सैटेलाइट फोन क्या है? क्यों यह बहुत महंगा है?

सैटेलाइट फोन….. 'सैटेलाइट फोन को सेटफोन के नाम से भी जाना जाता है,ये हमारे फोन्स की तुलना में अलग होते हैं। क्योंकि यह लैंडलाइन या सेल्युलर टावरों की बजाय सैटेलाइट (उपग्रहों ) से सिग्नल प्राप्त करते हैं'। ( चित्र सैटेलाइटफोन ) इनकी खास बात यह होती है कि इनके द्वारा किसी भी स्थान से काॅल किया जा सकता है। यह हर जगह उपयोगी साबित होते हैं चाहे आप सहारा मरुस्थल में ही क्यों न हों। कहा तो यह भी जाता है कि यह पानी के अंदर भी आसानी से सिग्नल प्राप्त कर सकने में समर्थ होते हैं। सेटेलाइट फोन बस थोड़ा स्लो होते हैं (हमारे मोबाइल फोन के मुकाबले) यानी बातचीत के दौरान इसमें थोड़ी सी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके द्वारा भेजे गए सिग्लन को सेटेलाइट तक जाने और वहां से वापस लौट कर आने में ज्यादा समय लगता है।हालांकि यह कमी बहुत ही नगण्य है। यह ज्यादातर आपदाओं के समय हमे काफी सहायक सिद्ध होते जब हमारे सिस्टम बहुत हद तक ख़राब हो गये होते हैं। क्या हम सेटेलाइट फोन खरीद सकते हैं….. भारत में सैटेलाइट फोन खरीदने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं भारत ही नहीं हर देश में इसके लिए अलग…

आसमान से हवाई जहाज़ या रॉकेट जैसी दिखने वाली चीज, जो गुज़रने के बाद, सफ़ेद सी लकीर दिखती है, वो क्या होती है


 

क्या आपने कभी स्पष्ट नीले आकाश में एक हवाई जहाज या रॉकेट को उड़ते देखा है? रॉकेट के गुज़रने के बाद वो आसमान की बनी सफ़ेद लकीर को हम बचपन में तो बड़े आश्चर्य से देखते थे. कोई उसे रॉकेट का धुआं मानता था, तो कोई बर्फ़ की लकीर, क्योंकि यह आकाश में एक सफेद लकीर को पीछे छोड़ देता है। पर ​हम में से शायद अब भी कोई जानता हो कि वो असलियत में होती क्या है।तो आइये इसके बारे में जानते है।
जो सफेद लकीरें हैं वे वास्तव में कृत्रिम बादल हैं। वे कांट्रेल्ज़ (contrails) कहलाते हैं, जो “ कॉंडेन्सेशन ट्रेल (condensation trail)" वाक्यांश का एक छोटा संस्करण है। हवाई जहाज के इंजन धुएं का उत्पादन करते हैं, जैसे कार इंजन करते हैं। जब गर्म धुआँ एक विमान से निकलता हैं तब धुएं में जल वाष्प, हवा से टकराती है। 26,000 फीट या उससे अधिक की ऊंचाई पर, हवा बेहद ठंडी होती है (कभी-कभी -40 ° F से भी अधिक!)। ठंडी हवा जल वाष्प को संघनित (Condensed) करती है।
इसका मतलब यह है कि जल वाष्प गैसें छोटी पानी की बूंदों में बदल जाती हैं या यहां तक ​​कि अंत में वाष्पीकरण से पहले छोटे बर्फ के क्रिस्टल में जम जाती हैं। यह संघनित जल वाष्प और बर्फ के क्रिस्टल के मिश्रण से आकाश में आपके द्वारा देखे जाने वाले बादल जैसे निशान बन जाते हैं।
कांट्रेल्ज़ (Contrails) तेज़ हवा की वजह से अपनी जगह से खिसक भी जाती है, ज़रूरी नहीं है कि वो वहीं दिखे जहां से जहाज़ गुज़रा था.

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