दुनिया की सबसे महंगी सब्जी | World Most Expensive Vegetable

दुनिया में कई तरह की सब्जियां हैं कुछ सब्जियां जो हम नॉर्मल लाइफ में रोजाना खाते हैं। लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी हैं। जिसके दाम के बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे दुनिया की सबसे महंगी सब्जी के बारे में। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
हॉप शूट्स।आपको बता दें की ये सब्जी दुनिया की सबसे महंगी सब्जी हैं। आमतौर पर यह सब्जी 1000 यूरो प्रति किलो बिकती है यानी भारतीय रुपये में कहें तो इसकी कीमत 80 हजार रुपये किलो के आसपास है। इसे खरीद पाना नॉर्मल इंसान के बस में नहीं हैं।आपको बता दें की इस हॉप का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर भी किया जाता है। सदियों से इसका इस्तेमाल दांत के दर्द को दूर करने से लेकर टीबी के इलाज तक में होता रहा है। हॉप में ऐंटीबायॉटिक की प्रॉपर्टी पाई जाती है जो इंसान के हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इससे शरीर की कई बीमारियां दूर हो जाती हैं और इंसान खुद को सेहतमंद महसूस करता हैं।यह सदाबहार सब्जी है जो साल भर उगाई जा सकती है। लेकिन ठंडी के मौसम को इसके लिए ठीक नहीं माना जाता है। मार्च से लेकर जून तक इसकी खेती के लिए आदर्श समय मान…

कैलाश पर्वत के शिखर पर चढ़ने में कोई पर्वतारोही सफल क्यों नहीं हो पाया? उनकी असफलता का कारण क्या है? What is the reason for failure mount Kailash climbing




सोचने वाली बात है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 4000 से ज्यादा लोग फतेह कर चुके है जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है लेकिन कैलाश पर्वत को आज तक किसी ने भी फतेह नही किया जिसकी ऊंचाई सिर्फ 6638 मीटर है। ज्यादातर लोग इसको आध्यात्मिक कारणों से जोड़ते है।
लगभग सभी, कैलाश पर्वत के पास के देशों में इसके लिए धार्मिक कारण माने गए है। जैसे कि -
हिन्दू धर्म - इस धर्म के ज्यादातर लोग मानते है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते है औऱ इसीलिए कोई जीवित इंसान वहाँ ऊपर नही पहुँच सकता। मरने के बाद अथवा वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतेह करेगा।
जैन धर्म - इस धर्म के लोगो का मानना है कि आदिनाथ जी को मोक्ष की प्राप्ति कैलाश पर हुई थी इसीलिए उनके जितना ही कोई काबिल वहां पहुँच सकता है।
बुद्ध धर्म - इस धर्म के लोग कैलाश पर्वत को भगवान बुद्ध का निवास मानते है।
तिब्बत - तिब्बत के लोग इसे ऐतिहासिक धार्मिक कहानियों से जोड़ते हैंं। इन कहानियों में कैलाश न फतेह होने की कहानी शामिल है।
इस तरह इन धर्मो ने ईश्वरीय शक्ति को इसका कारण मान लिया है। जो लोगोंं को पर्वत की चोटी पर पहुचने से रोकतीं है। इसी कारण से चीन ने भी कैलाश की चढ़ाई पर अब प्रतिबंध लगा दिया है।
जानने वाली बात यह कि ऐसे बहुत से जाने माने पर्वतारोही है जिन्होंने उसे चढ़ने की कोशिश की औऱ आधी ही दूरी से उनका वापिस लौटने का मन करने लगा।
वैज्ञानिक या मनोवैज्ञानिक कारण - अगर कोई मुझसे इसका कारण पूछेगा तो मुझे लगता है इसका कारण पूरी तरह मनोविज्ञानिक है। लोग फतेह नहींं कर पाते क्योंंकि उनको इन कहानियों के बारे में पहले से पता होता है। जैसे कि जब कोई एवेरेस्ट की चढ़ाई करता है तो उन्हें पता होता है कि जब इतने सारे लोगोंं ने कर दिया तो मैं क्यों नहींं कर सकता इसीलिए बुरी परिस्थितियों में भी वह हिम्मत एकत्रित करते हैंं। वही कैलाश में उनके अंदर भय पहले से ही रहता है कि अगर मैं ऊपर पहुंंच गया तो क्या सच में ईश्वर मुझे इसका दंड देंगे।
उदाहरण के लिए इटालियन पर्वतारोही Reinhold Messner जिन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन पर्वतारोहियों में से एक माना जाता है। इन्होंने बिना ऑक्सिजन के एवेरेस्ट फतेह किया था और 8000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई के सारे पर्वत फतेह किये है। इसीलिए चीन ने इनको कैलाश चढ़ने की अनुमति दी लेकिन जब उन्होंने ये कहानियों को जाना तो तुरंत मना कर दिया।
इसके अलावा कैलाश पर्वत का स्लोप (कोण) भी 65 डिग्री से ज्यादा है। जबकि एवेरेस्ट में यह 40 - 60 तक है जो इसकी चढ़ाई और मुश्किल बनाता है।
कारण धार्मिक हो या मनोवैज्ञानिक लेकिन इस कारण कैलाश पर चढ़ने की हिम्मत कोई भी नहींं करेगा।

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