पहली बार जब घड़ी का आविष्कार हुआ , दुनिया की पहली घड़ी में समय कैसे मिलाया गया

कहते हैं की हाथ में पहनी हुई घड़ी न सिर्फ इन्सान को समय बताती है बल्कि इन्सान का समय भी बताती है। कंफ्यूज हो गये क्या? कभी आपने सोचा है कि घड़ी जो बिना रुके हर वक़्त चलती रहती है ; कहाँ बनी होगी? सबसे पहले घड़ी में टाइम कैसे सेट किया गया होगा? कहीं वो टाइम गलत तो नहीं ; वरना आज तक हम सब गलत समय जीते आ रहे हैं। इन्ही सब सवालों के साथ आज कुछ घड़ी अपनी घड़ी की बात करते हैं। कई सिद्धांतों पर बनती हैं घड़ियां जैसा की हम सब जानते हैं की घड़ी एक सिम्पल मशीन है जो पूरी तरह स्वचालित है और किसी न किसी तरह से वो हमे दिन का प्रहर बताती है। ये घड़ियाँ अलग अलग सिद्धांतों पर बनती हैं जैसे धूप घड़ी; यांत्रिक घड़ी और इलेक्ट्रॉनिक घड़ी। मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि जब हम बचपन में विज्ञान पढ़ा करते थे तो आपको याद होगा की इंग्लैंड के ऐल्फ्रेड महान ने मोमबत्ती द्वारा समय का ज्ञान करने की विधि आविष्कृत की। उसने एक मोमबत्ती पर, लंबाई की ओर समान दूरियों पर चिह्र अंकित कर दिए थे। प्रत्येक चिह्र तक मोमबत्ती के जलने पर निश्चित समय व्यतीत होने का ज्ञान होता था। कैसे देखते थे समय बीते समय में प्राचीन …

कुत्ते कारों का पीछा क्यों करते हैं ! Why do dogs pursue cars

1) कुत्तों का ज्वलनशील स्वभाव:
आपने बहुत सी फिल्मों में ये डायलॉग सुना होंगा, इलाका कुत्तों का होता हैं शेरों का नहीं!!
पहला कारण यहीं हैं कुत्तों का चलती गाड़ी के पीछे-पीछे भागने का।
दरअसल कुत्ते अपने एरिया को लेकर काफी पोसेसिव होतें हैं।वो पेड़ों, गाड़ियों के टायरों इत्यादि में यूरीन सीक्रिट कर के ये सुनिश्चित करतें हैं कि ये उन्हीं का एरिया हैं, चूंकि नाक के तेज़ होते हैं इसलिए कोई शक नहीं की वो अपने एरिया को पहचानते भी हैं और अगर कोई आएं तो उसे बाहर का रास्ता भी दिखाते हैं। और आपकी यहाँ आने की मनाही हैं, तो शायद गलत नहीं होगा!!!
पर जब किसी कुत्ते को किसी गाड़ी के टायर पर किसी दूसरें कुत्ते की यूरीन समझ़ आती हैं, जो तेज़ नाक के धनी कुत्ते के लिए काफ़ी आसान होता हैं पहचाना, और खास़कर तब जब गाड़ी तेज़ी से जा रही हों, तब एक एरिया के प्रति लगाव समझते हुए वो उस गाड़ी के पीछे दौड़ लगाता हैं, वर्चस्व और एरिया पर कंट्रोल शायद इसे ही कहते हैं और इससे अच्छा उदाहरण भी नहीं कोई।
2) भूखा होना:
माना जाता हैं जब एक कुत्ता काफ़ी भूखा हो तो तब भी वो चलती गाड़ी का पीछा करता हैं।
3) जब किसी कुत्ते की मौत गाड़ी के नीचें आने से होती हैं:
कुत्ता एक बेहद ही संवेदनशील जानवर होता हैं और दोस्ती निभाना जानता हैं, इस कारण जब भी कोई ऐसी गाड़ी जिस पर किसी कुत्ते को वो मह़क समझ़ आती हैं, वो तुरंत उस गाड़ी के पीछे हो लेता हैं और दूर तक दौड़कर अपने अंजान साथी के प्रति अपनी वफ़ादारी निभाता हैं।
4) अकेलापन:
थोड़ी हैरानी वाला बात हैं पर जी हां कुत्तों को भी अकेलापन महसूस होता हैं।और जब ये अकेलापन ज्यादा गंभीर रूप से बाहर समझ़ आता हैं तब वो चलतीं गाड़ी का पीछा करते हैं।

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