इसकी कमी भी न हो।
कब हुआ लागू?
2003 में, दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने भारत में 10 अंकों के मोबाइल नंबर लागू किए थे जो 30 वर्षों तक की जरूरतों को पूरा करेंगे। फरवरी 2009 को, भारत ने 375.74 मिलियन वायरलेस ग्राहकों का उपयोगकर्ता आधार पंजीकृत किया।
मौजूदा 10 अंकों की संख्या योजना के तहत, भारत अधिकतम 1 अरब मोबाइल नंबर जारी कर सकता हैं और अगले कुछ वर्षों में भारत में मोबाइल फोन कनेक्शन इस आंकड़े को पार के लेंगे। डीओटी ने पहले जनवरी 2010 में 10-अंकों से 11 अंकों के हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया था।
हालांकि अभी 11 अंको के नंबर आने में समय हैं लेकिन यह काम बहुत जल्द होने वाला हैं और इसको लेकर सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। और आपको कुछ वर्षों के अंदर ही 11 अंको के फ़ोन नंबर देखने को मिल जाएंगे।

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