पुरुष लिंग के बारे में चार रोचक तथ्य ! Interesting Facts About Male Gender

अभय गुप्ता (Abhay Gupta)

हर पुरुष और स्त्री के अंदर एक गुप्तांग होता है जिसे सामान्यतः हम लिंग के नाम से जानते हैं। स्त्री के अंदर मौजूद गुप्तांग को योनि और पुरुष के अंदर मौजूद गुप्तांग को लिंग कहते हैं। सेक्स के दौरान जब इन दोनों गुप्तांगों का मिलन होता है तो इससे ही स्त्री का गर्भ ठहर जाता है और वो माँ बन जाती है। आज हम आपको लिंग के बारे में हैरान कर देने वाली बातों को बताएंगे तो ध्यान से इस पोस्ट को पढ़ते रहें। 1. हर देश के लोगों का लिंग एक समान नही होता। किसी का लिंग मोटा और लम्बा होता है तो किसी का लिंग छोटा और पतला। अफ्रीकी देशों के लोगों का लिंग एशिया देशों के लोगों के लिंग से काफी लंबा और मोटा होता है जबकि एशिया देशों के लोगों का लिंग अफ्रीकी देशो के लोगों के लिंग से छोटा और पतला होता है। 2. लिंग की नॉर्मल लंबाई 6 से 13 सेंटी मीटर तक होती है जबकि तनाव की स्थिति में यह 7 से 17 सेंटी मीटर तक हो जाती है। 3. लम्बे लिंग के मुकाबले छोटा लिंग अधिकतर तने होने के कारण ज्यादा लंबा हो जाता है। 4. लिंग का साइज वंश और नश्ल पर भी निर्भर करता है।

एमडीएच (MDH) मसाला मालिक के बारे में कुछ अज्ञात तथ्य ! Some unknown facts about the MDH Spice Owner



  • MDH के मालिक का नाम महाशय धर्मपाल गुलाटी (Mahatmas Dharmapal Gulati) है
  • इनका जन्म 27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में एक सामान्य परिवार में हुआ था
  • इनके पिता का नाम महाशय चुन्नीलाल और माताजी माता चनन देवी था
  • सियालकोट में इनके पिताजी की मसालोंं की एक छोटी सी दुकान थी जिसका नाम महाशय दी हट्टी था
  • इसी महाशय दी हट्टी से नाम आया M – महाशय D- दी H- हट्टी यानि MDH
  • इन्‍होंने 1933 में 5 वी कक्षा मेें फेल होने से स्कूल की पढाई छोड़ दी थी
  • इनके पढाई छोडने के बाद सबसे पहले इनके पिता ने उन्हें लकड़ी का काम सीखने एक बढ़ई के पास भेजा
  • इनका मन वहॉ भी नहीं लगा और ये 8 माह काम करने के बाद वहॉ भी नहीं गये
  • इसके बाद इन्‍होंने साबुन का व्यवसाय किया फिर कपड़ो के व्यापारी बने फिर बाद में ये चावल के भी व्यापारी बने लेकिन इनमेंं से किसी भी व्यापार में वे लंबे समय तक नही टिक सके
  • इसके बाद में इन्होंने दोबारा अपने पैतृक व्यवसाय को ही करने की ठानी और मसालोंं का व्यवसाय किया
  • इसके बाद देश का विभाजन हुआ और ये 27 सितम्बर 1947 को भारत आकर दिल्ली रहने लगे
  • दिल्‍ली आकर इन्‍होंने न्यू दिल्ली स्टेशन से कुतब रोड और करोल बाग़ से बड़ा हिन्दू राव तक तांगा चलाने का कार्य किया
  • इसके बाद कुछ पैसे इकट्ठे कर एक लकडी की दुकान खरीदी और परिवारिक के व्यवसाय यानि मसालों का व्‍यवसाय का कार्य करोल बाग से शुरू किया
  • इसके बाद इन्‍होंने 1953 में अपनी दूसरी दुकान चांदनी चौक में स्‍थापित की
  • इसके बाद 1959 में इन्‍होंने दिल्‍ली के कीर्ति नगर में मसालों की एक फैक्‍ट्री लगा दी
  • इन्होंने अपने ब्रांड MDH का नाम रोशन करने के लिए काफी महेनत की आज एमडीएच की देशभर में 15 फैक्ट्री हैं
  • MDH ब्रांड मसालों के भारतीय बाज़ार में 12 % हिस्से के साथ दुसरे स्‍थान पर है
  • आज MDH कंपनी 100 से ज्यादा देशों मेंं अपने 60 से अधिक प्रोडक्ट्स बेच रही है
  • महाशय धरमपाल गुलाटी जी मसालों के व्‍यापार के साथ-साथ कई सामा‍जिक कार्यों से भी जुडे हुऐ हैं
  • इनकी संस्‍था ने कई स्‍कूल और अस्‍पताल भी बनवाये है
  • जिनमें MDH इंटरनेशनल स्कूल, महाशय चुन्नीलाल सरस्वती शिशु मंदिर, माता लीलावती कन्या विद्यालय, महाशय धरमपाल विद्या मंदिर इत्यादि शामिल है
  • ये 94 साल की उम्र में भारत में 2017 में सबसे ज्यादा कमाने वाले FMCG सीईओ बने
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  • सिद्धार्थ मावाणी 

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