दुनिया की सबसे महंगी सब्जी | World Most Expensive Vegetable

दुनिया में कई तरह की सब्जियां हैं कुछ सब्जियां जो हम नॉर्मल लाइफ में रोजाना खाते हैं। लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी हैं। जिसके दाम के बारे में सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे दुनिया की सबसे महंगी सब्जी के बारे में। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
हॉप शूट्स।आपको बता दें की ये सब्जी दुनिया की सबसे महंगी सब्जी हैं। आमतौर पर यह सब्जी 1000 यूरो प्रति किलो बिकती है यानी भारतीय रुपये में कहें तो इसकी कीमत 80 हजार रुपये किलो के आसपास है। इसे खरीद पाना नॉर्मल इंसान के बस में नहीं हैं।आपको बता दें की इस हॉप का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर भी किया जाता है। सदियों से इसका इस्तेमाल दांत के दर्द को दूर करने से लेकर टीबी के इलाज तक में होता रहा है। हॉप में ऐंटीबायॉटिक की प्रॉपर्टी पाई जाती है जो इंसान के हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इससे शरीर की कई बीमारियां दूर हो जाती हैं और इंसान खुद को सेहतमंद महसूस करता हैं।यह सदाबहार सब्जी है जो साल भर उगाई जा सकती है। लेकिन ठंडी के मौसम को इसके लिए ठीक नहीं माना जाता है। मार्च से लेकर जून तक इसकी खेती के लिए आदर्श समय मान…

इतिहास में सबसे रोचक युद्ध कौन सा रहा है और क्यों













इतिहास का वो सबसे छोटा और रोचक युद्ध, जो महज 38 मिनट में ही समाप्त हो गया था।

युद्ध:- ये शब्द सुनते ही आंखों के सामने भयानक मंजर छा जाता है,हमारे इतिहास में कई युद्ध हुए है जिनकी आज भी चर्चा होती है। इन्हीं में एक इंग्लैंड और जांजीबर के बीच लड़ा गया युद्ध भी है जिसे इतिहास का सबसे छोटा और रोचक युद्ध भी कहा जाता है।

क्यों और कैसे हुई युद्ध की शुरुआत ?

कहा जाता है कि 1890 में जांजीबार को लेकर ब्रिटेन और जर्मनी के बीच संधि पर हस्ताक्षर किए गए जिसके अनुसार ब्रिटेन पूर्वी अफ्रीका में अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था और यही वजह थी जिसके कारण उसे जांजीबर की सत्ता सौंप दी गई तथा तंजानिया का भूभाग जर्मनी के पास चला गया।

1893 में जांजीबर की देखभाल का जिम्मा हमद बिन तुवानी को सौंपा गया और करीब तीन साल उन्होंने काफी शांतिपूर्ण तरीके से वहां शासन किया। 25 अगस्त 1896 को तुवानी की मौत हो गई और इसके कुछ ही समय बाद तुवानी के भतीजे खालिद बिन बर्गश ने खुद को जांजीबार का सुल्तान घोषित कर दिया। ऐसा माना जाता है कि सत्ता के लोभ में आ कर खालिद ने तुवानी को जहर दे दिया था।

खालिद के सुल्तान बनने से ब्रिटिश अधिकारी बिल्कुल भी खुश नहीं थे, जिस वजह से चीफ डिप्लोमेट बेसिल केव ने खालिद को पद से हटने को कहा पर खालिद ने चीफ का आदेश मानने की बजाय करीब 3000 सैनिकों को हथियार के साथ महल की सुरक्षा में खड़ा कर दिया । केव ने शांतिपूर्वक तरीके से मसले को सुलझाने की बहुत कोशिश की लेकिन खालिद किसी भी कीमत पर सुल्तान की गद्दी छोड़ने को तैयार न था। दूसरी ओर केव को ब्रिटिश सरकार की ओर से साम, दाम,दंड,भेद से जंग जीतने का आदेश मिल चुका था।

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