आखिर क्यों मच्छर झुंड में सिर पर मंडराते हैं ! Why the mosquitoes roam on the head

अभिषेक सिंह (Abhishek Singh)
ऐसा हमने जरूर बचपन मे देखा होगा और सोचा भी होगा की आखिर क्यों ऐसा मेरे साथ हो रहा है। सबसे अजीब बात ये की उस जगह से भागने पर भी वापस सिर पर मंडराने लगते थे। लेकिन शायद ही अब कोई ध्यान देता हो, मगर ऐसा अभी भी होता ही हैं कि मच्छर आपके सिर पर कई बार मंडराते हैं। ऐसी आदत न केवल मच्छरों है कि होती है बल्कि अन्य मक्खियों और कीड़े भी ऐसा करते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। यदि यह मादा मच्छर है, तो यह आपके सिर पर मंडराती है क्योंकि यह कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य पदार्थों (पसीना, गंध और गर्मी सहित) में रुचि रखता है जिसे आप लगातार निकालतेे हैं। उनके एंटीना पर सेंसर लगे होते हैं जो इन चीजों का पता लगाते हैं और भोजन के स्रोत का पता लगाने में उनकी मदद करते हैं। मच्छर विशेष रूप से ऑक्टेनॉल (मानव पसीने में पाया जाने वाला एक रसायन) के शौकीन हैं, इसलिए यदि आपको बहुत पसीना आ रहा होता हैं, तो आप इनके आसान लक्ष्य बन जाते हैं। कभी-कभी, आपने देखा होगा कि बगीचे में अपने दोस्तों से बात करते समय, मच्छरों का झुंड विशेष रूप से आपके सिर के ऊपर मंडरा रहा होता है और दूसरो…

समंदर से जुड़े अनसुलझे रहस्य !! Untold Mysteries Ocean


समंदर से जुड़े अनसुलझे रहस्य, जानकर आप भी हो
जाएंगे हैरान


जर्मन नाविक मैनफ्रेड फ्रिट्ज बेजोराट

धरती के दो-तिहाई हिस्से में समंदर ही समंदर है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हम चांद के बारे में ज्यादा जानते हैं और समुद्र के बारे में कम। क्योंकि हम अभी सागर के सिर्फ 5 फीसदी हिस्से के बारे में ही जानते हैं। 95 प्रतिशत समंदर अब भी हमारे लिए अनजाना है। समंदर अपने भीतर बड़े-बड़े राज़ छुपाए हुए है। हम आपके लिए लेकर आए हैं समंदर के ऐसे ही 10 अनसुलझे रहस्य
दक्षिणी फिलीपींस में समुद्र तट के करीब एक लावारिस नाव मिली थी। इसमें जर्मन नाविक मैनफ्रेड फ्रिट्ज बेजोराट का शव टेबल पर बैठी हुई स्थित में मिला था। ऐसा लग रहा था मानो फ्रिट्ज अपने हाथ पर सिर रखकर सो रहे हों। उनकी लाश सड़ी नहीं थी, बल्कि ममी जैसी बन चुकी थी। हालांकि ऑटोप्सी के बाद साइंटिस्ट यह जानकर हैरान रह गए कि बेजोराट की मौत महज 7 दिन पहले हुई थी। कुछ एक्सपर्ट्स का अनुमान था कि समुद्र के नमकीन और सूखे वातावरण में रहकर लाश ममी बन गई। लेकिन कोई यह नहीं बता पाया कि जहां दूसरी लाशों के ममी बनने में लंबा समय लगता है, वहीं बेजोराट की लाश सिर्फ हफ्तेभर में वैसे कैसे बन गई।


जापान में योनागुनी के तट पर ऐसी संरचनाएं मिली हैं, जो किसी पुराने शहर का अवशेष लगती हैं। हालांकि विशेषज्ञ इस बारे में एकराय नहीं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ये कुदरती संरचनाएं हैं और अपने आप बनी हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इन्हें इंसानों से इतर किसी अन्य सभ्यता ने बनाया है।

दक्षिणी जापान में समुद्र की तलहटी में गोल आकृतियां मिलती हैं। इन्हें सबसे पहले 1995 में देखा गया था। उसके बाद गोताखोरों को ऐसी कई आकृतियां मिलीं। बहुत-से लोग मानते हैं कि ये एलियंस का काम है। उनका मानना है कि यूएफओ, यानी कहा जाए कि एलियंस के प्लेन और शिप्स से ऐसी संरचनाएं बनती हैं। हालांकि 2011 में साइंटिस्ट्स ने बताया कि 5 इंच लंबी एक मेल पफर मछली ऐसी संरचनाएं बनाती है। वह फीमेल फिश को आकर्षित करने के लिए ऐसा करती है। इसके बावजूद बहुत-से लोग इसे एलियंस का काम ही मानते हैं।


कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सैलिश बीच पर इंसानी पैर मिलते रहे हैं। 2008 से शुरू हुए इस सिलसिले के तहत अब तक 16 पैर मिल चुके हैं। इनमें से कुछ पैराें में स्नीकर्स, हाई बूट और रेगुलर शूज भी थे। ये पैर वहां कैसे पहुंचते हैं, कोई उन्हें क्यों वहां छोड़ देता है और वे किसके पैर हैं, इन सारे सवालों का अब तक कोई जवाब नहीं मिल पाया है।

सदियों से किस्से-कहानियों और लोककथाओं में समुद्री दैत्यों का वर्णन मिलता है। बहुत सारे लोग इन्हें देखने का दावा भी करते हैं। माना जाता है कि ये भारी-भरकम, विशालकाय प्राणी समुद्र की गहराइयों में रहते हैं। सी-मॉन्स्टर्स ड्रैगन, सांप, स्क्विड्स किसी भी तरह के हो सकते हैं।

2011 में बाल्टिक सागर की तली में एक मिस्टीरियस ऑब्जेक्ट मिला था। माना जाता है कि इसमें जादुई शक्तियां हैं, जिनके चलते इसके आसपास गोताखोरों के उपकरण काम करना बंद कर देते हैं। बहुत-से लोगों का मानना है कि यह अंतरिक्ष के जीवों का स्पेस शिप है, जो दुर्घटना के बाद समुद्र में आ गिरा था।

2001 में क्यूबा में समुद्र के अंदर एक शहर का पता चला था। इसमें कई पिरामिड और गोल आकृति वाली संरचनाएं हैं, खंभे हैं और अन्य ज्यॉमेट्रिकल आकृतियां भी हैं। माना जाता है कि यह पानी में डूबा शहर है, जहां हजारों साल पहले लोग रहा करते थे।



ऑस्ट्रेलियाई साइंटिस्ट 9 फीट की एक ग्रेट व्हाइट शार्क पर रिसर्च कर रहे थे। एक दिन उन्होंने पाया कि शार्क बीच पर पड़ी हुई है। लहरें उसे किनारे तक बहा ले आई थीं। उस शार्क का आधा शरीर खाया जा चुका था। वैज्ञानिक यह देखकर हैरान रह गए, क्योंकि उन्हें यह सूझ ही नहीं रहा था कि समंदर में ऐसा कौन-सा जीव हो सकता है, जो इतनी बड़ी और खूंखार शार्क का भी शिकार कर सकता है। अनुमान लगाया गया कि दूसरा जीव और बड़ी शार्क हो सकती है। उसे कैनिबल शार्क नाम दिया गया है। हालांकि यह अब तक अनुमान ही है और सच्चाई के बारे में कोई भी पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकता।

2002 में जावा के पास समुद्र में सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौर के तीन डच युद्धपोतों के अवशेष मिले थे। माना गया कि जापानी सेना के साथ लड़ाई में इनका ये हाल हुआ था। इस लड़ाई में 2,200 लोग मारे गए थे। बहरहाल, उस समय क्या हुआ था, इस बारे में विशेषज्ञ पक्के तौर पर कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं।
1872 में अटलांटिक महासागर के बीच मेरी सेलेस्टे नामक जहाज लावारिस और जर्जर हालत में मिला था। जहाज पर क्रू का कोई मेंबर नहीं था, न ही किसी की लाश थी। अलबत्ता क्रू का सारा सामान और शराब अछूती ही पड़ी थी। अंदाजा लगाया गया कि समुद्र में भूकंप आने पर सारे क्रू मेंबर जहाज छोड़कर समुद्र में कूद पड़े होंगे। कुछ लोग इसे अनजान ताकतों को काम बताते हैं। एक सिद्धांत यह भी कहता है कि किसी बड़े समुद्री जीव का काम रहा होगा।

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