कंडोम के कुछ मज़ेदार उपयोग

जितेन्द्र प्रताप सिंह (Jitendra Pratap Singh)
कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बहुत खुश हुआ जब बनारस के बुनकरों में मुफ्त में बांटे जाने वाले कंडोम की मांग खूब बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग यह सोच रहा था कंडोम बांटने से बुनकरों के जनसंख्या वृद्धि रुकेगी और कंडोम का सही इस्तेमाल होगा लेकिन जब पता चला कि बनारसी साड़ी बनाने वाले बुनकर मुफ्त में मिलने वाले कंडोम का इस्तेमाल साड़ी बनाने में कर रहे हैं तब ना सिर्फ उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी दुनिया चौक उठी थी साड़ी बनाने वाले बुनकर कंडोम का इस्तेमाल अपने करघा पर करते हैं. साड़ियाँ तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं कंडोम दरअसल कंडोम में चिकनाई युक्त पदार्थ होता है और करघा पर लगाने से उसके धागे तेज़ी से चलते हैं और उनमें चमक भी आ जाती है. क्योंकि कंडोम में प्राकृतिक रबड़ यानी लैक्टेस होता है इसलिए बुनकर बुनाई के पहले धागों को कंडोम से खूब रगड़ देते हैं जिससे धागे में इतनी अच्छी चिकनाई आ जाती है इस साड़ी की बुनाई करते समय धागा फसता नहीं है और बुनाई तेजी से होता है और साड़ियों में बहुत अच्छी प्राकृतिक चमक आ जात…

सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य ! Some Interesting Facts About Subramaniam Swamy



1. सुब्रमण्यम स्वामी जी; भारत के श्रेष्ठम वकील; राम जेठमलानी जी को हराने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं - जेठमलानी जी ने स्वामी जी के खिलाफ आज तक 4 मानहानि के मुकदमे दायर किए, और स्वामी जी ने उन्हें चारों मुकदमों में हरा दिया ! - सबसे बड़ी बात तो यह है की सुब्रमण्यम स्वामी जी ने कानून की कोई भी औपचारिक शिक्षा नहीं ली है (कोई अकादमिक कोर्स नहीं किया) - उन्होंने सिर्फ भारत के संविधान और भारतीय कानून से संबंधित अन्य पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त किया है |
2. जब वह आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के खिलाफ कुछ बोल दिया था और इस बात पर उन्हें 1973 में आईआईटी से निकाल दिया गया था। इसके लिए उन्होंने आईआईटी पर मुकदमा दायर किया, और 18 साल तक केस लड़ने के बाद ,1991 में केस जीता। दोबारा फिर, आईआईटी में ज्वाइन करने के अगले दिन ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया - वह सिर्फ दुनिया को अपनी क्षमता दिखाना चाहते थे।
3. कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा मार्ग को भारतीयों के लिए उपलब्ध करने के पीछे स्वामी जी की चीन के सर्वोपरि नेता डेंग शियाओपिंग से की गयी सफल राजनीतिक बातचीत है!
4. आपातकाल (1975-77) के दौरान स्वामी जी ने पूरे 19 महीने की अवधि के लिए गिरफ्तारी वारंट को खारिज कर दिया - उनका सबसे साहसी करतब तो यह था की इस आपातकाल के दौरान, वह अमेरिका से भारत में आये, संसद के सुरक्षा घेरा तोड़कर 10 अगस्त 1976 को लोकसभा सत्र में भाग लिया, संसद से बाहर निकले, और अमेरिका लौट गए।
5. स्वामी जी के नाम ये तमगा भी है, यद्दपि वो विरोधी दाल के थे (उनकी पार्टी सत्ता में नहीं थी), उन्हें सत्ताधारी पार्टी द्वारा कैबिनेट रैंक दी गयी - 1994 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव जी ने स्वामी जी को एक कैबिनेट रैंक दी थी।

चित्र स्त्रोत:

Comments