कुछ रोचक तथ्य क्या हैं जो सुनने में तो एकदम बकवास लगते हैं परंतु सत्य हैं

ध्रुपद ओबेरॉय (Dhrupad Oberoi),
कुछ रोचक तथ्य जो अती सत्य है। 1. दुनिया में 11 प्रतिशत लोग बाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं। 2. दुनिया की 90 प्रतिशत जनसंख्या किस करती है। 3. खाने का स्वाद उसमें सलाइवा (लार) मिलने के बाद ही आता है। 4. औसतन लोग बिस्तर में जाने के 7 मिनिट में सो जाते हैं। 5. भालू के 42 दांत होते हैं। 6. शुतुरमुर्ग की आंख उसके दिमाग से बड़ी होती है। 7. नींबू में स्ट्राबेरी के मुकाबले अधिक शक्कर होती है। 8. आठ प्रतिशत लोगों में एक अतिरिक्त पसली होती है। 9. स्विट्जरलैंड में दुनिया में सबसे अधिक चॉकलेट खाई जाती है। यहां हर व्यक्ति एक साल में 10 किलो के औसत से चॉकलेट खाता है। 10. अगस्त में सबसे ज्यादा लोग पैदा होते हैं। 11. मिक्की माउस का इटली में नाम टोपोलिनो है। 12. एक केकड़े का खून रंगहीन होता है। ऑक्सीजन मिलने के बाद यह नीला हो जाता है। 13. पक्षियों को निगलने के लिए ग्रेविटी की जरूरत होती है। 14. अंग्रेजी अल्फाबेट का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला लेटर E है। 15. विश्व की दो सबसे अधिक कॉमन इस्तेमाल होने वाली भाषाएं मैंड्रियन चायनीज, स्पैनिश और अंग्रेजी है। 16. बिल्ली के हर…

ब्रिक्स में भारत की बड़ी कामयाबी, पीएम मोदी ने पाकिस्तान इस तरह दिया बड़ा झटका

 
ब्रिक्स में भारत की बड़ी कामयाबी, पीएम मोदी ने पाकिस्तान इस तरह दिया बड़ा झटका
 
 चीन में शुरू हुए नौंवे ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन के दौरान भारत को बड़ी कामयाबी मिली है और पीएम मोदी अपनी बात मनवाने में सफल रहे। ब्रिक्स घोषणापत्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर, हक्कानी नेटवर्क, जैश-ए-मोहम्मद द्वारा की जा रही हिंसा की निंदा की गई।
ब्रिक्स के इस घोषणापत्र से पाकिस्तान को झटका लग सकता है क्योंकि ये सारे आतंकी संगठन पाकिस्तान से ही संचालित होते हैं। यह घोषणापत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन कई बार जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर पर यूएन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने की दिशा में रोड़े अटका चुका है। 
घोषणा पत्र में  कहा गया है,  ''हम ब्रिक्स देशों समेत पूरी दुनिया में हुए आतंकी हमलों की निंदा करते हैं। हम हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा करते हैं, चाहे वो कहीं भी घटित हुआ हो। इनके पक्ष में कोई तर्क नहीं दिया जा सकता। हम इस क्षेत्र में तालिबान, आईएस, लश्कर-ए-तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान, हिज्ब-उत-ताहिरअल-कायदा द्वारा की जा रही हिंसा की निंदा करते हैं और इस क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित है।'
विदेश मंत्रालय की सचिव प्रीती सरन ने बताया कि आतंकवाद को लेकर इस बार केवल पीएम मोदी ने ही नहीं बल्कि सभी ब्रिक्स देशों ने जोर दिया। उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है कि आतंकी संगठनों के नामों का विशेष तौर पर जिक्र किया गया है। प्रीती सरन ने बताया, 'सिक्यॉरिटी काउंसिल और आईएमएफ के रिफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर दिया। पीएम मोदी ने ब्रिक्स लीडरशीप को महत्वपूर्ण बताया। इस बार ब्रिक्स सम्मेलन में पहली बार आतंकी संगठनों की सूची बनाई गई है। सभी ब्रिक्स देशों ने साथ मिलकर आतंकवाद का सामना करने की बात की।'
सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय मुलाकात भी हुई जिसमें कई मुद्दों पर चर्चा की गई। वार्ता के दौरान रूस और भारत के बीच पर्यटन के बढ़ावे को लेकर बात हुई। इससे पहले सम्मेलन में भारत का पक्ष रखते हुए करते हुए पीएम मोदी ने सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एकजुट रहने पर ही शांति और विकास संभव होगा। पीएम मोदी ने आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, ' ब्रिक्स के पांचों देश समान स्तर के हैं और शांति के लिए सभी देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। हमारा मिशन गरीबी को हटाना, स्वास्थ्य, सफाई, कौशल, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, शिक्षा सुनिश्चित करना है। हमने कालेधन के खिलाफ लड़ाई छेड़ी।  ब्रिक्स देश आईएसए के साथ मिलकर सोलर एनर्जी पर काम कर सकते हैं।'
वहीं चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सहभागिता के बिना बहुत सी वैश्विक चुनौतियों का हल सफलतापूर्वक नहीं संभव है। उन्होंने कहा कि जब विश्व में इतने बदलाव हो रहे हैं तो BRICS का सहयोग इस वक्त और महत्वपूर्ण बन गया है। चिनफिंग ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय मतभेदों के बावजूद ब्रिक्स के सभी 5 देश विकास के एक ही स्तर पर हैं। इस दौरान  पीएम मोदी के अलावा मेजबान राष्ट्राध्यक्ष ने सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकोब जुमा का भी  औपचारिक स्वागत किया

आपको बता दें कि रविवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन भाषण में चिनफिंग ने कहा था कि ब्रिक्स देशों को भू-राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने की प्रक्रिया में रचनात्मक हिस्सा लेकर उचित योगदान करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैं इस बात से आश्वस्त हूं कि जब हम सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समग्र दृष्टिकोण अपनाएंगे और इसके लक्षण तथा मूल कारणों से निपटेंगे तब आतंकियों के छिपने की जगह नहीं होगी।'

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