दुनिया के अलग अलग हिस्सो में शादी के अजीब नियम ! Strange rules of marriage in different parts of the world

दुनिया के अलग अलग हिस्सो में शादी के अजीब नियम कौन से हैं?


मंगोलिया मे शादी करने से पहले युवा जोड़े एक साथ एक चाकू पकड़ कर एक चिकन (मुर्गी के बच्चा) को मरते हैं। इसके बाद उस मारे चिकन के शरीर से लीवर को खोज कर निकालना होता हैं। अगर लीवर स्वस्थ हैं तो युवा अपनी शादी का दिन खुद निर्धारित करेंगे अन्यथा उन्हे फिर से चिकन को मारना होगा। भारत मे कई जगह मान्यता हैं की जब कोई लड़की मांगलिक होती हैं तो जिस व्यक्ति के साथ उसकी शादी होगी वह जल्दी मर जाएगा। इस लिए उस मांगलिक लड़की की शादी एक पेढ के साथ कर दी जाती हैं और फिर उस पेड को काट दिया जाता हैं। इसके बाद माना जाता हैं की लड़की का मांगलिक दोष समाप्त हो गया हैं। चाइना मे शादी के एक महिना पहले से दुल्हन रोज एक घंटे के लिए रोटी हैं फिर दस दिन बाद दुल्हन की माँ दुल्हन के साथ एक घाटे के लिए रोटी हैं उसके दस दिन बाद दुल्हन की दादी भी रोना प्रारम्भ कर देती हैं। और शादी के दिन घर की सभी महिलाए रोना प्रारम्भ कर देती हैं। दक्षिणी सुडान मे पति पत्नी की सदी जब तक मान्य नहीं होती हैं जब तक पत्नी दो बच्चो को जन्म न दे दे। अगर पत्नी दो बच्चो…

Russia Refused To Join China Conspiracy to Defame India Doklam Issue


डोकलाम विवाद: चीन की भारत को बदनाम करने की साजिश में शामिल नहीं हुआ रूस

भारत और चीन के बीच लगभग ढाई महीने चला डोकलाम विवाद अब खत्‍म हो गया है। इस दौरान चीन ने भारत को डराने, थमकाने और बदनाम करने के लिए कई हथकंडे अपनाए। चीन ने भारत को बदनाम करने की साजिश में रूस को भी अपने साथ मिलाना चाहा, लेकिन वो सफल नहीं हो सका। भारत और रूस के पुराने रिश्‍तों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका इसमें अहम रही।
दरअसल, रूस की डोकलाम मुद्दे पर असंजस की स्थिति रही होगी। लेकिन मॉस्को के रुख का भारत-रूस रिश्तों पर असर पड़ना स्‍वाभाविक था। इससे ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी प्रभावित होती। चीन के तटवर्ती शहर जियामेन में रविवार को ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के लीडर्स सम्मेलन में शिरकत करेंगे।
टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, डोकलाम विवाद पर रूस का रुख पेइचिंग में उसके राजदूत एंद्रे जिनिसोव के बयान से ही साफ हो गया, जब उन्‍होंने कहा, 'भारत-चीन सीमा पर जो हालात हैं, उससे हमसब दुखी हैं।' राजदूत का यह बयान 28 अगस्त को डोकलाम विवाद भारत-चीन समझौते के ऐलान से कुछ घंटों पहले ही आया था। इसके बाद से ही दोनों ने अपने-अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया था।
उधर रूस की मीडिया में भी एंद्रे का बयान आया, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि हमारे चीनी और भारतीय मित्र खुद ही इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। हमें नहीं लगता कि उन्हें किसी मध्यस्थ की जरूरत है। इससे साफ हो गया कि डोकलाम मुद्दे पर रूस तटस्थ रहते हुए चीन की चालबाजी में शामिल नहीं होना चाहता।
अमेरिका भी रहना चाहता था विवाद से बाहर
द हेरिटेज फाउंडेशन में दक्षिण एशिया पर रीसर्च फेलो और साउथ एशिया नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (व्हाइट हाउस) के नवनियुक्त निदेशक जेफ स्मिथ ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि डोकलाम संकट की वजह से ट्रम्प प्रशासन की स्थिति बेहद असहज हो गई थी। यह वो विवाद था जिसमें वह बिलकुल नहीं पड़ना चाहते थे। हालांकि स्मिथ ने यह स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वास्तव में ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले पर आपस में आतंरिक स्तर पर क्या चर्चा की।

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