आखिर क्यों मच्छर झुंड में सिर पर मंडराते हैं ! Why the mosquitoes roam on the head

अभिषेक सिंह (Abhishek Singh)
ऐसा हमने जरूर बचपन मे देखा होगा और सोचा भी होगा की आखिर क्यों ऐसा मेरे साथ हो रहा है। सबसे अजीब बात ये की उस जगह से भागने पर भी वापस सिर पर मंडराने लगते थे। लेकिन शायद ही अब कोई ध्यान देता हो, मगर ऐसा अभी भी होता ही हैं कि मच्छर आपके सिर पर कई बार मंडराते हैं। ऐसी आदत न केवल मच्छरों है कि होती है बल्कि अन्य मक्खियों और कीड़े भी ऐसा करते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। यदि यह मादा मच्छर है, तो यह आपके सिर पर मंडराती है क्योंकि यह कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य पदार्थों (पसीना, गंध और गर्मी सहित) में रुचि रखता है जिसे आप लगातार निकालतेे हैं। उनके एंटीना पर सेंसर लगे होते हैं जो इन चीजों का पता लगाते हैं और भोजन के स्रोत का पता लगाने में उनकी मदद करते हैं। मच्छर विशेष रूप से ऑक्टेनॉल (मानव पसीने में पाया जाने वाला एक रसायन) के शौकीन हैं, इसलिए यदि आपको बहुत पसीना आ रहा होता हैं, तो आप इनके आसान लक्ष्य बन जाते हैं। कभी-कभी, आपने देखा होगा कि बगीचे में अपने दोस्तों से बात करते समय, मच्छरों का झुंड विशेष रूप से आपके सिर के ऊपर मंडरा रहा होता है और दूसरो…

सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य ! Some Interesting Facts About Subramaniam Swamy



1. सुब्रमण्यम स्वामी जी; भारत के श्रेष्ठम वकील; राम जेठमलानी जी को हराने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं - जेठमलानी जी ने स्वामी जी के खिलाफ आज तक 4 मानहानि के मुकदमे दायर किए, और स्वामी जी ने उन्हें चारों मुकदमों में हरा दिया ! - सबसे बड़ी बात तो यह है की सुब्रमण्यम स्वामी जी ने कानून की कोई भी औपचारिक शिक्षा नहीं ली है (कोई अकादमिक कोर्स नहीं किया) - उन्होंने सिर्फ भारत के संविधान और भारतीय कानून से संबंधित अन्य पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त किया है |
2. जब वह आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के खिलाफ कुछ बोल दिया था और इस बात पर उन्हें 1973 में आईआईटी से निकाल दिया गया था। इसके लिए उन्होंने आईआईटी पर मुकदमा दायर किया, और 18 साल तक केस लड़ने के बाद ,1991 में केस जीता। दोबारा फिर, आईआईटी में ज्वाइन करने के अगले दिन ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया - वह सिर्फ दुनिया को अपनी क्षमता दिखाना चाहते थे।
3. कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा मार्ग को भारतीयों के लिए उपलब्ध करने के पीछे स्वामी जी की चीन के सर्वोपरि नेता डेंग शियाओपिंग से की गयी सफल राजनीतिक बातचीत है!
4. आपातकाल (1975-77) के दौरान स्वामी जी ने पूरे 19 महीने की अवधि के लिए गिरफ्तारी वारंट को खारिज कर दिया - उनका सबसे साहसी करतब तो यह था की इस आपातकाल के दौरान, वह अमेरिका से भारत में आये, संसद के सुरक्षा घेरा तोड़कर 10 अगस्त 1976 को लोकसभा सत्र में भाग लिया, संसद से बाहर निकले, और अमेरिका लौट गए।
5. स्वामी जी के नाम ये तमगा भी है, यद्दपि वो विरोधी दाल के थे (उनकी पार्टी सत्ता में नहीं थी), उन्हें सत्ताधारी पार्टी द्वारा कैबिनेट रैंक दी गयी - 1994 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव जी ने स्वामी जी को एक कैबिनेट रैंक दी थी।

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