दुनिया की सबसे महंगी सब्जी | World Most Expensive Vegetable

दुनिया में कई तरह की सब्जियां हैं कुछ सब्जियां जो हम नॉर्मल लाइफ में रोजाना खाते हैं। लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी हैं। जिसके दाम के बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे दुनिया की सबसे महंगी सब्जी के बारे में। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
हॉप शूट्स।आपको बता दें की ये सब्जी दुनिया की सबसे महंगी सब्जी हैं। आमतौर पर यह सब्जी 1000 यूरो प्रति किलो बिकती है यानी भारतीय रुपये में कहें तो इसकी कीमत 80 हजार रुपये किलो के आसपास है। इसे खरीद पाना नॉर्मल इंसान के बस में नहीं हैं।आपको बता दें की इस हॉप का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर भी किया जाता है। सदियों से इसका इस्तेमाल दांत के दर्द को दूर करने से लेकर टीबी के इलाज तक में होता रहा है। हॉप में ऐंटीबायॉटिक की प्रॉपर्टी पाई जाती है जो इंसान के हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इससे शरीर की कई बीमारियां दूर हो जाती हैं और इंसान खुद को सेहतमंद महसूस करता हैं।यह सदाबहार सब्जी है जो साल भर उगाई जा सकती है। लेकिन ठंडी के मौसम को इसके लिए ठीक नहीं माना जाता है। मार्च से लेकर जून तक इसकी खेती के लिए आदर्श समय मान…

हम ज्यादातर लिखने के लिए नीली स्याही वाले पेन का उपयोग क्यों करते हैं ! Why do we use blue ink pens to write most





सबसे पहले काली स्याही कम उपयोग क्यों कि जाती है -
जानने के लिए नीचे दिए फॉर्म पर नज़र डालिए -
  अब बताइये की ऊपर दिया फॉर्म फोटोकॉपी है या फिर फॉर्म पर काली पेन से हस्ताक्षर किए गए है? ये बता पाना बहुत मुश्किल है। यही मुख्य कारण है की काली स्याही कम उपयोग की जाती है क्योंकि हमारी ज्यादातर प्रिंटिंग काले रंग से की जाती है। इसलिए प्रिंटेड पेपर पर किसी अन्य रंग की स्याही उपयोग करके बड़ी आसानी से अंतर पता किया जा सकता है कि किस जगह पर पेन चलाया गया है।
लेकिन मुख्य सवाल है नीला रंग ही क्यों ज्यादा उपयोग किया जाता है।
इसका कारण मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक है। यदि आप रंगों को उनकी आवृत्ति/तरगधेर्य के आधार पर उन्हें बाटें जैसे नीचे चित्र में दिया है।

तो यहाँ देख सकते है कि लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे ज्यादा है अर्थात यह बड़ी आसानी से दूर से भी देखा जा सकता है। लेकिन ज्यादा देर तक इतनी तरंगदैर्ध्य वाले रंग देखना आपकी आंखों के लिए परेशानी हो सकती है। इसलिए ज्यादा तरंगदैर्ध्य के रंगों का उपयोग हम सामान्यतः स्याही या पेन में नही करते। यही कारण है टीचर हमेसा लाल रंग का उपयोग करते है क्योंकि ये बहुत आसानी से नज़र आता है। लेकिन कभी ध्यान दिया वह जो गोला बनाते है वह हमारी आंखों में कितना चुभता है हाहा।
ज्यादा देर तक किसी रंग के संपर्क में रहना है तो कम तरंगदैर्ध्य वाला रंग सबसे अच्छा है। अब सबसे कम तरंगदैर्ध्य के रंग हमारे पास है - बैंगनी, जामुनी और नीला। यहाँ हम बैंगनी और जामुनी न उपयोग करके नीला रंग उपयोग करते है। इसका कारण मनोवैज्ञानिक है।
मनोविज्ञान के अनुसार नीला रंग काफी देर तक आपको जोड़े रखने में सबसे कारगर है। 

 ये आपके अंदर का तनाव कम करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। नीला रंग विश्वास का भी प्रतीक है। कभी आपने ध्यान दिया कि सोशल नेटवर्क वेबसाइट (फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन) में नीला रंग ही क्यों उपयोग होता है क्योंकि वह चाहते है कि आप उनसे घण्टों एकाग्रता से जुड़ें रहे। वही दूसरी कंपनियां इस रंग का उपयोग वहाँ करती है जहां उन्हें अपने कस्टमर्स से विश्वास पाना है।

चूंकि नीला रंग विश्वास, एकाग्रता, लंबे समय तक जोड़े रखने में कारगर और कम तरंगदैर्ध्य के कारण आंखों के लिए बेहतर है। इसलिए नीले रंग की स्याही, पेन के लिए भी उत्तम है।

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