कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

कुछ ऐसे दिलचस्प तथ्य ! Some interesting facts


आप जर्मनी और डेनमार्क के बीच का समुद्र, एक ट्रेन में बैठ कर पार कर सकते हैं। समुद्र पार करने के लिए यह ट्रेन एक जहाज पे चढ़ जाती है और गंतव्य पे उतर जाती है।
Vogelfluglinie हैम्बर्ग और कोपेनहेगन के बीच एक ट्रेन लाइन है जो जर्मन तटीय स्टेशन, पुटगार्डन और डेनिश स्टेशन, Rødby को जोड़ती है।
पुट्टगार्डन में ट्रेन धीरे-धीरे एक फेरी के निचले डेक पर चढ़ती है और आपको ट्रेन से उतरने के लिए कहा जाता है।
पुटगार्डन में फेरी पर चढ़ती हुई ट्रेनें:
आप डेक पर खड़े होकर समुद्र के लुभावने दृश्य का आनंद ले सकते हैं या ड्यूटी-फ्री स्टोर में खरीददारी कर सकते हैं।
पीछे आप जर्मनी देख सकते हैं:
Rødby पहुंचने पर, आपको अपनी ट्रेन पर वापस चढ़ने के लिए कहा जाता है, जो फिर जहाज से नीचे उतरती है और कोपेनहेगन के रास्ते पर चल पड़ती है!
फेरी से उतरती हुई ट्रेन:
इसी प्रकार की एक और सेवा, बर्लिन नाइट एक्सप्रेस / स्कैंडिनेविया नाइट एक्सप्रेस मार्ग (माल्मो और बर्लिन के बीच) पर ट्रेलबॉर्ग, स्वीडन और सस्निट्ज़, जर्मनी के बीच भी चलती है। इस सेवा के बारे में मजेदार बात यह है कि इंजन हर तरफ से अलग हो जाता है, और केवल डिब्बे ही जहाज पर चढ़ाये जाते हैं। यकीनन इसमें काफी समय लगता है, लेकिन यह एक रात की ट्रेन है, इसलिए ज्यादातर यात्री सो रहे होते हैं।
इंजीनियरिंग का कितना अद्भुत नमूना है यह !

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