सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य ! Some Interesting Facts About Subramaniam Swamy



1. सुब्रमण्यम स्वामी जी; भारत के श्रेष्ठम वकील; राम जेठमलानी जी को हराने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं - जेठमलानी जी ने स्वामी जी के खिलाफ आज तक 4 मानहानि के मुकदमे दायर किए, और स्वामी जी ने उन्हें चारों मुकदमों में हरा दिया ! - सबसे बड़ी बात तो यह है की सुब्रमण्यम स्वामी जी ने कानून की कोई भी औपचारिक शिक्षा नहीं ली है (कोई अकादमिक कोर्स नहीं किया) - उन्होंने सिर्फ भारत के संविधान और भारतीय कानून से संबंधित अन्य पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त किया है |
2. जब वह आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के खिलाफ कुछ बोल दिया था और इस बात पर उन्हें 1973 में आईआईटी से निकाल दिया गया था। इसके लिए उन्होंने आईआईटी पर मुकदमा दायर किया, और 18 साल तक केस लड़ने के बाद ,1991 में केस जीता। दोबारा फिर, आईआईटी में ज्वाइन करने के अगले दिन ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया - वह सिर्फ दुनिया को अपनी क्षमता दिखाना चाहते थे।
3. कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा मार्ग को भारतीयों के लिए उपलब्ध करने के पीछे स्वामी जी की चीन के सर्वोपरि नेता डेंग शियाओपिंग से की गयी सफल राजनीतिक बातचीत है!
4. आपातकाल (1975-77) के दौरान स्वामी जी ने पूरे 19 महीने की अवधि के लिए गिरफ्तारी वारंट को खारिज कर दिया - उनका सबसे साहसी करतब तो यह था की इस आपातकाल के दौरान, वह अमेरिका से भारत में आये, संसद के सुरक्षा घेरा तोड़कर 10 अगस्त 1976 को लोकसभा सत्र में भाग लिया, संसद से बाहर निकले, और अमेरिका लौट गए।
5. स्वामी जी के नाम ये तमगा भी है, यद्दपि वो विरोधी दाल के थे (उनकी पार्टी सत्ता में नहीं थी), उन्हें सत्ताधारी पार्टी द्वारा कैबिनेट रैंक दी गयी - 1994 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव जी ने स्वामी जी को एक कैबिनेट रैंक दी थी।

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