महिलाएं पुरुषों के किन अंगों को देखकर आकर्षित होती हैं ! Which parts of men are attracted by women?

मनोज लालवानी (Manoj Lalwani),


बात महिलाओं की पसन्द की है तो बहुत सारे विकल्प होने ज़रूरी हो जाते हैं। क्योंकि चुनने के लिए कम विकल्प होने से अधिकांश महिलाएँ तनाव में आ जाती हैं। यह विकल्प, सौभाग्यवश, बहुतेरे और सशरीर मौजूद हैं। अगर पुरुष के अंगों का ज़िक्र होगा तो उनका शरीर अपने आप आएगा। सबसे पहले बात करते हैं पुरुष शरीर की। मगर उस से पहले बात करनी पड़ेगी महिला की चाह की। क्योंकि महिला की चाह पुरुष का विशेष अंग नहीं होता, बल्कि उनका अंग प्रत्यंग होता है। और सिर्फ़ अंग प्रत्यंग ही नहीं, उसके साथ ना जाने कितने और रंग ज़रूरी हैं। तो बात करते हैं पुरुषों के इन्हीं अंग-प्रत्यंग, रंग-ढंग की महिलायें, पुरुष की उस चीज़ की तरफ़ सबसे ज़्यादा खिंचाव महसूस करती हैं, जिस चीज़ की वो ख़ुद में कमी पाती हैं। वैसे यह सिद्धान्त हम सभी पर लागू होता है “हम उसी और खिंचे चले जाते हैं, जिस की हम ख़ुद के जीवन में कमी पाते हैं।” चूँकि बात यहाँ महिलाओं की है तो हम उन्ही की बात करते हैं। सबसे पहली कमी जो लगभग हर महिला को पुरुष की तुलना में खलती है। वो है “क़द” महिलाएँ ख़ुद से लम्बे पुरुषों की तरफ़ आकर्षित होती ह…

जब वास्को डा गामा भारत पहुंचे, तो उन्होंने उस स्थान के भारतीयों से संवाद कैसे किया


 
 

वास्को दा गामा समुद्र मार्ग के माध्यम से भारत आने वाले पहले यूरोपीय मुसाफिर नहीं थे। वह १४९८ में कालीकट में उतरे। जैसा कि हमारे स्कूल के इतिहास की किताबें हमें सिखाती हैं कि 'वास्को दा गामा ने भारत की खोज की'। यह बिल्कुल गलत बयान है, 'खोज' यह शब्द का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। 'खोज' का शब्दकोश अर्थ है - पहली बार कुछ ढूंढना या सीखना।
तो इसका मतलब यह है कि भारत वास्को दा गामा से पहले यूरोपीय लोगों के लिए अनजान था? नहीं!

यूरोपियन लोगों को आम युग (ईसापूर्व) से पहले भी भारतीय उप-महाद्वीप के बारे में जानकारी थी। वे यह जानकारी उन्हें मध्य पूर्वी लोगों से प्राप्त हुई।
लेकिन ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, थॉमस द एपोस्टल और बार्थोलोम्यू द एपोस्टल यूरोप के समुद्र मार्ग के माध्यम से यात्रा करने वाले पहले यूरोपीय थे।
(प्रेषित थॉमस ५० ईसा पश्चात)
ये यूरोपीय लोग लाल सागर और अरब सागर से गुजरते हुए, जो केरल के तटों में ५० ईसा पश्चात में उतरे। यहां भी इन लोगों को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा।
क्योंकि, उन्होंने भारतीयों के साथ संवाद करने के लिए फारसी व्यापारियों को काम पर रखा।

जानना चाहते हैं क्यों?
भारत मध्य पूर्वी साम्राज्यों के साथ व्यापार संबंधों के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था, इसलिए फारसी और अरबी व्यापारियों ने भारतीय भाषाओं के साथ अच्छी तरह से परिचित थे। तो यूरोप भी मध्य पूर्वी साम्राज्यों से व्यापार संबंधों के माध्यम से जुड़ा हुआ था, इसलिए मध्य पूर्वी लोगों को भारतीय और यूरोपीय भाषाएं पता थी।
इसलिए, भारत आने वाले यूरोपीय यात्रियों को कभी भी संचार में किसी भी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। इसके अलावा, वास्को दा गामा को स्थानीय लोगों के साथ संवाद करने में किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। भारत जाने से पहले, उन्होंने पहले ही तटीय भारत के नक्शे और पहले यात्रियों की रिपोर्ट से भाषाओं के बारे में अध्ययन किया था। उनसे पहले कई ईसाई मिशनरी भारत गए और कई संस्थानों और चर्चों की स्थापना की। उन्होंने भारतीय भाषाओं को सीखा और ईसाई धर्म का प्रचार किया।
तो वास्को दा गामा या किसी अन्य यूरोपीय यात्री को कभी भी मूल भारतीय निवासी के साथ संवाद करने में कोई समस्या नहीं आई थी ।

Comments