Untold Facts Of Isreal In Hindi ! इजराइल से जुड़े रोचक तथ्य

अंकित (Ankit)इये आपको इजराइल (Israel) से जुड़े रोचक तथ्य बताते है इजराइल (Israel) में हर घर से एक व्यक्ति को सेना में शामिल होना अनिवार्य है फिर चाहे वो लड़की हो या लड़का |इजराइल दुनिया का एकमात्र देश है जो पुरी तरह से Anti Ballistic Missile Defense system से लैस है |इजराइल (Israel) का पास खुद का Defense System है ख़ास बात यह है कि इजराइल अपने सॅटॅलाइट किसी भी देश से सांझा नही करता है |कई मुस्लिम देश इसके दुश्मन है इसकी वजह से इजराइल अब तक 7 बड़े युद्ध लड़ चूका है और हर बार जीता |यहाँ की करीब 90 फ़ीसदी आबादी Solar Energy का ही प्रयोग करती है |दुनिया में कही भी कोई यहूदी रहता है तो वह इजराइल का ही नागरिक माना जाता है |इजरायली नोटों में ब्रेल लिपि का इस्तेमाल किया जाता है |दुनिया का सबसे पहला एंटी वायरस इजराइल (Israel) में ही बनाया गया था |वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टाइन को इजरायल का राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया था लेकिन उन्होंने शिष्टतापूर्वक मना कर दिया |कृषि उत्पादों के मामले में इजराइल पुरी तरह आत्मनिर्भर है |पिछले 25 सालो में यहाँ कृषि उत्पादन में 7 गुणा बढ़ोतरी हुयी है |न्य…

जब वास्को डा गामा भारत पहुंचे, तो उन्होंने उस स्थान के भारतीयों से संवाद कैसे किया


 
 

वास्को दा गामा समुद्र मार्ग के माध्यम से भारत आने वाले पहले यूरोपीय मुसाफिर नहीं थे। वह १४९८ में कालीकट में उतरे। जैसा कि हमारे स्कूल के इतिहास की किताबें हमें सिखाती हैं कि 'वास्को दा गामा ने भारत की खोज की'। यह बिल्कुल गलत बयान है, 'खोज' यह शब्द का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। 'खोज' का शब्दकोश अर्थ है - पहली बार कुछ ढूंढना या सीखना।
तो इसका मतलब यह है कि भारत वास्को दा गामा से पहले यूरोपीय लोगों के लिए अनजान था? नहीं!

यूरोपियन लोगों को आम युग (ईसापूर्व) से पहले भी भारतीय उप-महाद्वीप के बारे में जानकारी थी। वे यह जानकारी उन्हें मध्य पूर्वी लोगों से प्राप्त हुई।
लेकिन ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, थॉमस द एपोस्टल और बार्थोलोम्यू द एपोस्टल यूरोप के समुद्र मार्ग के माध्यम से यात्रा करने वाले पहले यूरोपीय थे।
(प्रेषित थॉमस ५० ईसा पश्चात)
ये यूरोपीय लोग लाल सागर और अरब सागर से गुजरते हुए, जो केरल के तटों में ५० ईसा पश्चात में उतरे। यहां भी इन लोगों को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा।
क्योंकि, उन्होंने भारतीयों के साथ संवाद करने के लिए फारसी व्यापारियों को काम पर रखा।

जानना चाहते हैं क्यों?
भारत मध्य पूर्वी साम्राज्यों के साथ व्यापार संबंधों के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था, इसलिए फारसी और अरबी व्यापारियों ने भारतीय भाषाओं के साथ अच्छी तरह से परिचित थे। तो यूरोप भी मध्य पूर्वी साम्राज्यों से व्यापार संबंधों के माध्यम से जुड़ा हुआ था, इसलिए मध्य पूर्वी लोगों को भारतीय और यूरोपीय भाषाएं पता थी।
इसलिए, भारत आने वाले यूरोपीय यात्रियों को कभी भी संचार में किसी भी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। इसके अलावा, वास्को दा गामा को स्थानीय लोगों के साथ संवाद करने में किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। भारत जाने से पहले, उन्होंने पहले ही तटीय भारत के नक्शे और पहले यात्रियों की रिपोर्ट से भाषाओं के बारे में अध्ययन किया था। उनसे पहले कई ईसाई मिशनरी भारत गए और कई संस्थानों और चर्चों की स्थापना की। उन्होंने भारतीय भाषाओं को सीखा और ईसाई धर्म का प्रचार किया।
तो वास्को दा गामा या किसी अन्य यूरोपीय यात्री को कभी भी मूल भारतीय निवासी के साथ संवाद करने में कोई समस्या नहीं आई थी ।

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