सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

Untold Mystery of Dwarka Nagri in INDIA ! भारत का सबसे रहस्यमय स्थान


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156 बम भी श्री द्वारिका धाम की एक ईंट नही हिला सके!
जी हाँ! आप बिलकुल सत्य और प्रामाणिक घटना पढ़ने जा रहे है..
भारत-पाक के 1965 में हुए युद्ध के दौरान पाकिस्तान जल सेना ने भारत पर एक भीषण आक्रमण करने का निर्णय लिया। इसके लिए द्वारका नगरी (गुजरात), जो कि समुद्र से लगी होने के कारण और पाकिस्तानी सीमा से नज़दीक जोन के कारण चुनी गई।
ये आक्रमण 7 सितंबर की रात्रि को हुआ और इस आक्रमण में 7 समुद्री युद्ध जहाजों का प्रयोग पाकिस्तान ने किया। इन सातों जहाजों ने प्रत्येक ने लगभग 50 राउंड बम गोलो की वर्षा द्वारका नगरी पर लगभग 20 मिनिट तक अनवरत करी। फिर द्वारका नगरी से उठते धुँए को देख कर इन्होंने ये अनुमान लगा लिया के सारे नगर को हमनें धूल धूसरित कर दिया है, और अपने को विजेता मानकर वहाँ से निकल लिए।
लेकिन वास्तविकता तो कुछ और थी!
भारत ने प्रातःकाल होते ही घटना की समीक्षा और नुकसान के जायज़ा लेने आईइनएस तलवार नामक युद्धक जहाज़ द्वारका भेजा। इस टीम ने जो रिपोर्ट दी वो कुछ इस प्रकार है:
“रेलवे स्टेशन के एक गोदाम पर बम गिरने से नुकसान हुआ है और जिसका धुँआ सब ओर बिछ गया है। इसको छोड़ कर समूचे द्वारका में कही कुछ भी नुकसान नही हुआ है। जितने बम गोले पाकिस्तान ने दागे, वे अधिकतर समुद्र और द्वारका के बीच मे जो गीली मुलायम मिट्टी है उसमें धंस गए। ना तो वे फटे ना कोई नुकसान हुआ। और 40 बिना फटे बम गोले भी समुद्र तट से बरामद हुए है।”
रेल गोदाम के धुँए को वे द्वारका का धुआँ समझ बैठे!
हमारा भारत सभी को विस्मित और मंत्रमुग्ध करने में सदा से अग्रणी रहा है। पग पग पर रहस्य भरे पड़े है यहाँ!


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