भारतीय महिलाओं के बारे में ऐसे क्या अजीब तथ्य ! What strange facts about Indian women

भारतीय महिलाओं के बारे में ऐसे क्या अजीब तथ्य मनोज लालवानी (Manoj Lalwani),   औरतें प्रेम करने के लिए बनी हैं, समझने के लिए नहीं। – ऑस्कर वाइल्ड - औरतों की रहस्यताओं पर विराम लगाता हुआ यह कथन काफ़ी हद तक सही प्रतीत होता है। औरत से प्रेम करो आपको उनको समझने की ज़रूरत ही ख़त्म हो जाएगी। समझ के करना क्या है? क्यूँ जटिलता बढ़ाएँ? प्रेम करो बदले में प्रेम पाओ। आदर दो, आदर पाओ। संक्षेप में दिल लगाओ, दिमाग़ मत लगाओ। जीवन को आसान बनाओ। पर चूँकि दुनिया है, लोग हैं, सोचें हैं, भिन्नता है तो जीवन इतना आसान भी नहीं जान पड़ता है। हर व्यक्ति की भिन्न भिन्न विचारधारा है। औरत के व्यक्तित्व की जटिलताओं के बारे में इतना ज़्यादा लिखा गया है कि वो ब्रह्माण्ड का सफ़र पूरा कर के आने जैसा है। औरत का व्यक्तिव वो जहाँ निवास करती हैं उस देश व काल के अनुसार परिभाषित होता है। भारतीय महिलाएँ भी भिन्न नहीं है उनकी भी कुछ व्यक्तिपरक विशेषताएँ हैं। आइए उनके व्यक्तित्व के पहलुओं पर तथ्यपरक नज़र डालते हैं। इनमें कुछ तथ्य देसी हैं तो कुछ तथ्य सार्वभौमिक। कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, सफ़र लम्बा व उतार चढ़ाव वाला है। दुनियादा…

अगर चंद्रमा पर परमाणु विस्फोट किया जाए तो क्या होगा ! What Happens If a Nuclear Explosion On The Moon




वास्तव में 1950 के दशक में यू. एस. एयरफोर्स ने चांँद पे एक परमाणु परीक्षण करने के बारे में विचार किया था। हालाँकि ,प्रोजेक्ट ए119 के नाम से जाने वाले इस एकमात्र परीक्षण से चंद्रमा पे थोड़ा ही असर पड़ता।

सी.एन.एन. के एक इंटरव्यु में जब लियोनार्ड रिफेल जो कि ,इस प्रोजेक्ट में एक वैग्यानिक थे, से पूछा गया कि क्या हम चंद्रमा को कोई नुकसान पहुँचाने में अथवा, उसकी कक्षा से बाहर ढ़केलने में सक्षम हैं तो उनका जवाब था कि ,दरअसल हमारे पास, इतने परमाणु हथियार हैं ही नहीं। चाँद को उसकी कक्षा से ढकेलने के लिये ,लगभग 100 खरब मेगाटन अौर, कुछ गंभीर नुकसान पहुँचाने के लिये लगभग 10 अरब टी.एन.टी. की जरूरत पड़ेगी।
सत्तर के दशक में एक टेलीविजन शो स्पेस: 1999 (Space: 1999) इसी तरह की कहानी पे बना था जिसमें एक परमाणु दुर्घटना की वजह से चाँद अपनी कक्षा से निकल के अंतरिक्ष में चला जाता है। बेशक यह बस एक शो में ही हो सकता है , वास्तविकता में नहीं।
हमें चाँद की रेडियो-सक्रियता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। यह कॉस्मिक किरणों और सूर्य की विकिरणों के लिये खुला हुआ है और पृथ्वी के वायुमंडल की तरह इसके पास कोई सुरक्षा कवच भी नहीं है। नासा ने 2009 में ल्यूनर रिकॉनसेंस अॉर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) भेजा था और इसका एक काम चाँद के वातावरण में विकिरण के बारे में तथ्य जुटाना था। इसकी कम ही संभावना है कि परमाणु विस्फोट करने से विकिरण स्तर पे कुछ ज्यादा असर पड़ेगा।
इमानदारी से कहूँ तो यह ऊँट के मुँह में जीरा समान होगा।

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