दुनिया में कुछ अजीब पेशे/रोजगार ! Some strange profession / jobs in this world

इस दुनिया में कुछ अजीब पेशे/रोजगार क्या हैं? नग्न मॉडल- इनका काम होता है की वे अपने वस्त्र उतारकर नग्न अवस्था में कला के छात्रो के सामने बैठ जाए। मराठी फिल्म "न्यूड" एकभारतीय नग्न मॉडल के सामने आने वाली समस्याओं पर आधारित है। पेशेवर पुशर (Professional Pusher)- इनका काम सभी लोगों को ट्रेन में धकेलना होता है, ताकि किसी की भी ट्रैन न छूटे। इस तरह की नौकरी टोक्यो, जापान में बहुत आम है। किराये का बॉयफ्रेंड- टोक्यो में किराये के बॉयफ्रेंड भी मिलते है। उलटी क्लीनर (Vomit cleaner)- रोलर कोस्टर राइड में कई लोगो को उल्टी आ जाती है इसलिए मनोरंजनकारी उद्यान (Amusement parks) के मालिक उल्टी साफ़ करने के लिए कुछ लोगो को रखते है। डिओडोरेंट टेस्टर (Deodorant tester)- डिओडरंट कंपनिया ऐसे लोगो को नौकरी पर रखती है जिनका काम यह चेक करना होता है की डिओडरंट कितना असरदार है, डिओडरंट लगाने से शरीर की गंध जाती है या नहीं। वाटर स्लाइड परीक्षक- इनका काम होता है की वह चेक करकर ये बताये की वाटर स्लाइड सुरक्षित है या या नहीं। <

Russia Refused To Join China Conspiracy to Defame India Doklam Issue


डोकलाम विवाद: चीन की भारत को बदनाम करने की साजिश में शामिल नहीं हुआ रूस

भारत और चीन के बीच लगभग ढाई महीने चला डोकलाम विवाद अब खत्‍म हो गया है। इस दौरान चीन ने भारत को डराने, थमकाने और बदनाम करने के लिए कई हथकंडे अपनाए। चीन ने भारत को बदनाम करने की साजिश में रूस को भी अपने साथ मिलाना चाहा, लेकिन वो सफल नहीं हो सका। भारत और रूस के पुराने रिश्‍तों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका इसमें अहम रही।
दरअसल, रूस की डोकलाम मुद्दे पर असंजस की स्थिति रही होगी। लेकिन मॉस्को के रुख का भारत-रूस रिश्तों पर असर पड़ना स्‍वाभाविक था। इससे ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी प्रभावित होती। चीन के तटवर्ती शहर जियामेन में रविवार को ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के लीडर्स सम्मेलन में शिरकत करेंगे।
टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, डोकलाम विवाद पर रूस का रुख पेइचिंग में उसके राजदूत एंद्रे जिनिसोव के बयान से ही साफ हो गया, जब उन्‍होंने कहा, 'भारत-चीन सीमा पर जो हालात हैं, उससे हमसब दुखी हैं।' राजदूत का यह बयान 28 अगस्त को डोकलाम विवाद भारत-चीन समझौते के ऐलान से कुछ घंटों पहले ही आया था। इसके बाद से ही दोनों ने अपने-अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया था।
उधर रूस की मीडिया में भी एंद्रे का बयान आया, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि हमारे चीनी और भारतीय मित्र खुद ही इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। हमें नहीं लगता कि उन्हें किसी मध्यस्थ की जरूरत है। इससे साफ हो गया कि डोकलाम मुद्दे पर रूस तटस्थ रहते हुए चीन की चालबाजी में शामिल नहीं होना चाहता।
अमेरिका भी रहना चाहता था विवाद से बाहर
द हेरिटेज फाउंडेशन में दक्षिण एशिया पर रीसर्च फेलो और साउथ एशिया नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (व्हाइट हाउस) के नवनियुक्त निदेशक जेफ स्मिथ ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि डोकलाम संकट की वजह से ट्रम्प प्रशासन की स्थिति बेहद असहज हो गई थी। यह वो विवाद था जिसमें वह बिलकुल नहीं पड़ना चाहते थे। हालांकि स्मिथ ने यह स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वास्तव में ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले पर आपस में आतंरिक स्तर पर क्या चर्चा की।

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