भारत के कुछ अजीबोगरीब कानून ! Some Unknown Laws of India

अंग्रेजों ने अपने शासन काल के दौरान बहुत से सख्त कानून बनाये थे ताकि इन कानूनों का सहारा लेकर भारतीयों को मानशिक रूप से गुलाम बनाया जा सके | इस लेख में हमने ऐसे ही कुछ कानूनों के बारे में बताया है जो कि या तो वर्तमान में प्रासंगिक नही हैं या फिर भारत सरकार ने उन्हें बदल दिया है परन्तु कुछ कानून तो आज भी अपने पुराने रूप में मौजूद हैं| 1. भारतीय दण्ड संहिता की धारा, 309: इस कानून के अनुसार यदि आप आत्महत्या करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित कर लें कि आप अपने प्रयास में सफल हो जायें, नहीं तो जिन्दा बचने पर आपको परेशानी झेलनी पड़ सकती है क्योंकि भारत में आत्महत्या का प्रयास क़ानूनी रूप से अवैध है और यदि आप ऐसा करने में विफल हो जाते हैं तो आपको जेल भी जाना पड़ सकता है। भारतीय कानून यह मानता है कि आपके शरीर पर सिर्फ आपका ही हक़ नही है बल्कि आपकी माँ, पिता, बहिन और भाई इत्यादि का भी उतना ही हक़ है जितना कि आपका | 2. भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898: इस अधिनियम का कहना है कि केवल भारत सरकार ही पत्र वितरित कर सकती थी इस प्रकार भारत में सभी प्रकार की कूरियर कंपनियों का बिज़नेस गैर कान…

अगर चंद्रमा पर परमाणु विस्फोट किया जाए तो क्या होगा ! What Happens If a Nuclear Explosion On The Moon




वास्तव में 1950 के दशक में यू. एस. एयरफोर्स ने चांँद पे एक परमाणु परीक्षण करने के बारे में विचार किया था। हालाँकि ,प्रोजेक्ट ए119 के नाम से जाने वाले इस एकमात्र परीक्षण से चंद्रमा पे थोड़ा ही असर पड़ता।

सी.एन.एन. के एक इंटरव्यु में जब लियोनार्ड रिफेल जो कि ,इस प्रोजेक्ट में एक वैग्यानिक थे, से पूछा गया कि क्या हम चंद्रमा को कोई नुकसान पहुँचाने में अथवा, उसकी कक्षा से बाहर ढ़केलने में सक्षम हैं तो उनका जवाब था कि ,दरअसल हमारे पास, इतने परमाणु हथियार हैं ही नहीं। चाँद को उसकी कक्षा से ढकेलने के लिये ,लगभग 100 खरब मेगाटन अौर, कुछ गंभीर नुकसान पहुँचाने के लिये लगभग 10 अरब टी.एन.टी. की जरूरत पड़ेगी।
सत्तर के दशक में एक टेलीविजन शो स्पेस: 1999 (Space: 1999) इसी तरह की कहानी पे बना था जिसमें एक परमाणु दुर्घटना की वजह से चाँद अपनी कक्षा से निकल के अंतरिक्ष में चला जाता है। बेशक यह बस एक शो में ही हो सकता है , वास्तविकता में नहीं।
हमें चाँद की रेडियो-सक्रियता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। यह कॉस्मिक किरणों और सूर्य की विकिरणों के लिये खुला हुआ है और पृथ्वी के वायुमंडल की तरह इसके पास कोई सुरक्षा कवच भी नहीं है। नासा ने 2009 में ल्यूनर रिकॉनसेंस अॉर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) भेजा था और इसका एक काम चाँद के वातावरण में विकिरण के बारे में तथ्य जुटाना था। इसकी कम ही संभावना है कि परमाणु विस्फोट करने से विकिरण स्तर पे कुछ ज्यादा असर पड़ेगा।
इमानदारी से कहूँ तो यह ऊँट के मुँह में जीरा समान होगा।

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