भारतीय रेल का सबसे 10 अच्छा स्टेशन ! Top 10 Best Stations of Indian Railways

भारतीय रेल के पास 66,687 किमी का रनिंग ट्रैक है जिसमे कारण यह विश्व की चौथी सबसे बड़ी रेलवे कहलाती है। भारतीय रेलवे के कुछ रेलवे स्टेशन अपने स्थापत्य और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाने जाते हैं। आइये बात करते हैं,ऐसे ही खूबसूरत स्टेशनों के बारे में 

1-विजयवाडा रेलवे स्टेशन ,आंध्रप्रदेश  (Vijayawada Junction)- में सन् 1888 में बना ये रेलवे स्टेशन साउथ इंडिया के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है। इसे  2007 में A1 स्टेशन का दर्जा दिया गया है।

2-चार बाग रेलवे स्टेशन ,लखनऊ,यूपी-शायद (Charbagh Railway Station)ये भारतीय रेलवे का सबसे खूबसूरत रेलवे स्टेशन है । चारबाग असल में मुगल स्थापत्य की एक खासियत है,जिसमें चार बाग होते हैं। यह राजपूत,अवधी और मुगल स्थापत्य का नमूना है। इसकी सबसे खास बात इसका ऐरियल व्यू है,जिससे यह चेस के बोर्ड जैसा लगता है।


3-छत्रपति शिवाजी टर्मिनस , मुम्बई (Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus)- इस स्टेशन के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि इसे यूनेस्को ने विश्व हैरिटेज साइट के रूप में में मान्यता दी है। इसे 1887 में बनाया गया था, तब इसका नाम विक्टोरिया टर्मिनस था ,जो…

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महाभारत के अश्वत्थामा याद हैं आपको। कहा जाता है कि अश्वत्थामा का वजूद आज भी है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया। ऐसा कहा जाता है कि पिछले लगभग 5 हजार वर्षों से अश्वत्थामा भटक रहे हैं।



मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किमी दूर असीरगढ़ का किला है। कहा जाता है कि इस किले में स्थित शिव मंदिर में अश्वत्थामा आज भी पूजा करने आते हैं। स्थानीय निवासी अश्वत्थामा से जुड़ी कई कहानियां सुनाते हैं। वे बताते हैं कि अश्वत्थामा को जिसने भी देखा, उसकी मानसिक स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई। इसके अलावा कहा जाता है कि अश्वत्थामा पूजा से पहले किले में स्थित तालाब में नहाते भी हैं।



बुरहानपुर के अलावा मप्र के ही जबलपुर शहर के गौरीघाट (नर्मदा नदी) के किनारे भी अश्वत्थामा के भटकने का उल्लेख मिलता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कभी-कभी वे अपने मस्तक के घाव से बहते खून को रोकने के लिए हल्दी और तेल की मांग भी करते हैं। इस संबंध में हालांकि स्पष्ट और प्रामाणिक आज तक कुछ भी नहीं मिला है।                      

[13:05, 9/11/2017] +91 75010 15472: गुजरात के तट पर भगवान श्रीकृष्ण की बसाई हुई नगरी यानी द्वारिका। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। कहा जाता है कि कृष्ण की मृत्यु के साथ उनकी बसाई हुई यह नगरी समुद्र में डूब गई। आज भी यहां उस नगरी के अवशेष मौजूद हैं। लेकिन प्रमाण आज तक नहीं मिल सका कि यह क्या है। विज्ञान इसे महाभारतकालीन निर्माण नहीं मानता।



काफी समय से जाने-माने शोधकर्ताओं ने यहां पुराणों में वर्णित द्वारिका के रहस्य का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित कोई भी अध्ययन कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है। 2005 में द्वारिका के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने भी मदद की।



अभियान के दौरान समुद्र की गहराई में कटे-छंटे पत्थर मिले और यहां से लगभग 200 अन्य नमूने भी एकत्र किए, लेकिन आज तक यह तय नहीं हो पाया कि यह वही नगरी है अथवा नहीं जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था। आज भी यहां वैज्ञानिक स्कूबा डायविंग के जरिए समंदर की गहराइयों में कैद इस रहस्य को सुलझाने में लगे हैं।

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